कभी भाजपा सरकार में जिनका सिक्का चलता था, आज उसी भाजपा सरकार में निर्दलीय विधायक होकर भी धक्के खाने पड़ रहे हैं।
सियासत में वक्त कब करवट बदल दे, कोई नहीं जानता…!
कल तक सत्ता के गलियारों में जिनकी तूती बोलती थी, आज उन्हीं को अपनी बात मनवाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।