
गांव कुड़ल से संबंध रखने वाले न्यायाधीश विनोद भारद्वाज और गांव हेतमपुरावासी न्यायाधीश संजय वशिष्ठ ने भिवानी बार से किए अपने संस्मरण सांझा
न्यायाधीश विनोद भारद्वाज, न्यायाधीश संजय वशिष्ठ और भिवानी के प्रशासनिक जज न्यायाधीश कुलदीप तिवारी ने किया भिवानी न्यायिक परिसर का निरीक्षण
भिवानी, 26 अगस्त। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश विनोद भारद्वाज, न्यायाधीश संजय वशिष्ठ और भिवानी के प्रशासनिक जज न्यायाधीश कुलदीप तिवारी बुधवार को भिवानी न्यायिक परिसर में पहुंचे। इस दौरान जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. गगनदीप कौर सिंह सहित भिवानी के अन्य न्यायिक अधिकारियों व बार एसोसिएशन के प्रधान संदीप तंवर सहित बार सदस्यों ने माननीय न्यायाधीशों का स्वागत किया। बार के सभागार में माननीय न्यायाधीशों के सम्मान में एक कार्यक्रम आयोजन किया गया। भिवानी के गांव कुड़ल से संबंध रखने वाले न्यायाधीश विनोद भारद्वाज और गांव हेतमपुरावासी न्यायाधीश संजय वशिष्ठ ने भिवानी बार के अपने संस्मरण सांझा किए। वहीं दूसरी ओर माननीय न्यायाधीशों ने लाइब्रेरी सहित न्यायिक परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान डीसी साहिल गुप्ता, एसएसपी सुमित कुमार और एसडीएम महेश कुमार भी मौजूद रहे।
बार रूम में अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए माननीय न्यायाधीश विनोद भारद्वाज ने कहा कि उनकी जन्म भूमि भी जिला भिवानी का गांव कुड़ल है और उन्होंने इसी भिवानी बार में प्रैक्टिस की है। उन्होंने जमीनी स्तर से अपने पेशे की शुरुआत की। उनको अच्छी तरह याद है कि उन्होंने पहले मुकदमे की फीस मात्र 1500 रुपए ली थी। आज जो उनके पास है, वह उसी की बरकत है। उन्होंने कहा कि अपने वरिष्ठï अधिवक्ताओं से बहुत कुछ सीखने को मिला। आज भी उनको बहुत कुछ याद आ रहा है।
बार रूम में अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए न्यायाधीश संजय वशिष्ठ ने कहा कि उनका पैतृक गांव हेतमपुरा व कर्मभूमि भिवानी बार है, ऐसे में वे बार में नहीं बल्कि एक परिवार में आए हैं। कार्यक्रम में उनके पिता वरिष्ठ अधिवक्ता गोपीराम वशिष्ठ भी मौजूद थे। न्यायाधीश संजय वशिष्ठ ने उनके सम्मान में दी गई पगड़ी को अपने पिता को पहनाई। न्यायाधीश श्री वशिष्ठ ने कहा कि उन्होंने जो कुछ भी सीखा है, वह यहीं से सीखा है। उन्होंने अपनी प्रैक्टिस की शुरुआत मात्र 1100 रुपए से की थी और फीस के पैसे अपनी मां के हाथों में दे दिए थे। उनकी मां ने वे पैसे गौशाला में दान कर दिए थे। उन्होंने युवा अधिवक्ताओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे कड़ी मेहनत करें। अपने काम पर ध्यान दें। वरिष्ठ अधिवक्ताओं के अनुभव से सीखें। उन्होंने कहा कि सबसे पहले अच्छा इंसान बनना जरूरी है।
भिवानी के प्रशासनिक जज न्यायाधीश कुलदीप तिवारी ने अपने संबोधन के दौरान जिला बार एसोसिएशन द्वारा रखी गई नए चैंबर, वाहन पार्किंग और फैमिली कोर्ट की स्थायी व्यवस्था बनाने की मांग पर हर संभव पूरा करवाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि बार और बैंच का गहरा नाता होता है। दोनों ही महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं को चाहिए कि वे जरूरतमंदों की अधिक से अधिक मदद करें। वकालत एक समाजसेवा भी है।
वहीं दूसरी ओर बार एसोसिएशन के प्रधान संदीप तंवर ने माननीय न्यायधीशों को स्वागत किया और बार से संबंधित विभिन्न मांगें रखी। उन्होंने बार के पदाधिकारियों के साथ न्यायाधीशों को बुक्के भेंटकर स्वागत किया और स्मृति चिन्ह भेंट किए। न्यायिक परिसर के निरीक्षण के दौरान डीएलएस के सचिव एवं सीजेएम पवन कुमार ने माननीय न्यायाधीशों को भिवानी में डीएलएसए की गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान भिवानी के न्यायिक अधिकारी, जिला बार एसोसिएशन के सभी पदाधिकारी, वरिष्ठ और युवा अधिवक्ता मौजूद रहे।