
सारण शिक्षक सीट पर रणधीर सिंह की अग्निपरीक्षा, क्या पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा पाएंगे?
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर हो रहे चुनाव के बीच 03-सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में राजनीतिक समीकरण दिलचस्प हो गए हैं। एनडीए ने इस सीट पर जदयू प्रत्याशी आनंद पुष्कर के समर्थन में मांझी से जदयू विधायक और पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह के पुत्र रणधीर सिंह को चुनाव प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी है। इस फैसले को सारण क्षेत्र में पुराने राजनीतिक प्रभाव और जातीय समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सारण, सीवान, गोपालगंज और चंपारण के जिले शामिल हैं। कभी इस क्षेत्र की राजनीति में पूर्व बाहुबली सांसद प्रभुनाथ सिंह का खासा प्रभाव माना जाता था। उम्मीदवारों को टिकट दिलाने से लेकर चुनाव में उनकी जीत सुनिश्चित करने तक उनकी भूमिका की चर्चा होती थी। क्षेत्र में उनके राजनीतिक प्रभाव के कारण उन्हें इस क्षेत्र का 'मुख्यमंत्री' तक कहा जाता था।
प्रभुनाथ सिंह की पकड़ राजपूत समाज के बीच मजबूत मानी जाती रही है। इसके साथ ही अन्य सामाजिक वर्गों में भी उनका प्रभाव रहा। उनकी इसी राजनीतिक हैसियत ने उन्हें सारण और आसपास के इलाकों की राजनीति में एक प्रमुख चेहरा बनाए रखा।
अब उनके पुत्र रणधीर सिंह के सामने इसी राजनीतिक विरासत को नए सिरे से साबित करने की चुनौती है। जदयू ने आनंद पुष्कर के पक्ष में उन्हें चुनाव की जिम्मेदारी देकर एक महत्वपूर्ण दांव खेला है। इस जिम्मेदारी की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है, क्योंकि भाजपा से जुड़े छपरा के रिविलगंज प्रखंड प्रमुख राहुल राज ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन किया है।
राहुल राज राजपूत समाज से आते हैं। ऐसे में चुनाव में इस समाज के मतदाताओं का समर्थन किस ओर जाता है, इस पर राजनीतिक निगाहें टिकी हैं। हालांकि, किसी एक प्रत्याशी के पक्ष में पूरे समाज के वोटों के जाने का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी।
रणधीर सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती एनडीए प्रत्याशी आनंद पुष्कर के पक्ष में समर्थन जुटाने और मतदाताओं को एकजुट करने की होगी। यदि वह इस जिम्मेदारी में सफल रहते हैं, तो जदयू के भीतर उनकी राजनीतिक हैसियत मजबूत हो सकती है। इसे प्रभुनाथ सिंह की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की दिशा में भी एक अहम कदम माना जा सकता है।
इसी सफलता के आधार पर भविष्य में पार्टी के भीतर उनकी भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हो सकती हैं। हालांकि, मंत्रिमंडल विस्तार में जगह मिलने या किसी बड़े राजनीतिक पद की संभावना फिलहाल अटकलों का विषय है।
यही वजह है कि रणधीर सिंह इस चुनाव में सक्रिय नजर आ रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि वह अपने पिता के पुराने राजनीतिक प्रभाव को चुनावी रणनीति में कितना बदल पाते हैं और आनंद पुष्कर के पक्ष में कितना समर्थन जुटा पाते हैं।
फिलहाल, सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का यह चुनाव केवल प्रत्याशियों की जीत-हार तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि यह रणधीर सिंह की राजनीतिक क्षमता और उनकी विरासत की भी परीक्षा बन गया है। अंतिम फैसला मतदाताओं के रुख से ही सामने आएगा।
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Chapra, Saran | Oct 19, 2026