
सील अवैध क्लीनिक फिर खुले, स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से झोलाछाप डॉक्टरों के हौसले बुलंद!
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#हरदोई। जनपद में स्वास्थ्य विभाग की खाऊ-कमाऊ नीति व मिलीभगत से सील अवैध क्लीनिकों/अस्पतालों का बिना वैध पंजीकरण/मानकों के दोबारा खुलना जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा संरक्षण देने का स्पष्ट प्रमाण है। #कछौना में भी एक महीने पूर्व स्वास्थ्य विभाग के द्वारा सील हुए लगभग एक दर्जन अवैध क्लीनिक/अस्पताल गुपचुप तरीके से फिर से खुल गए हैं। जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से इन झोलाछाप डॉक्टरों के हौसले बुलंद हैं।
बताते चलें कि कछौना में कस्बे सहित ग्रामीण क्षेत्रों में दर्जनों अवैध/मानकविहीन क्लीनिक/अस्पताल/नर्सिंग होम व पैथॉलाजी लैब/अल्ट्रासाउंड सेंटर स्वास्थ्य मानकों को ताक पर रखकर मानव जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इन अवैध क्लीनिकों व अस्पतालों में झोलाछाप डॉक्टरों की लापरवाही से कई मरीजों की मौत हो चुकी है। नौ महीने पहले एक अवैध क्लीनिक पर झोलाछाप डॉक्टर के द्वारा गलत इलाज से एक महिला की मौत के मामले में उप्र मानवाधिकार आयोग से शिकायत पर आयोग द्वारा पारित एक आदेश के अनुपालन के क्रम में अवैध क्लीनिकों/अस्पतालों/लैबों पर कड़ी कार्रवाई हेतु हरदोई के मुख्य चिकित्साधिकारी(CMO) डॉ० भवनाथ पांडेय द्वारा चार सदस्यीय विशेष जांच समिति का गठन किया गया था जिसे कछौना क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों व अवैध क्लीनिकों/अस्पतालों/लैब के विरुद्ध अभियान चलाकर विधिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे, सीएमओ द्वारा गठित इस टीम में अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ० अरविंद कुमार सचान, उप मुख्य चिकित्साधिकारी(द्वितीय) डॉ० हेमंत कुमार राजपूत, उप जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ० विनीत तिवारी व संडीला सीएचसी अधीक्षक डॉ० मनोज कुमार सिंह को नामित किया गया था।
उक्त टीम ने बीते 8 मई को छापामार अभियान चलाकर कछौना में अवैध रूप से संचालित गाजू रोड पर बालाजी पॉली क्लीनिक, मकरंद क्लीनिक, हथौड़ा रोड पर स्थित चंद्रा क्लीनिक(डॉ आर.सी.विश्वकर्मा), श्रेया क्लीनिक (डॉ मनीष शुक्ला), लैब सहित गौसगंज रोड पर स्थित सुरेश क्लीनिक(डॉ सुरेश चौरसिया), नारायण हॉस्पिटल (डॉ देवेन्द्र मोहन) व राज क्लीनिक(डॉ. हसमत अली) को सील कर दिया था जबकि बाकी झोलाछाप डॉक्टर/क्लीनिक-अस्पताल-लैब संचालक अपना शटर गिराकर तितर-बितर हो गए थे। कछौना में अभी तक की स्वास्थ्य विभाग की सबसे बड़ी इस कार्रवाई से पूरे क्षेत्र के झोलाछापों में हड़कंप मच गया था लेकिन इन सील अवैध क्लीनिकों/अस्पतालों के संचालकों ने जिम्मेदारों की शह पर सील (ताला) तोड़कर अब फिर से इलाज करना शुरू कर दिया है।
इस पूरे प्रकरण को लेकर जब जिले के सीएमओ डॉ. भवनाथ पांडेय से बात की गई तो उन्होंने कहा कि सील किए गए सभी क्लीनिक/अस्पताल अभी भी सील हैं। अगर कोई झोलाछाप डॉक्टर ताला (सील) तोड़कर क्लीनिक/अस्पताल चला रहा है तो दूसरी टीम भेजकर उस पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। वहीं एसीएमओ डॉ० अरविंद कुमार सचान ने बताया कि वो सिर्फ नाम के ही नोडल हैं जबकि उन्हें कोई अधिकार प्रदत्त नही है और ना ही वो उस दिन जांच टीम में शामिल थे। अपने नाम के प्रयोग पर भी उनके द्वारा कई बार घोर आपत्ति जताई गई है और क्लीनिकल स्टैब्लिशमेंट से भी उनका कोई मतलब नहीं है।
#रिपोर्ट: एस.बी.सिंह सेंगऱ
Hardoi, Hardoi | Jun 22, 2026