हजारीबाग की अधूरी विकास परियोजनाओं में देरी और लागत वृद्धि
हजारीबाग: जिले में दो दशक से कई बड़ी विकास परियोजनाएं अधूरी हैं, जिनमें लागत बढ़ने और जमीन व विभागीय अड़चनों ने काम को प्रभावित किया है। 2004 में प्रस्तावित 52 करोड़ की रिंग रोड परियोजना अब 700 करोड़ के करीब पहुंच गई है, लेकिन अभी तक इसका केवल हिस्सा ही पूरा हुआ है। पेयजलापूर्ति योजना की लागत 416.56 करोड़ रुपये है, लेकिन वन विभाग, एनएचएआई और डीवीसी से अनुमति न मिलने के कारण काम अटका हुआ है।
बरही की ग्रामीण पेयजल योजना 10 करोड़ से बढ़कर 27 करोड़ तक पहुंच गई है, जबकि एयरपोर्ट परियोजना 36.720 करोड़ की स्वीकृति के बावजूद जमीन की कमी से प्रभावित है। 2009 में शुरू हुआ अल्पसंख्यक छात्रावास भी अब तक उपयोग में नहीं आ सका है। कुपोषण उपचार केंद्र अधूरा पड़ा है और कनहरी अंडरपास में जलभराव की समस्या बनी हुई है। 250 पंचायतों की 15 हजार से अधिक योजनाएं भी वित्तीय अड़चनों और देरी की वजह से प्रभावित हैं।
इन समस्याओं स