Public App Logo
Jansamasya
हादसा
News
पुलिस
Maharashtra
Bjp
National
Police
Bihar
कांग्रेस
Congress
Accident
Modi
Delhi
Viral
Crime
Up
अमित_शाह
Bollywood
Breakingnews
Narendramodi
Madhya_pradesh
Mp
उत्तरप्रदेश
Pmmodi
Rahulgandhi
यूपी
Uttarpradesh
Haryana
Cricket

CPGRAMS (Centralized Public Grievance Redress and Monitoring System) यह भारत सरकार का आधिकारिक ऑनलाइन शिकायत पोर्टल है। इसका संचालन प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG) करता है। इस पोर्टल के माध्यम से नागरिक केंद्र सरकार, राज्य सरकारों तथा विभिन्न सरकारी विभागों से जुड़ी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। शिकायत की प्रगति ऑनलाइन ट्रैक की जा सकती है और समाधान से असंतुष्ट होने पर अपील भी की जा सकती है। CPGRAMS (PG Portal) CPGRAMS पर किन विषयों की शिकायत की जा सकती है? सड़क निर्माण, गड्ढे, पुल आदि बिजली आपूर्ति एवं विद्युत विभाग की समस्याएं पेयजल एवं जलापूर्ति सरकारी अस्पतालों में लापरवाही, स्वास्थ्य सेवाएं सरकारी विद्यालय, कॉलेज एवं शिक्षा विभाग राजस्व, नगर निकाय, पंचायत एवं अन्य सरकारी सेवाएं अवैध खनन अवैध वृक्ष कटान गौशाला एवं पशु संरक्षण से जुड़ी शिकायतें पर्यावरण प्रदूषण सरकारी योजनाओं में अनियमितता भ्रष्टाचार या सरकारी अधिकारियों द्वारा कार्य में लापरवाही (जहां संबंधित विभाग के अधिकार क्षेत्र में हो) शिकायत कैसे करें? CPGRAMS पोर्टल पर पंजीकरण करें। संबंधित मंत्रालय/विभाग का चयन करें। समस्या का स्पष्ट विवरण लिखें। फोटो, वीडियो या अन्य दस्तावेज़ (यदि उपलब्ध हों) संलग्न करें। शिकायत जमा करने के बाद एक पंजीकरण संख्या (Registration ID) प्राप्त होगी, जिससे शिकायत की स्थिति ऑनलाइन देखी जा सकती है। यदि समाधान संतोषजनक न हो यदि शिकायत का निस्तारण संतोषजनक नहीं है, तो CPGRAMS पर उपलब्ध अपील (Appeal) सुविधा का उपयोग किया जा सकता है। जन-जागरूकता संदेश: *"यदि आपके क्षेत्र में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, अवैध खनन, वृक्षों की कटान, गौशाला या किसी अन्य सरकारी सेवा से जुड़ी समस्या है, तो केवल सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के बजाय CPGRAMS पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। आपकी शिकायत संबंधित विभाग तक पहुंचती है, उसकी निगरानी की जाती है और उसके निस्तारण की प्रक्रिया ऑनलाइन ट्रैक की जा सकती है। जागरूक नागरिक बनें और अपने अधिकारों का उपयोग करें।" UP 90 Creator #up90Creator

