
95 परिवारों को जमीन का हक दिलाने वाले शिक्षक की मिसाल
सरकारी शिक्षक बाबूराम चौहान ने 95 परिवारों को उनकी जमीन का अधिकार दिलाकर सामाजिक न्याय की अनूठी मिसाल पेश की है।
उदयपुर में तैनात शिक्षक बाबूराम चौहान ने वर्ष 2008 से 2015 के बीच करीब 2,000 आरटीआई आवेदन, 500 से अधिक रिट याचिकाएं और 200 से ज्यादा द्वितीय अपीलें दायर कीं। करीब 10 बार हाईकोर्ट का रुख करने के बाद 35 नियम-विरुद्ध आवंटन निरस्त हुए और 95 परिवारों को उनकी जमीन वापस मिली।
मामला वर्ष 2015 में सामने आया, जब 2024 में सड़क निर्माण के दौरान एक मकान की छत हटाए जाने के बाद सुनवाई शुरू हुई। जिस नहर किनारे के क्षेत्र को कभी उजाड़ छोड़ दिया गया था, वहां से लावारिस शवों का सच सामने लाने की मुहिम भी शुरू हुई।
आरटीआई से वर्ष 2010 से 2025 के बीच करीब 2,301 शव मिलने की जानकारी सामने आई। सरकारी स्तर पर समाधान नहीं मिलने पर मामला अदालत तक पहुंचा, जिसके बाद सरकार को परिपत्र जारी करना पड़ा।
#संघर्ष से बदलाव तक
- 2,000 से अधिक आरटीआई आवेदन।
- 500 से ज्यादा रिट याचिकाएं।
- 200 से अधिक द्वितीय अपीलें।
- 35 अवैध आवंटन निरस्त।
- 95 परिवारों को जमीन का अधिकार।
- लावारिस शवों के मामले में सरकारी कार्रवाई।
बाबूराम चौहान की पहल बताती है कि जागरूक नागरिक, सूचना के अधिकार और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से लंबे समय से लंबित जनसमस्याओं का समाधान संभव है।
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