पितृपक्ष में हरि की पैड़ी पर उमड़ रहा आस्था का सैलाब, पितरों को तर्पण कर रहे श्रद्धालु
राजस्थान और मध्यप्रदेश समेत दूर-दराज से पहुंच रहे श्रद्धालु, विभिन्न घाटों पर विधि-विधान से श्राद्ध और जलदान का दौर जारी
सोरोंजी। पितृपक्ष के अवसर पर तीर्थनगरी सोरों में पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और जलदान करने के लिए श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। हरि की पैड़ी गंगा घाट पर ब्रह्ममुहूर्त से ही श्रद्धालु पितरों की आत्मशांति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं। राजस्थान और मध्यप्रदेश समेत विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं।
सूर्योदय के साथ ही हरि की पैड़ी के अलग-अलग घाटों पर तीर्थपुरोहितों द्वारा श्रद्धालुओं को श्राद्ध एवं तर्पण की धार्मिक विधियां कराई जा रही हैं। बालाजी घाट, वराह घाट, भागीरथी गंगा घाट, श्याम वराह घाट और लक्ष्मणजी घाट सहित अन्य घाटों पर श्रद्धालु गंगा स्नान के बाद पितरों के निमित्त जलदान और तर्पण करते नजर आ रहे हैं। इससे घाटों पर पूरे दिन श्रद्धा और आस्था का वातावरण बना हुआ है।
आचार्य पंडित शशिधर द्विवेदी ने बताया कि सोरों की हरि की पैड़ी गंगा घाट पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने पितरों के निमित्त जलदान और तर्पण करने के लिए पहुंच रहे हैं। पितृपक्ष में यहां धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व माना जाता है।
तीर्थनगरी के विद्वान आचार्य धर्मेंद्र द्विवेदी ने कहा कि माता-पिता को दुखी करने वाली संतान को पितृ दोष लगता है और पितृ दोष का प्रभाव तीन पीढ़ियों तक रहने की मान्यता है। गरुड़ पुराण में भी पितरों और उनके प्रति किए जाने वाले कर्मों का विस्तृत वर्णन मिलता है।
उन्होंने कहा कि पितर हमारे पूर्वज हैं और उनके प्रति हमारा ऋण माना गया है। पूर्वजों ने अपने जीवन में परिवार और आने वाली पीढ़ियों के लिए अनेक उपकार किए हैं। इसलिए हमें उनका सम्मान करना चाहिए और भूल से भी उनकी आत्मा को दुख पहुंचाने वाला कार्य नहीं करना चाहिए।