Banda, Banda | Jun 25, 2026

MORE NEWS

बाँदा का ऐतिहासिक मोहर्रम : 9वीं तारीख़ पर बाबू बख्श और रामा के इमामबाड़ों में खेला गया अलाव, रात भर चलता रहा पारंपरिक ढालों का मिलाप
बाँदा शहर में मोहर्रम की दस दिवसीय धार्मिक एवं पारंपरिक श्रृंखला के अंतर्गत 9वीं मोहर्रम पर सदियों पुरानी परंपराओं का भव्य और भावपूर्ण आयोजन हुआ। बाबू बख्श के इमामबाड़े और रामा के इमामबाड़े में अकीदतमंदों ने पूरी श्रद्धा के साथ अलाव खेलकर शहीदाने कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश की।
9वीं मोहर्रम की रात बाँदा में ढालों के मिलाप की ऐतिहासिक परंपरा का विशेष महत्व होता है। लगभग सभी इमामबाड़ों में आसपास के मोहल्लों और क्षेत्रों से निकली ढालें पहुँचती हैं, जहाँ उनका पारंपरिक मिलाप कराया जाता है। यह सिलसिला पूरी रात चलता रहता है और अज़ादार एक इमामबाड़े से दूसरे इमामबाड़े तक पहुँचकर इस ऐतिहासिक रस्म में शामिल होते हैं।
विशेष रूप से रामा के इमामबाड़े में विभिन्न मोहल्लों और इमामबाड़ों से निकली पारंपरिक ढालों का भव्य मिलाप होता है, जिसे देखने के लिए हजारों लोग पूरी रात मौजूद रहते हैं। यह दृश्य बाँदा की मोहर्रम परंपरा की सबसे अनूठी और ऐतिहासिक पहचान माना जाता है।
इसके साथ ही बाबू बख्श के इमामबाड़े और रामा के इमामबाड़े में अलाव की रस्म अदा की गई। नौहाख्वानी, मातम और "या हुसैन (अ.स.)" की सदाओं से पूरा वातावरण गम, अकीदत और इमाम हुसैन (अ.स.) की याद में सराबोर रहा।
बाँदा का मोहर्रम केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गंगा-जमुनी तहज़ीब, आपसी भाईचारे, सामाजिक सौहार्द और साझा संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। यहाँ सभी समुदायों के लोग बढ़-चढ़कर इन परंपराओं में सहभागी बनते हैं, जो शहर की ऐतिहासिक विरासत को और भी मजबूत बनाती हैं।
इमाम हुसैन (अ.स.) की कुर्बानी हमें सत्य, न्याय, इंसानियत और अत्याचार के विरुद्ध डटकर खड़े होने का संदेश देती है। यही संदेश आज भी बाँदा की ऐतिहासिक मोहर्रम परंपराओं के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ रहा है।
या हुसैन (अ.स.)
बाँदा की ऐतिहासिक मोहर्रम परंपरा हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। 
UP 90 Creator
#Banda #Muharram #YaHussain #Alav #Dhal #BandaMuharram

बाँदा का ऐतिहासिक मोहर्रम : 9वीं तारीख़ पर बाबू बख्श और रामा के इमामबाड़ों में खेला गया अलाव, रात भर चलता रहा पारंपरिक ढालों का मिलाप बाँदा शहर में मोहर्रम की दस दिवसीय धार्मिक एवं पारंपरिक श्रृंखला के अंतर्गत 9वीं मोहर्रम पर सदियों पुरानी परंपराओं का भव्य और भावपूर्ण आयोजन हुआ। बाबू बख्श के इमामबाड़े और रामा के इमामबाड़े में अकीदतमंदों ने पूरी श्रद्धा के साथ अलाव खेलकर शहीदाने कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश की। 9वीं मोहर्रम की रात बाँदा में ढालों के मिलाप की ऐतिहासिक परंपरा का विशेष महत्व होता है। लगभग सभी इमामबाड़ों में आसपास के मोहल्लों और क्षेत्रों से निकली ढालें पहुँचती हैं, जहाँ उनका पारंपरिक मिलाप कराया जाता है। यह सिलसिला पूरी रात चलता रहता है और अज़ादार एक इमामबाड़े से दूसरे इमामबाड़े तक पहुँचकर इस ऐतिहासिक रस्म में शामिल होते हैं। विशेष रूप से रामा के इमामबाड़े में विभिन्न मोहल्लों और इमामबाड़ों से निकली पारंपरिक ढालों का भव्य मिलाप होता है, जिसे देखने के लिए हजारों लोग पूरी रात मौजूद रहते हैं। यह दृश्य बाँदा की मोहर्रम परंपरा की सबसे अनूठी और ऐतिहासिक पहचान माना जाता है। इसके साथ ही बाबू बख्श के इमामबाड़े और रामा के इमामबाड़े में अलाव की रस्म अदा की गई। नौहाख्वानी, मातम और "या हुसैन (अ.स.)" की सदाओं से पूरा वातावरण गम, अकीदत और इमाम हुसैन (अ.स.) की याद में सराबोर रहा। बाँदा का मोहर्रम केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गंगा-जमुनी तहज़ीब, आपसी भाईचारे, सामाजिक सौहार्द और साझा संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। यहाँ सभी समुदायों के लोग बढ़-चढ़कर इन परंपराओं में सहभागी बनते हैं, जो शहर की ऐतिहासिक विरासत को और भी मजबूत बनाती हैं। इमाम हुसैन (अ.स.) की कुर्बानी हमें सत्य, न्याय, इंसानियत और अत्याचार के विरुद्ध डटकर खड़े होने का संदेश देती है। यही संदेश आज भी बाँदा की ऐतिहासिक मोहर्रम परंपराओं के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ रहा है। या हुसैन (अ.स.) बाँदा की ऐतिहासिक मोहर्रम परंपरा हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। UP 90 Creator #Banda #Muharram #YaHussain #Alav #Dhal #BandaMuharram

