#बलिया का रीटेक: परदे पर तालियां बटोरने वाला 'सिंघम', असल जिंदगी में आंसुओं का गुनहगार बन बैठा!
फिल्मों की रील लाइफ और हकीकत की रियल लाइफ का अंतर बलिया की इस दर्दनाक दास्तां ने साफ कर दिया है।
जहाँ पुलिस की बेरहमी ने एक हंसता-खेलता घर उजाड़ दिया, वहाँ खाकी आज भी अपने रूतबे के नशे में चूर है।
जब अपनों को खो चुकी बिलखती माँ और सहमे परिवार ने इंसाफ की गुहार लगाई, तो सामने हमदर्दी नहीं, फिल्मी तेवर थे।
जाँच करने पहुँचीं सीओ साहिबा के चेहरे पर संवेदना का एक कतरा तक न था, बस जुबां पर एक रूखा डायलॉग था।
कड़क आवाज में बोलीं— "जांच में साबित होगा, तभी गिरफ्तारी होगी", मानो सामने कोई फरियादी नहीं, गुनहगार खड़ा हो।
जिस घर का चिराग बुझ गया, जिसने अपना सब कुछ खो दिया, क्या उनके बहते आंसुओं की कोई कीमत नहीं?
परदे के 'सिंघम' अपराधियों पर गरजते हैं मैडम, बेबस और लाचार पीड़ितों पर अपनी धौंस नहीं जमाते।
अगर इंसाफ की चौखट पर भी सिर्फ खाकी का ऐसा ही अहंकार मिलेगा, तो इस सिस्टम से भरोसा उठना तय है।
#BalliaTragedy #SinghamVsReality #JusticeForVictim #UPPolice #EmotionalJustice #PoliceArrogance
UP Police