#नालंदा: जन सुराज से जुड़ीं MLC प्रत्याशी डॉ. दिव्या ज्योति, बोलीं- शिक्षकों की लड़ाई अब सड़क से लेकर सदन तक लड़ी जाएगी*
*नालंदा से संवाददाता राकेश कुमार*
नालंदा - पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव की तैयारी कर रहीं डॉ. दिव्या ज्योति ने प्रशांत किशोर के नेतृत्व वाली पार्टी जन सुराज का दामन थाम लिया है। पटना में पार्टी की विधिवत सदस्यता ग्रहण करने के बाद शनिवार को उन्होंने नालंदा जिले के बिहारशरीफ स्थित अपने कार्यालय में एक विस्तृत प्रेस वार्ता का आयोजन किया। इस दौरान उन्होंने जन सुराज से जुड़ने के कारणों को स्पष्ट किया और शिक्षकों के विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर मुखर होकर अपनी बात रखी। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि शिक्षकों की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए अब एक मजबूत और निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी।
**जन सुराज से जुड़ने का उद्देश्य और विचारधारा**
डॉ. दिव्या ज्योति ने बताया कि वह पिछले एक वर्ष से पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पटना, नालंदा और नवादा जिलों के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में लगातार शिक्षकों के बीच काम कर रही थीं। इस दौरान उन्हें शिक्षकों की पीड़ा और उनकी अनसुनी मांगों का गहरा अहसास हुआ। उन्होंने कहा कि जन सुराज केवल एक राजनीतिक संगठन नहीं है, बल्कि यह विकास, युवा, रोजगार, शिक्षा और सामाजिक बदलाव के मुद्दों पर मजबूती से काम करने वाला मंच है। बिहार को जिस नए नेतृत्व और बदलाव की आवश्यकता है, वह महात्मा गांधी और बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के सिद्धांतों पर चलने वाली जन सुराज पार्टी के जरिए ही संभव है। इसी सोच के साथ उन्होंने पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर के नेतृत्व पर भरोसा जताया है।
**वर्तमान प्रतिनिधि पर साधा निशाना**
चुनावी परिदृश्य पर चर्चा करते हुए डॉ. दिव्या ज्योति ने पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के वर्तमान एमएलसी पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र पूरे बिहार का सबसे संवेदनशील निर्वाचन क्षेत्र है, लेकिन पिछले तीस वर्षों से पांच बार एमएलसी बनकर सदन में बैठे प्रतिनिधि ने शिक्षकों के हित में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। वित्त रहित शिक्षकों की समस्याओं पर हमेशा सिर्फ आश्वासन की राजनीति की गई है। उन्होंने शिक्षक दिवस पर आयोजित कार्यक्रम का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के जरिए बयान दिलवाकर केवल एक चुनावी माहौल और दिखावा रचने की कोशिश की जा रही है, जिससे शिक्षकों में भारी रोष है।
**शिक्षकों के ज्वलंत मुद्दे और प्रमुख मांगें**
प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने शिक्षकों से जुड़े बुनियादी मुद्दों को विस्तार से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि समान कार्य के लिए समान वेतनमान, सातवें वेतन आयोग का पूर्ण लाभ और स्पष्ट सेवा नियमावली का निर्धारण शिक्षकों का संवैधानिक हक है। इसके साथ ही वरीयता के आधार पर प्रोन्नति, सुरक्षित और पारदर्शी स्थानांतरण नीति, सम्मानजनक पेंशन की व्यवस्था और वित्त रहित संस्थानों से जुड़े शिक्षकों की चार दशक पुरानी मांगों को पूरा कराना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके अलावा डिग्री कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता छीनकर उन्हें नौकरशाही के अधीन करने की सरकारी नीतियों का भी पुरजोर विरोध किया जाएगा।
**सदन में पहली बार गूंजेगी आधी आबादी की आवाज**
जनसंपर्क अभियान के अनुभवों को साझा करते हुए डॉ. दिव्या ज्योति ने कहा कि सभी स्कूलों, महाविद्यालयों और वित्त रहित शिक्षण संस्थानों में उन्हें शिक्षकों का अपार स्नेह, सहयोग और समर्थन मिल रहा है। शिक्षकों में इस बार बदलाव की एक नई उम्मीद जागी है। विशेष रूप से महिला शिक्षकों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षकों के आशीर्वाद से उन्हें सदन में पहुंचने का अवसर मिलता है, तो यह बिहार के संसदीय इतिहास में पहला अवसर होगा जब शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से आधी आबादी यानी एक महिला प्रतिनिधि सदन के भीतर शिक्षकों के अधिकारों की आवाज बुलंद करेगी।
Rahui, Nalanda | Sep 13, 2026