Banda, Banda | Jun 26, 2026

बाँदा का ऐतिहासिक मोहर्रम : 9वीं तारीख पर बाबू बख्श और रामा के इमामबाड़ों में खेला गया अलाव, निकलीं पारंपरिक ढालें
बाँदा शहर में मोहर्रम की दस दिवसीय धार्मिक एवं पारंपरिक श्रृंखला के अंतर्गत बुधवार को 9वीं मोहर्रम पर बाबू बख्श के इमामबाड़े और रामा के इमामबाड़े में वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार अलाव खेला गया। इस दौरान शहर के विभिन्न मोहल्लों से पारंपरिक ढालें भी निकाली गईं, जिनमें बड़ी संख्या में अज़ादारों और श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
अलाव की रस्म देखने के लिए दोनों इमामबाड़ों पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी। अज़ादारों ने पूरी अकीदत के साथ अलाव की परंपरा निभाई और इमाम हुसैन (अ.स.) तथा शहीदाने कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश की। नौहाख्वानी, मातम और "या हुसैन" की सदाओं से पूरा वातावरण गम और श्रद्धा से सराबोर रहा।
बाँदा का मोहर्रम अपनी ऐतिहासिक और अनूठी परंपराओं के लिए पूरे बुंदेलखंड में विशेष पहचान रखता है। विशेष रूप से बाबू बख्श का इमामबाड़ा और रामा का इमामबाड़ा 9वीं मोहर्रम के अलाव की परंपरा के लिए प्रसिद्ध हैं। यहाँ आयोजित धार्मिक रस्में गंगा-जमुनी तहज़ीब, आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की मिसाल पेश करती हैं।
मोहर्रम के ये आयोजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि इमाम हुसैन (अ.स.) की कुर्बानी, सत्य, न्याय, इंसानियत और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष के संदेश को भी जन-जन तक पहुँचाते हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी सभी समुदायों के लोगों की सहभागिता ने बाँदा की साझा संस्कृति को और मजबूत किया।
या हुसैन (अ.स.)
बाँदा की ऐतिहासिक मोहर्रम परंपरा हमारी सांस्कृतिक विरासत है, जिसे संजोकर रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
UP 90 Creator 
#Banda #Muharram #YaHussain #Alav #Dhal

बाँदा का ऐतिहासिक मोहर्रम : 9वीं तारीख पर बाबू बख्श और रामा के इमामबाड़ों में खेला गया अलाव, निकलीं पारंपरिक ढालें बाँदा शहर में मोहर्रम की दस दिवसीय धार्मिक एवं पारंपरिक श्रृंखला के अंतर्गत बुधवार को 9वीं मोहर्रम पर बाबू बख्श के इमामबाड़े और रामा के इमामबाड़े में वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार अलाव खेला गया। इस दौरान शहर के विभिन्न मोहल्लों से पारंपरिक ढालें भी निकाली गईं, जिनमें बड़ी संख्या में अज़ादारों और श्रद्धालुओं ने भाग लिया। अलाव की रस्म देखने के लिए दोनों इमामबाड़ों पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी। अज़ादारों ने पूरी अकीदत के साथ अलाव की परंपरा निभाई और इमाम हुसैन (अ.स.) तथा शहीदाने कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश की। नौहाख्वानी, मातम और "या हुसैन" की सदाओं से पूरा वातावरण गम और श्रद्धा से सराबोर रहा। बाँदा का मोहर्रम अपनी ऐतिहासिक और अनूठी परंपराओं के लिए पूरे बुंदेलखंड में विशेष पहचान रखता है। विशेष रूप से बाबू बख्श का इमामबाड़ा और रामा का इमामबाड़ा 9वीं मोहर्रम के अलाव की परंपरा के लिए प्रसिद्ध हैं। यहाँ आयोजित धार्मिक रस्में गंगा-जमुनी तहज़ीब, आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की मिसाल पेश करती हैं। मोहर्रम के ये आयोजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि इमाम हुसैन (अ.स.) की कुर्बानी, सत्य, न्याय, इंसानियत और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष के संदेश को भी जन-जन तक पहुँचाते हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी सभी समुदायों के लोगों की सहभागिता ने बाँदा की साझा संस्कृति को और मजबूत किया। या हुसैन (अ.स.) बाँदा की ऐतिहासिक मोहर्रम परंपरा हमारी सांस्कृतिक विरासत है, जिसे संजोकर रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। UP 90 Creator #Banda #Muharram #YaHussain #Alav #Dhal

