डूब क्षेत्र में करोड़ों के काम पर उठे सवाल, राघवपुर-मरवारी बांध परियोजना को लेकर जांच की मांग
45 गांवों के प्रभावित होने की बात, जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन बिछाने के कार्य को लेकर उठे सवाल
डिंडौरी जिले में प्रस्तावित राघवपुर-मरवारी बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर डूब क्षेत्र में जारी निर्माण कार्यों पर सवाल उठने लगे हैं। परियोजना से करीब 45 गांवों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। ऐसे में इन गांवों में जल जीवन मिशन के तहत करोड़ों रुपये की लागत से पाइपलाइन बिछाने के काम को लेकर अब सरकारी धन के उपयोग और निर्माण की भविष्य की उपयोगिता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, परियोजना के संभावित डूब क्षेत्र में नए शासकीय निर्माण कार्यों को लेकर प्रतिबंध संबंधी व्यवस्था लागू किए जाने की बात कही जा रही है। इसके बावजूद प्रभावित बताए जा रहे गांवों में पेयजल योजना के तहत पाइपलाइन बिछाने का काम जारी है।
बांध परियोजना के बीच पाइपलाइन पर सवाल
स्थानीय स्तर पर सवाल उठाया जा रहा है कि यदि संबंधित गांव भविष्य में बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले हैं, तो वहां करोड़ों रुपये खर्च कर स्थायी प्रकृति की जलापूर्ति संरचना तैयार करने का औचित्य क्या है। सवाल यह भी है कि इन कार्यों की तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृति किस स्तर पर दी गई।
आरोप लगाया जा रहा है कि यदि बांध निर्माण के बाद पाइपलाइन या उससे जुड़ी संरचनाएं डूब क्षेत्र में प्रभावित होती हैं, तो सरकारी राशि के दोबारा खर्च होने की स्थिति बन सकती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
करीब 10 करोड़ रुपये के निर्माण का भी उल्लेख
मामले में करीब दो वर्ष पहले बांध क्षेत्र में लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण कार्य कराए जाने का भी उल्लेख किया जा रहा है। ऐसे में अब जल जीवन मिशन के तहत किए जा रहे कार्यों को लेकर यह मांग उठ रही है कि संबंधित विभाग पूरे निर्माण की अनुमति, लागत, तकनीकी स्वीकृति और डूब क्षेत्र की स्थिति को सार्वजनिक करे।
जांच से साफ हो सकती है तस्वीर
मामले में मांग की जा रही है कि संबंधित विभागों द्वारा पूरे प्रकरण की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि प्रभावित गांवों में पाइपलाइन बिछाने के कार्य की अनुमति किस अधिकारी अथवा विभाग ने दी। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि क्या कार्य स्वीकृत परियोजना और डूब क्षेत्र से जुड़े प्रावधानों के अनुरूप हैं।
यदि भविष्य में बांध निर्माण के कारण वर्तमान में किए जा रहे कार्य प्रभावित होते हैं, तो संभावित वित्तीय नुकसान की जिम्मेदारी तय करने को लेकर भी स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग की जा रही है।
अब निगाहें संबंधित विभाग के आधिकारिक जवाब और जांच पर हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि डूब क्षेत्र में चल रहे इन कार्यों को किस आधार पर मंजूरी दी गई और सरकारी राशि के उपयोग को लेकर सभी प्रक्रियाओं का पालन हुआ या नहीं।
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