एक डीएम ऐसे भी है, जो अपने सहज और सरलता से लोगों के दिलों में एक अलग ही जगह बना रहे है।
जी हाँ , हम बात कर रहे है प्रतापगढ़ जिले के डीएम अभिषेक पांडेय जी की जो प्रतापगढ़ में अपनी क्रियाशीलता और बेबाक अंदाज से खासे चर्चा में है, वह आम जन मानस में बने अफसरशाही की छवि को बदल रहे है।
#अजगरा #महोत्सव संवाद बना आकर्षण का केंद्र
शंकर विद्यालय इण्टर कालेज कटैया में अजगरा महान संवाद कार्यक्रम का हुआ आयोजन
----------------------
आम नागरिक बनकर ‘अजगरा महान संवाद’ में शामिल हुए डीएम, सुने लोगों के विचार
----------------------
प्रतापगढ़-:
विकास खंड लक्ष्मणपुर के शंकर विद्यालय इंटर कॉलेज कटैया में ‘अजगरा महान संवाद-2026’ (द ग्रेट अजगरा डिबेट) का आयोजन किया गया। संवाद की प्राचीन परंपरा को पुनर्जीवित करने और जनकेंद्रित, लोकतांत्रिक एवं वैचारिक संवाद की संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों के साथ क्षेत्रीय लोगों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम में कुल 42 प्रतिभागियों ने विभिन्न विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए और सवालों के जवाब देकर अपनी तार्किक क्षमता एवं अभिव्यक्ति कौशल का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि जिलाधिकारी अभिषेक पाण्डेय अधिकारी की भूमिका में नहीं, बल्कि एक आम नागरिक के रूप में प्रतिभागियों के बीच कुर्सी पर बैठकर पूरे महासंवाद में शामिल हुए। उन्होंने प्रतिभागियों की प्रस्तुतियां ध्यानपूर्वक सुनीं और उनके विचारों पर संवाद भी किया।
जिलाधिकारी ने कहा मैं यहां किसी अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि एक आम नागरिक बनकर लोगों के बीच इस संवाद का हिस्सा बनने आया हूं। उन्होंने विजेता प्रतिभागियों से बातचीत कर उनके विचार सुने और उनके उत्साह की सराहना की। जिलाधिकारी ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि इस तरह के संवाद युवाओं में अपने विचार रखने, सवाल पूछने और अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने का आत्मविश्वास विकसित करते हैं। उन्होंने कहा कि संवाद केवल विचारों की अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में चिंतन और लोकतांत्रिक चेतना को मजबूत करने का प्रभावी जरिया भी है। उन्होंने यक्ष-युधिष्ठिर संवाद जैसी प्राचीन वैचारिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी समृद्ध संवाद परंपरा आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। जिलाधिकारी ने कहा कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता कराना या विजेता चुनना नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपरा, ज्ञान और वैचारिक विरासत से जोड़ना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से निरंतर पढ़ने, प्रश्न पूछने और तार्किक ढंग से अपनी बात रखने का आह्वान किया।
प्रतियोगिता में नम्रता विश्वकर्मा ने प्रथम, आशुतोष सिंह ने द्वितीय तथा रिद्धिमान शुक्ला ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।