Banda, Banda | Jun 26, 2026

अब प्राइवेट स्कूलों की मनमानी नहीं चलेगी!
ए. एस. नोमानी का गुस्सा: शिक्षा के नाम पर लूट कब तक?
हर नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही हजारों अभिभावकों को भारी आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ता है। कई निजी स्कूलों पर आरोप लगते हैं कि वे अभिभावकों को एक तय दुकान से ही महंगी किताबें, कॉपियां, यूनिफॉर्म और अन्य सामग्री खरीदने के लिए बाध्य करते हैं। इसके साथ ही प्रवेश शुल्क और अन्य मदों में भी अतिरिक्त खर्च का दबाव महसूस किया जाता है।
बुंदेलखंड इंसाफ सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए. एस. नोमानी ने इस मुद्दे पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार का आर्थिक शोषण स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि यदि कोई स्कूल किसी विशेष दुकान से किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए दबाव बनाता है, तो यह अभिभावकों के अधिकारों का उल्लंघन है।
उन्होंने मांग की कि:
सभी स्कूलों में फीस और अन्य सभी शुल्कों की पारदर्शी रसीद अनिवार्य हो।
किसी एक दुकान से किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने की बाध्यता समाप्त की जाए।
गुणवत्तापूर्ण और किफायती किताबें सभी छात्रों को उपलब्ध कराई जाएं।
सरकारी और निजी विद्यालयों के लिए समान एवं पारदर्शी नियम लागू किए जाएं, ताकि सभी बच्चों को समान अवसर मिल सके।
उन्होंने यह भी कहा कि गरीब परिवारों पर बढ़ते शैक्षणिक खर्च का सबसे अधिक असर पड़ता है और शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो हर बच्चे के लिए सुलभ और न्यायसंगत हो।
यदि किसी निजी स्कूल द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जाता है, तो संबंधित कानूनों के अनुसार उसके विरुद्ध कार्रवाई और जुर्माने का प्रावधान हो सकता है। हालांकि, प्रत्येक मामले में कार्रवाई संबंधित राज्य के लागू नियमों और सक्षम प्राधिकारी की जांच पर निर्भर करती है।
आपकी राय क्या है?
क्या निजी स्कूलों द्वारा किताबें और यूनिफॉर्म किसी विशेष दुकान से खरीदने की शर्त पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें।
#PrivateSchool #Education #Parents #SchoolFees

