
कालपी कोतवाली पर अवैध वसूली के गंभीर आरोप!
आखिर किसके संरक्षण में चल रहा लाखों का खेल?
रिलीज लेटर के बाद भी सुविधा शुल्क की चर्चा से मचा हड़कंप
जनपद जालौन की कालपी कोतवाली एक बार फिर गंभीर आरोपों को लेकर सुर्खियों में है।
क्षेत्रवासियों, वाहन स्वामियों और स्थानीय सूत्रों का आरोप है कि ओवरलोड वाहनों की कार्रवाई के बाद उन्हें छोड़ने की प्रक्रिया में कथित रूप से अवैध वसूली का खेल चल रहा है।
आरोप यह भी हैं कि न्यायालय और संबंधित विभागों से रिलीज आदेश मिलने के बाद भी वाहन स्वामियों को घंटों चक्कर कटवाए जाते हैं और कथित तौर पर सुविधा शुल्क की मांग की जाती है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष अभी सामने आना बाकी है।
क्या हैं आरोप?
सूत्रों के अनुसार, आरटीओ द्वारा ओवरलोड ट्रकों का चालान कर उन्हें मंडी कालपी में खड़ा कराया जाता है।
नियमानुसार संबंधित विभागों को रिपोर्ट भेजे जाने के बाद आगे की कार्रवाई होनी चाहिए।
लेकिन आरोप है कि कुछ मामलों में रिपोर्ट समय पर आगे नहीं बढ़ाई जाती और इसी बीच वाहन मालिकों से सेल टैक्स, खनिज और अन्य विभागों की कार्रवाई का डर दिखाकर कथित रूप से मोटी रकम वसूली जाती है।
वाहन स्वामियों का आरोप है कि सभी औपचारिकताएं पूरी कर रिलीज लेटर लेने के बाद भी कोतवाली पहुंचने पर उन्हें कभी कागजात तो कभी अन्य बहाने बनाकर रोका जाता है।
जब चालक और मालिक परेशान हो जाते हैं, तब कथित रूप से सुविधा शुल्क लेकर वाहन छोड़ दिए जाते हैं।
वाहन स्वामियों में आक्रोश
ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि लाखों रुपये का कर्ज लेकर वाहन खरीदे जाते हैं।
यदि हर स्तर पर जुर्माने और उसके बाद कथित अवैध वसूली का सामना करना पड़े, तो छोटे ट्रांसपोर्टरों के लिए कारोबार चलाना मुश्किल हो जाता है।
उठ रहे हैं कई बड़े सवाल
यदि लगाए जा रहे आरोप सही हैं तो यह केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं बल्कि कानून व्यवस्था और सरकारी तंत्र की पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्न है।
क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी?
क्या कथित वसूली में शामिल लोगों की पहचान होगी?
क्या वाहन स्वामियों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा?
या फिर मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दब जाएगा?
निष्पक्ष जांच की मांग
क्षेत्रवासियों और वाहन स्वामियों ने पुलिस अधीक्षक जालौन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए और यदि आरोप निराधार हैं तो पुलिस प्रशासन सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखकर स्थिति स्पष्ट करे।
अस्वीकरण: यह समाचार क्षेत्रवासियों, वाहन स्वामियों और स्थानीय सूत्रों द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का जवाब प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
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Kalpi, Jalaun | Jul 3, 2026