प्रेस विज्ञप्ति
*चार महीने से SSP कार्यालय में शिकायत, फिर भी कार्रवाई नहीं; वरिष्ठ नागरिकों ने FIR दर्ज कर निष्पक्ष जांच की लगाई गुहार*
*पूरी रकम और अलॉटमेंट के बावजूद फ्लैट ट्रांसफर का आरोप, वरिष्ठ नागरिकों ने उठाए पुलिस कार्रवाई पर सवाल*
*फ्लैट विवाद में 4 महीने से न्याय की आस, SSP कार्यालय में शिकायत के बाद भी नहीं बढ़ी कार्रवाई*
*फ्लैट ट्रांसफर विवाद ने उठाए कई सवाल; FIR दर्ज करने और 2500 गज जमीन की रजिस्ट्री की जांच की मांग*
*अलॉटमेंट और पूरी भुगतान राशि के बावजूद तीसरे पक्ष को फ्लैट ट्रांसफर/बिक्री का आरोप*
*शिकायतकर्ताओं का दावा—वरिष्ठ नागरिक होने के बावजूद पुलिस द्वारा बार-बार बुलाकर किया जा रहा परेशान*
जीरकपुर, 8 अक्टूबर 2026:
जीरकपुर के पीर मुछल्ला स्थित M/s Royale Empire से जुड़े अनेकों फ्लैट के अलॉटमेंट लैटर देने के बाद कथित धोखाधड़ीपूर्ण एवं अवैध ट्रांसफर/बिक्री के मामले में शिकायतकर्ताओं राजिंदर सिंह बाजवा फ़्लैट नंबर 304, Block C और कृष्ण अवतार जोशी 303 Block F ने पुलिस कार्रवाई में हो रही देरी पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
तीनों शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वे वरिष्ठ नागरिक हैं और इस मामले को लेकर लगभग तीन महीने पहले SSP कार्यालय में लिखित शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन अभी तक मामले में अपेक्षित कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई है।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, उन्होंने संबंधित फ्लैट की पूरी बिक्री राशि का भुगतान किया था और फ्लैट विधिवत उनके नाम पर आवंटित किया गया था। इसके बावजूद आरोप है कि बाद में इसी फ्लैट को कथित तौर पर किसी तीसरे पक्ष को ट्रांसफर/बेचने की प्रक्रिया अपनाई गई। शिकायतकर्ताओं ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाने तथा तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर FIR दर्ज करने की मांग की है।
राजिंदर सिंह बाजवा और कृष्ण अवतार जोशी ने कहा कि SSP कार्यालय में शिकायत दिए हुए लगभग 4, महीने बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक मामले को उस स्तर तक आगे नहीं बढ़ाया गया है जिसकी उनसे अपेक्षा थी। उनका कहना है कि शिकायत के बावजूद उन्हें बार-बार पुलिस कार्यालय में बुलाया जा रहा है। दोनों शिकायतकर्ताओं ने कहा कि वे वरिष्ठ नागरिक हैं और बार-बार बुलाए जाने के कारण उन्हें मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने पुलिस अधिकारियों से मांग की कि उनकी उम्र और स्थिति को देखते हुए अनावश्यक रूप से बार-बार बुलाने के बजाय उपलब्ध दस्तावेजों, रिकॉर्ड और साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ाई जाए।
*अलॉटमेंट, भुगतान और कथित ट्रांसफर की जांच की मांग*
शिकायतकर्ताओं ने कहा कि उनके पास फ्लैट के अलॉटमेंट और भुगतान से संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं। उनका आरोप है कि जब फ्लैट की पूरी राशि का भुगतान किया जा चुका था और फ्लैट उनके नाम पर अलॉट किया गया था, तो बाद में उसे किसी तीसरे पक्ष को किस आधार पर ट्रांसफर अथवा बेचने की प्रक्रिया अपनाई गई, इसकी जांच होना आवश्यक है।
उन्होंने पुलिस से मांग की कि फ्लैट की मूल अलॉटमेंट, भुगतान की गई राशि, संबंधित एग्रीमेंट, ट्रांसफर/बिक्री से जुड़े दस्तावेज, रिकॉर्ड और सभी संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की गहन जांच की जाए।