अब प्राइवेट स्कूलों की मनमानी नहीं चलेगी! ए. एस. नोमानी का गुस्सा: शिक्षा के नाम पर लूट कब तक? हर नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही हजारों अभिभावकों को भारी आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ता है। कई निजी स्कूलों पर आरोप लगते हैं कि वे अभिभावकों को एक तय दुकान से ही महंगी किताबें, कॉपियां, यूनिफॉर्म और अन्य सामग्री खरीदने के लिए बाध्य करते हैं। इसके साथ ही प्रवेश शुल्क और अन्य मदों में भी अतिरिक्त खर्च का दबाव महसूस किया जाता है। बुंदेलखंड इंसाफ सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए. एस. नोमानी ने इस मुद्दे पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार का आर्थिक शोषण स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि यदि कोई स्कूल किसी विशेष दुकान से किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए दबाव बनाता है, तो यह अभिभावकों के अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने मांग की कि: सभी स्कूलों में फीस और अन्य सभी शुल्कों की पारदर्शी रसीद अनिवार्य हो। किसी एक दुकान से किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने की बाध्यता समाप्त की जाए। गुणवत्तापूर्ण और किफायती किताबें सभी छात्रों को उपलब्ध कराई जाएं। सरकारी और निजी विद्यालयों के लिए समान एवं पारदर्शी नियम लागू किए जाएं, ताकि सभी बच्चों को समान अवसर मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि गरीब परिवारों पर बढ़ते शैक्षणिक खर्च का सबसे अधिक असर पड़ता है और शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो हर बच्चे के लिए सुलभ और न्यायसंगत हो। यदि किसी निजी स्कूल द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जाता है, तो संबंधित कानूनों के अनुसार उसके विरुद्ध कार्रवाई और जुर्माने का प्रावधान हो सकता है। हालांकि, प्रत्येक मामले में कार्रवाई संबंधित राज्य के लागू नियमों और सक्षम प्राधिकारी की जांच पर निर्भर करती है। आपकी राय क्या है? क्या निजी स्कूलों द्वारा किताबें और यूनिफॉर्म किसी विशेष दुकान से खरीदने की शर्त पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें। #PrivateSchool #Education #Parents #SchoolFees

Banda, Banda | Jun 26, 2026

CPGRAMS (Centralized Public Grievance Redress and Monitoring System) यह भारत सरकार का आधिकारिक ऑनलाइन शिकायत पोर्टल है। इसका संचालन प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG) करता है। इस पोर्टल के माध्यम से नागरिक केंद्र सरकार, राज्य सरकारों तथा विभिन्न सरकारी विभागों से जुड़ी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। शिकायत की प्रगति ऑनलाइन ट्रैक की जा सकती है और समाधान से असंतुष्ट होने पर अपील भी की जा सकती है। CPGRAMS (PG Portal) CPGRAMS पर किन विषयों की शिकायत की जा सकती है? सड़क निर्माण, गड्ढे, पुल आदि बिजली आपूर्ति एवं विद्युत विभाग की समस्याएं पेयजल एवं जलापूर्ति सरकारी अस्पतालों में लापरवाही, स्वास्थ्य सेवाएं सरकारी विद्यालय, कॉलेज एवं शिक्षा विभाग राजस्व, नगर निकाय, पंचायत एवं अन्य सरकारी सेवाएं अवैध खनन अवैध वृक्ष कटान गौशाला एवं पशु संरक्षण से जुड़ी शिकायतें पर्यावरण प्रदूषण सरकारी योजनाओं में अनियमितता भ्रष्टाचार या सरकारी अधिकारियों द्वारा कार्य में लापरवाही (जहां संबंधित विभाग के अधिकार क्षेत्र में हो) शिकायत कैसे करें? CPGRAMS पोर्टल पर पंजीकरण करें। संबंधित मंत्रालय/विभाग का चयन करें। समस्या का स्पष्ट विवरण लिखें। फोटो, वीडियो या अन्य दस्तावेज़ (यदि उपलब्ध हों) संलग्न करें। शिकायत जमा करने के बाद एक पंजीकरण संख्या (Registration ID) प्राप्त होगी, जिससे शिकायत की स्थिति ऑनलाइन देखी जा सकती है। यदि समाधान संतोषजनक न हो यदि शिकायत का निस्तारण संतोषजनक नहीं है, तो CPGRAMS पर उपलब्ध अपील (Appeal) सुविधा का उपयोग किया जा सकता है। जन-जागरूकता संदेश: *"यदि आपके क्षेत्र में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, अवैध खनन, वृक्षों की कटान, गौशाला या किसी अन्य सरकारी सेवा से जुड़ी समस्या है, तो केवल सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के बजाय CPGRAMS पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। आपकी शिकायत संबंधित विभाग तक पहुंचती है, उसकी निगरानी की जाती है और उसके निस्तारण की प्रक्रिया ऑनलाइन ट्रैक की जा सकती है। जागरूक नागरिक बनें और अपने अधिकारों का उपयोग करें।" UP 90 Creator #up90Creator - Banda News