लाइफ इंश्योरेंस यानी जीवन बीमा का मुख्य उद्देश्य बीमित व्यक्ति की असमय मृत्यु के बाद उसके परिवार को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना होता है। लेकिन क्या हो जब बीमा कंपनी यह आरोप लगाकर डेथ क्लेम खारिज कर दे कि पॉलिसीधारक ने पहले की किसी बीमा अर्जी या मेडिकल जानकारी को छुपाया था?
तेलंगाना राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (TSCDRC) के एक फैसले ने स्पष्ट किया है कि केवल जानबूझकर जानकारी छिपाने की बात कह देने से क्लेम खारिज नहीं किया जा सकता, बल्कि बीमा कंपनी को यह साबित भी करना होगा कि पॉलिसीधारक ने जानबूझकर ऐसा किया था।
Korba, Korba | Aug 17, 2026