13,900 बच्चों से शुरू हुआ सफर, 96 नन्हे दिमागों ने जिला मंच पर दिखाया हुनर
शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने पंचकूला की अभिनव पहल की सराहना; KBC की तर्ज पर हुआ रोमांचक मुकाबला
पंचकूला, 8 अक्टूबर : निपुण पंचकूला मिशन के अंतर्गत जिला पंचकूला की अनूठी पहल जिला स्तरीय पज़ल एवं पैटर्न चैंपियनशिप–2026 का आयोजन गुरुवार को चितकारा इंटरनेशनल स्कूल, सेक्टर-28 में भव्य एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। हरियाणा के शिक्षा मंत्री श्री महिपाल ढांडा ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शिरकत की और विद्यार्थियों की प्रतिभा के साथ-साथ पंचकूला शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित इस अभिनव चैंपियनशिप की जमकर सराहना की।
यह प्रतियोगिता केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि 13,900 विद्यार्थियों से शुरू होकर विद्यालय, क्लस्टर और खंड स्तर की विभिन्न प्रतियोगिताओं से गुजरते हुए जिला स्तर तक पहुंचने वाली 45 दिन की सीखने और प्रतिभा निखारने की यात्रा रही। जिला स्तर पर विभिन्न चरणों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करके पहुंचे 96 विद्यार्थियों ने पज़ल, पैटर्न, तार्किक चिंतन, संख्या बोध एवं समस्या-समाधान की अपनी क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया।
*कार्टून पात्र बने टीमों की पहचान*
बच्चों के लिए प्रतियोगिता को रोचक और उत्साहपूर्ण बनाने के लिए प्रतिभागी टीमों को उनके पसंदीदा कार्टून एवं बाल पात्रों के नाम दिए गए। छोटा भीम, मोटू-पतलू, शिनचेन, मोगली, टॉम एंड जैरी जैसे नामों वाली टीमों ने पूरे उत्साह के साथ मुकाबले में हिस्सा लिया। इससे प्रतियोगिता में प्रतिस्पर्धा के साथ बच्चों की सहजता और आनंद भी बना रहा।
*KBC की तर्ज पर फास्टेस्ट फिंगर फर्स्ट ने बढ़ाया रोमांच*
जिला स्तरीय क्विज को ‘कौन बनेगा करोड़पति’ की फास्टेस्ट फिंगर फर्स्ट शैली में तैयार किया गया। विद्यार्थियों से चित्र आधारित पैटर्न, संख्या पैटर्न, तार्किक सोच और समस्या-समाधान से जुड़े प्रश्न पूछे गए। प्रत्येक प्रश्न बच्चों को केवल उत्तर याद करने के बजाय सोचने, नियम पहचानने, त्वरित निर्णय लेने और समाधान तक पहुंचने के लिए प्रेरित कर रहा था। प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों का आत्मविश्वास और उत्साह देखते ही बनता था।
*GPS सार्थक की टीम बनी चैंपियन*
जिला स्तरीय मुकाबले में GPS सार्थक की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया। विजेता टीम में विहान, अमरपाली गौतम, पंशुल तंवर और शौर्य बोरा शामिल रहे।
द्वितीय स्थान GMSPS अबयपुर की टीम ने हासिल किया। टीम के सदस्य दीपक प्रकाश, रिक्की कुमार, अनुराग और आर्यन रहे।
वहीं GMSPS सेक्टर-4 पंचकूला की टीम ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। टीम में मयंक साहू, आदित्य कुमार, सचिन और धनक शामिल रहे।
इस प्रकार तीनों विजेता टीमों के चार-चार विद्यार्थियों ने टीम भावना, तार्किक क्षमता और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता का शानदार परिचय दिया।
*शिक्षा मंत्री ने की शिक्षा विभाग की पहल की सराहना*
मुख्य अतिथि शिक्षा मंत्री श्री महिपाल ढांडा ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं बच्चों को रटने की प्रवृत्ति से बाहर निकालकर सोचने, समझने, तर्क करने और स्वयं समाधान खोजने के लिए प्रेरित करती हैं। उन्होंने पंचकूला शिक्षा विभाग द्वारा प्रारंभिक कक्षाओं के बच्चों के लिए की गई इस अभिनव पहल की विशेष सराहना की और विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।
चैंपियनशिप के सफल आयोजन में जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सुमन चौधरी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने पूरी प्रतियोगिता को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए अधिकारियों, खंड स्तर की टीमों, क्लस्टर प्रमुखों, मेंटर्स एवं शिक्षकों को निरंतर मार्गदर्शन दिया। उनके नेतृत्व में विद्यालय से जिला स्तर तक प्रतियोगिता की पूरी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित एवं पारदर्शी ढंग से आगे बढ़ाया गया।
इस अभिनव पहल के नोडल अधिकारी एवं जिला एफ़एलएन समन्वयक असिन्द्र कुमार ने चैंपियनशिप की संपूर्ण रूपरेखा, प्रतियोगिता के विभिन्न चरणों, अभ्यास सामग्री, पज़ल एवं पैटर्न आधारित गतिविधियों तथा जिला स्तरीय क्विज के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रतियोगिता को बच्चों की आयु एवं सीखने के स्तर के अनुरूप रोचक बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया।
कार्यक्रम में जिला परियोजना समन्वयक श्री जोगिंद्र लाठर, उप जिला शिक्षा अधिकारी श्री रमेश बत्रा एवं श्री नरोत्तम शर्मा, सार्थक स्कूल की प्रिंसिपल रेनू बाला और अध्यापक जितेंद्र आर्य, सीएमजीजीए दिव्या सिंह, विभिन्न खंडों के खंड शिक्षा अधिकारी, क्लस्टर प्रमुख, मेंटर्स तथा DIET पंचकूला के प्रवक्ता सहित शिक्षा विभाग के अनेक अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
पज़ल एवं पैटर्न चैंपियनशिप–2026 ने यह संदेश दिया कि यदि बच्चों को सीखने के लिए सही मंच और अवसर दिया जाए तो वे न केवल प्रश्नों के उत्तर खोज सकते हैं, बल्कि प्रश्नों के पीछे छिपे नियम को समझकर स्वयं समाधान की राह भी तलाश सकते हैं। 13,900 विद्यार्थियों से शुरू हुई यह यात्रा पंचकूला में ‘रटने से सोचने की ओर’ बढ़ते शिक्षा के नए दृष्टिकोण की प्रभावी मिसाल बनकर सामने आई।