जो ठाकुर-ब्राह्मण UGC को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं,उनमें कोई सपा का है,कोई कांग्रेस का है, उन्हें ब्राह्मण-ठाकुर नहीं कह सकते, bjp नेता सुधीर सिंह.....!
अब सवाल यह है कि क्या किसी की राजनीतिक पसंद बदल जाने से उसकी जाति और पहचान भी बदल जाती है? हर प्रदेश, हर जिले और हर शहर में सवर्ण समाज.....!
“UGC रोलबैक” के नारे के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहा है,अगर उनमें से कोई सपा या कांग्रेस का समर्थक है,तो क्या वह सवर्ण समाज का हिस्सा नहीं रहेगा.....?
सवर्ण समाज किसी राजनीतिक दल की जागीर नहीं है,वोट देने का अधिकार रखने वाला हर व्यक्ति अपनी पसंद की पार्टी चुन सकता है और अपनी मांगों को लेकर आवाज भी उठा सकता है.....!
लेकिन अगर सत्ता के करीब खड़े होकर सवाल पूछने वाले सवर्णों को ही “सपा-कांग्रेस का आदमी” कहकर खारिज कर दिया जाएगा, तो फिर सवर्ण समाज को भी सोचना पड़ेगा.....!
चुनाव में वोट मांगने आने वाले नेताओं से सवाल क्या होगा? और अगर जवाब नहीं मिला,तो वोट का फैसला क्या होगा?क्योंकि सवर्ण समाज सिर्फ वोटबैंक नहीं,एक जागरूक मतदाता है....!