
12 सितंबर 1992 को एक ऐसी उड़ान हुई, जिसने सिर्फ अंतरिक्ष का सफर नहीं बदला… बल्कि लाखों लड़कियों को यह दिखा दिया कि उनके लिए भी अंतरिक्ष के दरवाजे खुले हैं। 🚀
उस दिन डॉ. मे जेमिसन ने स्पेस शटल एंडेवर से एसटीएस-47 मिशन के लिए उड़ान भरी और अंतरिक्ष में जाने वाली पहली अफ्रीकी-अमेरिकी महिला बनीं। यह मिशन करीब 8 दिन चला और उन्होंने अंतरिक्ष में 190 घंटे से ज्यादा समय बिताया।
लेकिन मे जेमिसन की कहानी सिर्फ इस रिकॉर्ड तक सीमित नहीं थी। वह इंजीनियर होने के साथ डॉक्टर भी थीं। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से केमिकल इंजीनियरिंग पढ़ने के बाद उन्होंने कॉर्नेल से मेडिकल डिग्री ली और पीस कॉर्प्स के साथ अफ्रीका में मेडिकल ऑफिसर के तौर पर भी काम किया।
नासा ने उन्हें 1987 में एस्ट्रोनॉट प्रोग्राम के लिए चुना। 1992 में उनकी पहली अंतरिक्ष उड़ान जापान की स्पेस एजेंसी के साथ मिलकर किए गए एक बड़े साइंस मिशन का हिस्सा थी।
इस मिशन में माइक्रोग्रैविटी के असर को समझने के लिए 44 प्रयोग किए गए। इनमें इंसानी शरीर, कोशिकाओं, पौधों, जानवरों और हड्डियों से जुड़े प्रयोग शामिल थे। जेमिसन ने खास तौर पर बोन सेल रिसर्च, स्पेस मोशन सिकनेस और अंतरिक्ष में मेंढकों के निषेचन जैसे प्रयोगों पर काम किया।
दिलचस्प बात यह है कि वह सिर्फ डॉक्टर और एस्ट्रोनॉट नहीं थीं। बचपन से ही उन्हें अंतरिक्ष और विज्ञान में गहरी दिलचस्पी थी और टीवी सीरीज स्टार ट्रेक से भी उन्हें प्रेरणा मिली थी।
उनकी कहानी आज भी एक सीधा संदेश देती है—किसी सपने के लिए रास्ता पहले से बना होना जरूरी नहीं, कभी-कभी तुम्हें ही पहला रास्ता बनाना पड़ता है।
ओरिजन सोर्स: नासा और नासा हिस्ट्री
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Bihar, India | Sep 12, 2026