#बालाघाट
सूरज की रोशनी बनी राधेश्याम की खेती की ताकत
कुसुम-बी योजना से मिला 3 हॉर्सपावर का सोलर पंप,
अब सिंचाई के लिए न बिजली की चिंता, न बिल का बोझ
खेती में सबसे बड़ी जरूरत पानी की होती है। बारिश अनिश्चित हो तो किसान की चिंता और बढ़ जाती है। खेत में कुआं होने के बावजूद यदि सिंचाई के लिए बिजली पर निर्भर रहना पड़े, तो फसल की लागत और परेशानी दोनों बढ़ जाती हैं। बालाघाट जिले की खैरलांजी तहसील के ग्राम सावरी के किसान राधेश्याम पताहे भी लंबे समय तक ऐसी ही परिस्थितियों से जूझते रहे। लेकिन अब उनकी खेती की तस्वीर बदल गई है। प्रधानमंत्री कृषक मित्र कुसुम-बी योजना के माध्यम से खेत के कुएं में 3 हॉर्सपावर का सोलर पंप स्थापित होने के बाद राधेश्याम सिंचाई के मामले में आत्मनिर्भर बन गए हैं।
पहले बिजली का इंतजार, अब सूरज की रोशनी पर भरोसा
राधेश्याम के खेत में कुआं तो था, लेकिन सिंचाई के लिए बिजली के पंप पर निर्भर रहना पड़ता था। बिजली आपूर्ति का समय निर्धारित होने के कारण उसी समय खेत की सिंचाई करनी पड़ती थी। कई बार जरूरत के समय बिजली उपलब्ध नहीं होने से परेशानी होती थी। इसके साथ ही बिजली के पंप के संचालन से आने वाला बिल खेती की लागत को बढ़ाता था। खैरलांजी क्षेत्र में कई बार औसत से कम वर्षा होने के कारण सिंचाई के वैकल्पिक साधनों की आवश्यकता महसूस होती है। ऐसे में राधेश्याम के लिए सोलर पंप किसी बड़ी सुविधा से कम नहीं है।
अनुदान से मिला सोलर पंप, कम हुई आर्थिक चिंता
कुसुम-बी योजना के अंतर्गत राधेश्याम को सोलर पंप स्थापित करने के लिए अनुदान का लाभ मिला। सोलर पंप के लिए उसे 90 प्रतिशत अनुदान मिला है और स्वषयं के अंशदान के रूप में 10 प्रतिशत अर्थात 20 हजार 968 रुपये की राशि जमा करना पड़़ा है। खेत के कुएं में 3 हॉर्सपावर का सोलर पंप लगने के बाद अब वे सूर्य की रोशनी का उपयोग कर अपनी फसलों की सिंचाई कर रहे हैं। अब उन्हें बिजली आने का इंतजार नहीं करना पड़ता। सुबह से शाम तक धूप उपलब्ध रहने के दौरान सोलर पंप के माध्यम से खेत में पानी पहुंचाया जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सौर ऊर्जा से सिंचाई होने के कारण बिजली बिल के खर्च से भी राहत मिली है।
धान की फसल को समय पर मिल रहा पानी
राधेश्याम वर्तमान में सोलर पंप की मदद से अपने खेत में लगी धान की फसल की सिंचाई कर रहे हैं। समय पर सिंचाई की सुविधा मिलने से उन्हें फसल की बेहतर देखभाल का भरोसा है। अब वे खेती को केवल बारिश के भरोसे नहीं छोड़ते, बल्कि अपने खेत में उपलब्ध जलस्रोत का उपयोग जरूरत के अनुसार कर पा रहे हैं। सिंचाई की स्थायी सुविधा मिलने के बाद राधेश्याम ने अपनी खेती का दायरा बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। वे आगामी रबी सीजन में गेहूं, चना, सब्जियां एवं अन्य फसलों की खेती करने की योजना बना रहे हैं। इससे एक ही मौसम की फसल पर निर्भरता कम होगी और वर्षभर खेती से आय अर्जित करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
सोलर पंप ने जगाई आत्मनिर्भरता की नई उम्मीद
राधेश्याम के लिए सोलर पंप केवल खेत में पानी पहुंचाने का साधन नहीं है, बल्कि यह खेती में आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। बिजली की उपलब्धता और बिल की चिंता से मुक्त होकर अब वे अपनी खेती की जरूरत के अनुसार सिंचाई कर पा रहे हैं। सौर ऊर्जा से चलने वाला यह पंप उनके खेत में नई संभावनाओं का रास्ता खोल रहा है। खरीफ में धान की फसल और रबी में गेहूं, चना व सब्जियों की खेती की तैयारी के साथ राधेश्याम की उम्मीदें भी बढ़ी हैं।
किसान राधेश्याम पताहे की कहानी यह बताती है कि जब खेत को सिंचाई का भरोसा मिलता है, तो किसान की मेहनत को नई ताकत मिलती है। कुसुम-बी योजना के तहत मिला सोलर पंप उनके लिए ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत के साथ-साथ खेती में आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य की नई उम्मीद बन गया है।
#सेवा_संकल्प_अभियान #SevaSankalpAbhiyan #CMMadhyaPradesh #JansamparkMP #NewenergyMp
1 views | Balaghat, Madhya Pradesh | Oct 8, 2026