
हाईकोर्ट का अहम फैसला: जनरल कट-ऑफ पार करने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी अनारक्षित श्रेणी में माने जाएंगे
स्क्रीनिंग चरण में ही मिलेगा अनारक्षित श्रेणी का लाभ, सरकार को तीन माह में स्पष्ट नीति बनाने का निर्देश
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने आरक्षण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि आरक्षित वर्ग के ऐसे मेधावी अभ्यर्थी, जो अनारक्षित श्रेणी के लिए निर्धारित कट-ऑफ अंक प्राप्त करते हैं, उन्हें स्क्रीनिंग चरण में ही अनारक्षित श्रेणी का अभ्यर्थी माना जाना चाहिए।
मंगलवार को स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी के पद पर भर्ती से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1994 की धारा 3(6) में ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है, जिसके तहत आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी का मेधा के आधार पर अनारक्षित श्रेणी में स्थानांतरण केवल अंतिम चयन के चरण में ही किया जा सके।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि आरक्षित वर्ग का अभ्यर्थी सामान्य श्रेणी के निर्धारित कट-ऑफ अंक हासिल करता है, तो उसे स्क्रीनिंग के स्तर पर ही अनारक्षित श्रेणी में माना जाना चाहिए।
अदालत ने संबंधित आयोग को तीन माह के भीतर कार्यालय ज्ञापन की प्रयोज्यता की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही राज्य सरकार को भी इस मुद्दे पर तीन माह के भीतर स्पष्ट नीति तैयार करने को कहा है।
हाईकोर्ट के इस फैसले को भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण और मेरिट के निर्धारण से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय के रूप में देखा जा रहा है। #AllahabadHighCourt #Reservation #UPPSC