शिकायतकर्ताओं ने प्रिंस गर्ग, निकिता गर्ग व अंजू सिंगला पत्नी लेट श्री जीवन गर्ग पर आरोप लगाया कि पूरे प्रकरण में यदि जांच के दौरान धोखाधड़ी, विश्वासघात, जालसाजी, गलत या कथित तौर पर जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल अथवा अन्य किसी कानूनी अनियमितता के तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
*2500 गज जमीन की रजिस्ट्री को लेकर भी उठे सवाल*
शिकायतकर्ताओं ने इस मामले से जुड़े एक अन्य महत्वपूर्ण बिंदु की जांच की भी मांग की है। उनका आरोप है कि प्रोजेक्ट पास होने के बाद भी लगभग 2500 गज जमीन 77 लाख में खरीद कर रजिस्ट्री निकिता गर्ग के नाम पर करवाई गई। जिसको उन्होंने लगभग 20 करोड़ के करीब बेचा बताया जा रहा है। जिसमें इन्होंने सरकार के रेवन्यू की भी चोरी की है, जो जाँच का विषय है।
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि इस जमीन की रजिस्ट्री, जमीन के मालिकाना हक, प्रोजेक्ट अप्रूवल, संबंधित राजस्व रिकॉर्ड, भुगतान एवं लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि प्रोजेक्ट पास होने के बाद उक्त 2500 गज जमीन की रजिस्ट्री किस आधार पर और किन परिस्थितियों में की गई। उनका कहना है कि इस पहलू की जांच भी पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
*अन्य फ्लैट धारकों ने भी रखी अपनी बात*
ईस मामले से जुड़े अन्य फ्लैट धारकों संदीप कटारिया, फ्लैट नंबर 401, ब्लॉक-F और शील कौशिक का, फ्लैट नंबर 503, ब्लॉक-C ने भी अपनी चिंताएं सामने रखी हैं।
संदीप कटारिया ने कहा कि फ्लैट से संबंधित दस्तावेजों और फ्लैट धारकों के अधिकारों की स्थिति को भी जांच का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी फ्लैट के अलॉटमेंट, भुगतान या ट्रांसफर की प्रक्रिया में अनियमितता हुई है तो संबंधित दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
वहीं शील कोशिक ने कहा कि फ्लैट धारकों ने अपनी मेहनत की कमाई से संपत्ति में निवेश किया है और उन्हें अपने फ्लैट तथा निवेश की स्थिति को लेकर स्पष्टता मिलनी चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कर प्रभावित लोगों को न्याय दिलाया जाए।
*FIR दर्ज कर समयबद्ध जांच की मांग*
राजिंदर सिंह बाजवा और कृष्ण अवतार जोशी ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति को बिना जांच दोषी ठहराना नहीं है। वे चाहते हैं कि उनके द्वारा दिए गए दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच हो तथा यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से अपील की कि SSP कार्यालय में लगभग चार महीने पहले दी गई शिकायत पर तत्काल संज्ञान लेते हुए FIR दर्ज की जाए, मामले की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच की जाए और फ्लैट के साथ-साथ 2500 गज जमीन की कथित रजिस्ट्री से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की जाए।
शिकायतकर्ताओं ने कहा कि वे वरिष्ठ नागरिक हैं और लंबे समय से अपनी शिकायत के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें बार-बार कार्यालय बुलाकर परेशान करने के बजाय मामले के उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों की जांच करते हुए जल्द से जल्द कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी चाहिए।
उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से उम्मीद जताई कि मामले में निष्पक्ष कार्रवाई होगी और यदि किसी भी व्यक्ति की भूमिका जांच में सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। Part 7