
पृथ्वी के नीचे सिर्फ चट्टानें नहीं हैं, बल्कि हजारों किलोमीटर गहराई में एक ऐसी दुनिया है जहाँ तापमान हजारों डिग्री तक पहुंच जाता है।
हम जिस जमीन पर खड़े हैं, वह पूरी पृथ्वी की तुलना में किसी पतले छिलके जैसी है।
पृथ्वी की सबसे ऊपर वाली ठोस परत को भूपर्पटी कहते हैं। जमीन के नीचे इसकी मोटाई औसतन करीब 30 किलोमीटर है, जबकि महासागरों के नीचे यह लगभग 5 किलोमीटर तक पतली हो सकती है। इसके नीचे शुरू होता है करीब 2,900 किलोमीटर मोटा मेंटल।
मेंटल को देखकर ऐसा लग सकता है कि यह पूरा पिघला हुआ लावा है, लेकिन ऐसा नहीं है। इसका ज्यादातर हिस्सा गर्म और ठोस चट्टान है, जो बहुत लंबे समय में बेहद धीरे-धीरे बह सकती है। इसी अंदरूनी हलचल का संबंध पृथ्वी की प्लेटों की गति से भी है।
इसके नीचे आता है बाहरी कोर, जो करीब 2,300 किलोमीटर मोटी तरल धातु की परत है। इसमें मुख्य रूप से लोहा और निकेल हैं। इस तरल धातु की लगातार हलचल पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र बनाने में मदद करती है, जो हमें अंतरिक्ष से आने वाले आवेशित कणों से बचाने में बड़ी भूमिका निभाता है।
सबसे अंदर है आंतरिक कोर। इसकी त्रिज्या करीब 1,221 किलोमीटर है और यह मुख्य रूप से ठोस लोहा-निकेल से बना है। यहां तापमान लगभग 5,400 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। इतना गर्म होने के बावजूद जबरदस्त दबाव के कारण यह हिस्सा ठोस रहता है।
दिलचस्प बात यह है कि इंसान पृथ्वी के अंदर इन परतों तक पहुंचा नहीं है। वैज्ञानिक भूकंप से पैदा होने वाली तरंगों के व्यवहार को देखकर अंदर की संरचना का पता लगाते हैं।
आपको पृथ्वी की कौन-सी अंदरूनी परत सबसे ज्यादा हैरान करती है?
ओरिजन सोर्स: यूएसजीएस और नासा
#BrahmandGyan #ब्रह्मांडज्ञान
#Earth #Science #Geology #EarthFacts #ScienceFac ts
Bihar, India | Aug 23, 2026