जनजातीय कला को नई पहचान दिलाने की पहल, गोंडी चित्रकला से साड़ी, टी-शर्ट और बैग को सजा रहे विद्यार्थी
चंद्र विजय महाविद्यालय में जनजातीय कला-कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित, युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
शासकीय चंद्र विजय महाविद्यालय, डिंडौरी में आयोजित जनजातीय कला-कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम में विद्यार्थियों को गोंडी चित्रकला एवं पारंपरिक जनजातीय कला का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए गोंडी कला को पारंपरिक चित्रकला तक सीमित न रखते हुए साड़ी, टी-शर्ट, पर्स एवं बैग पर भी उकेरने का नवाचार किया। विद्यार्थियों द्वारा तैयार की जा रही इन कलाकृतियों को उपयोगी उत्पादों के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि जनजातीय कला को दैनिक जीवन में भी स्थान मिल सके।
कार्यक्रम में जनजातीय कला एवं हस्तशिल्प को कौशल विकास और आजीविका से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। जनजातीय कला की देश-विदेश में बढ़ती मांग को देखते हुए ऐसे प्रशिक्षण युवाओं के लिए स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता के नए अवसर सृजित कर सकते हैं। इस पहल का उद्देश्य डिंडौरी की समृद्ध जनजातीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दिलाने के साथ स्थानीय युवाओं की रचनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करना है।
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