#बालाघाट
आरबीएसके बना पांच वर्षीय बैगा बालक सगन लाल के लिए जीवन की नई उम्मीद
लगातार प्रयासों से जबलपुर मेडिकल कॉलेज पहुंचा बालक, सफल उपचार के बाद स्वस्थ होकर लौटा घर
विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा परिवार के पांच वर्षीय बालक सगन लाल धुर्वे के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की टीम की सतत कोशिशें जीवन में नई उम्मीद लेकर आईं। बिरसा विकासखंड के ग्राम मातला निवासी सगन लाल को जीभ के असामान्य रूप से बढ़ जाने की गंभीर समस्या थी। चिकित्सा जांच में उसे Macroglossia (जीभ का असामान्य रूप से बढ़ जाना) तथा Lymphatic/Vascular Malformation की समस्या पाई गई थी। आरबीएसके टीम के निरंतर प्रयासों और बेहतर उपचार व्यवस्था के फलस्वरूप अब सगन लाल सफल उपचार के बाद स्वस्थ होकर अपने घर लौट रहा है।
बीमारी का पता चला तो शुरू हुई उपचार की कोशिश
आरबीएसके की टीम ने स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान सगन लाल की बीमारी की पहचान की। इसके बाद टीम ने बच्चे को बेहतर उपचार दिलाने के लिए उसके परिजनों से संपर्क किया और कई बार एम्बुलेंस भेजकर उसे अस्पताल लाने का प्रयास किया। लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के कारण बच्चे के परिजन उसे अस्पताल लाने के लिए तैयार नहीं हुए। सगन लाल छह बच्चों वाले परिवार का सदस्य है। उसके पिता रोजी-रोटी के लिए हैदराबाद गए हुए थे। ऐसे में परिवार की परिस्थितियां भी उपचार के रास्ते में चुनौती बनीं।
अंधविश्वास के कारण अस्पताल जाने से कर रहे थे इनकार
बच्चे के परिजन उसकी बीमारी को चिकित्सकीय समस्या मानने के बजाय इसे माता का प्रकोप मान रहे थे। उनका विश्वास था कि पंडा ने झाड़ फूक कर दिया है, अब पूजा-पाठ से बच्चा ठीक हो जाएगा। परिजन अस्पताल जाने से इनकार करते हुए घर पर ही उपचार कराने की बात कह रहे थे। ऐसी स्थिति में आरबीएसके टीम ने हार नहीं मानी। स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस प्रशासन ने समन्वय बनाकर परिवार को समझाया और बच्चे को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने के लिए प्रयास जारी रखे।
जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज तक पहुंचा सगन
लगातार प्रयासों के बाद सगन लाल को जिला चिकित्सालय बालाघाट में भर्ती कराया गया। यहां उपचार के बाद बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए उसे मेडिकल कॉलेज जबलपुर रेफर किया गया। प्रारंभ में परिजन जबलपुर जाने के लिए भी तैयार नहीं हुए और बच्चे को लेकर वापस ग्राम मातला चले गए। इसके बाद आरबीएसके टीम ने प्रशासन और पुलिस के सहयोग से दोबारा बच्चे और उसके परिजनों को साथ लेकर उपचार के लिए जबलपुर भेजने की व्यवस्था की। इस प्रयास से सगन लाल को विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकी।
बच्चे और परिवार की देखरेख के लिए की गई विशेष व्यवस्था
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शत्रुघ्न सिंह दाहिया के निर्देशन में बच्चे के उपचार के साथ-साथ उसके परिजनों की देखरेख की भी विशेष व्यवस्था की गई। 30 सितंबर 2026 को सगन लाल को मेडिकल कॉलेज जबलपुर में भर्ती कराया गया। परिवार को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए आरबीएसके टीम के एक सदस्य को साथ भेजा गया। पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा के सहयोग से एक पुरुष एवं दो महिला आरक्षकों की भी व्यवस्था की गई। जबलपुर संयुक्त संचालक कार्यालय की ओर से उप संचालक डॉ. सोनाली ठाकरे को बच्चे के उपचार के समन्वय की जिम्मेदारी दी गई। बच्चे के उपचार की स्थिति की प्रतिदिन रिपोर्ट कलेक्टर कुमार सत्यम एवं पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा को भेजी जाती रही, जिससे उपचार की पूरी प्रक्रिया की लगातार निगरानी होती रही।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में हुआ सफल उपचार
मेडिकल कॉलेज जबलपुर में पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. विकेश अग्रवाल की विशेष निगरानी में सगन लाल का उपचार किया गया। विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में आवश्यक उपचार मिलने के बाद बालक की स्थिति में सुधार हुआ। 8 अक्टूबर 2026 को सगन लाल को सफल उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज जबलपुर से डिस्चार्ज कर दिया गया। इसके बाद उसे एम्बुलेंस से बालाघाट के लिए रवाना किया गया। स्वस्थ होकर घर लौटते सगन लाल और उसके परिवार के चेहरे पर राहत और खुशी दिखाई दी।
आरबीएसके की संवेदनशील पहल बनी जीवन की उम्मीद
सगन लाल की कहानी केवल एक बच्चे के सफल उपचार की कहानी नहीं है, बल्कि यह बताती है कि समय पर बीमारी की पहचान, परिवार को समझाइश, विभागों के बीच समन्वय और लगातार प्रयास से कठिन परिस्थितियों में भी जरूरतमंद बच्चे तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं। जहां एक ओर परिवार सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों के कारण उपचार से दूर था, वहीं आरबीएसके टीम ने बच्चे को उसके हाल पर नहीं छोड़ा। स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस प्रशासन और मेडिकल कॉलेज जबलपुर के समन्वित प्रयासों से सगन लाल को विशेषज्ञ उपचार मिला और आज वह स्वस्थ होकर अपने घर लौट रहा है। आरबीएसके की यह पहल इस संदेश को मजबूत करती है कि किसी भी बच्चे की बीमारी को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। समय पर पहचान और उचित उपचार बच्चे को स्वस्थ एवं सुरक्षित भविष्य देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बैगा जनजाति के बच्चे को ग्राम मातला से लाकर मेडिकल कालेज जबलपुर तक पहुंचाने में राजाराम चक्रवर्ती जिला शीघ्र हस्तक्षेप प्रबंधक आर बी एस के बालाघाट का महत्व पूर्ण योगदान रहा ।
#सेवा_संकल्प_अभियान #SevaSankalpAbhiyan #CMMadhyaPradesh #JansamparkMP #healthminmp #WelfareTribal
1 views | Balaghat, Madhya Pradesh | Oct 8, 2026