निकाय मंत्री विपुल गोयल की जुबान से मिठास, लेकिन कलम उगल रही है जहर : नरेश कुमार शास्त्री
- सैकड़ों कर्मचारियों पर झूठे मुकदमे, 100 से अधिक जेल में और लगभग 700 कर्मचारियों की बर्खास्तगी के आदेश
- जॉब सिक्योरिटी व पालिका रोल कर्मचारियों को जोखिम भत्ता देने का निर्णय भेदभाव एवं अन्यायपूर्ण
- 9 सितम्बर को शोक सभाएं, 10 से 12 सितम्बर तक शहरों में तथा 13 सितम्बर को कुरुक्षेत्र में राज्यस्तरीय जन न्याय पंचायत
चंडीगढ़।
नगर पालिका कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश शास्त्री ने आरोप लगाया है कि शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल की जुबान से कर्मचारियों के प्रति मिठास टपकती है, लेकिन उनकी कलम सफाई एवं फायर कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त करने के आदेश देकर जहर उगल रही है। एक तरफ मंत्री कर्मचारियों को जॉब सिक्योरिटी और जोखिम भत्ता देने का प्रचार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आंदोलनकारी कर्मचारियों पर झूठे मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेल भेजा और नौकरी से निकाला जा रहा है।
संघ के राज्य प्रधान नरेश कुमार शास्त्री, महासचिव मांगे राम तिगरा, हरियाणा अग्निशमन विभाग कर्मचारी यूनियन के राज्य प्रधान राजेंद्र सिंह तथा महासचिव गुलशन भारद्वाज ने संयुक्त रूप से कहा कि प्रदेशभर में सैकड़ों कर्मचारियों के विरुद्ध झूठे मुकदमे दर्ज किए गए हैं, 100 से अधिक कर्मचारियों को जेल भेजा गया है और लगभग 700 कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त करने के आदेश जारी किए जा चुके हैं। सरकार का यह रवैया उसके कथित कर्मचारी हितैषी दावों की सच्चाई उजागर करता है।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि संविदा रोजगार अधिनियम के तहत दी जा रही कथित जॉब सिक्योरिटी नियमित रोजगार का विकल्प नहीं है। इसी प्रकार हजारों सफाई एवं सीवर कर्मचारियों में से केवल 2,000 कर्मचारियों को जोखिम भत्ता देने का पत्र भी भेदभावपूर्ण और अन्यायपूर्ण है। सभी सफाई एवं सीवर कर्मचारी समान रूप से कठिन, जोखिमपूर्ण और आवश्यक कार्य करते हैं, इसलिए किसी भी सुविधा में भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।
संघ ने मांग की कि सफाई एवं सीवर कर्मचारियों के लिए विशेष कानून बनाकर उन्हें तृतीय श्रेणी कर्मचारियों के समान वेतन, भत्ते, पदोन्नति, चिकित्सा, बीमा और अन्य सेवा सुविधाएं दी जाएं। सरकार पालिका एवं फायर यूनियनों के साथ 13 मई को हुए समझौते को लागू करते हुए सभी स्वीकृत मांगों के लिखित आदेश तत्काल जारी करे।
कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार की उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों, धमकियों और पुलिसिया दमन से पैदा हुए तनाव के कारण कुरुक्षेत्र के कर्मचारी रोहित तथा करनाल के कर्मचारी कुलदीप की मृत्यु हुई है। दोनों दिवंगत कर्मचारियों को श्रद्धांजलि देने के लिए 9 सितम्बर को प्रदेश की सभी नगर पालिकाओं, नगर परिषदों, नगर निगमों एवं अग्निशमन केंद्रों पर शोक सभाएं आयोजित की जाएंगी।
संघ ने दोनों परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता तथा परिवार के एक सदस्य को नियमित सरकारी नौकरी देने की मांग की है।
आंदोलन के अगले चरण में 10, 11 और 12 सितम्बर को प्रदेश के सभी शहरों में जन न्याय पंचायतें आयोजित की जाएंगी। इसके बाद 13 सितम्बर को कुरुक्षेत्र में राज्यस्तरीय जन न्याय पंचायत होगी। इन पंचायतों में प्रदेश के कर्मचारी, मजदूर एवं किसान संगठनों के साथ व्यापारिक, राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक, दलित एवं नागरिक संगठनों तथा समाज के सभी वर्गों को आमंत्रित किया जाएगा।
जन न्याय पंचायतों के माध्यम से सरकार के अन्याय, दमन और कर्मचारी-विरोधी कार्रवाइयों को जनता के सामने रखते हुए न्याय की पुकार बुलंद की जाएगी। मुख्यमंत्री से अपील की गई है कि वह तत्काल हस्तक्षेप कर पालिका एवं फायर यूनियनों के साथ सीधी वार्ता करें, कर्मचारियों की मांगों का समाधान निकालें और प्रदेश की जनता को बदहाल सफाई व्यवस्था से राहत दिलाएं।
संघ ने चेतावनी दी कि कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने, सफाई एवं सीवर कार्य से ठेका प्रथा समाप्त करने, रिक्त पदों पर पक्की भर्ती करने तथा 13 मई के समझौते को पूरी तरह लागू किए बिना हड़ताल समाप्त नहीं होगी।
Sirsa, Sirsa | Sep 9, 2026