मिट्टी बचेगी तो खेती बचेगी: कृषि विशेषज्ञ डॉ. डी.के. तिवारी ने विद्यार्थियों को दिए वैज्ञानिक खेती और करियर के मंत्र
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शासकीय आदर्श महाविद्यालय की छह दिवसीय कार्यशाला के चौथे दिन कृषि, रोजगार और स्वास्थ्य से जुड़े सवालों के दिए व्यावहारिक जवाब
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शासकीय आदर्श महाविद्यालय, विदिशा में "प्रशासनिक अधिकारी कैसे बनें" विषय पर आयोजित छह दिवसीय कार्यशाला का चौथा दिवस कृषि, वैज्ञानिक खेती और कृषि क्षेत्र में रोजगार के अवसरों पर केंद्रित रहा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कृषि विभाग के जिला समन्वयक डॉ. डी.के. तिवारी एवं विशेष अतिथि सहायक तकनीकी प्रबंधक अशोक रघुवंशी उपस्थित रहे। दोनों विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को आधुनिक कृषि तकनीकों, मिट्टी संरक्षण, जैविक खेती तथा कृषि क्षेत्र में उपलब्ध करियर संभावनाओं की विस्तृत जानकारी दी।
मुख्य अतिथि डॉ. डी.के. तिवारी ने अपने संबोधन में कहा कि आज के दौर में कृषि केवल परंपरागत आजीविका नहीं, बल्कि विज्ञान और तकनीक पर आधारित लाभकारी व्यवसाय बन चुकी है। उन्होंने कहा कि खेती की वास्तविक पूंजी मिट्टी है और यदि मिट्टी की गुणवत्ता एवं उर्वरता सुरक्षित नहीं रहेगी तो भविष्य में कृषि उत्पादन गंभीर रूप से प्रभावित होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि रासायनिक उर्वरकों का संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग करें तथा जैविक खाद और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने कहा कि "मिट्टी बचेगी तो खेती बचेगी और खेती बचेगी तो किसान तथा देश का भविष्य सुरक्षित रहेगा।"
विशेष अतिथि अशोक रघुवंशी ने कृषि विभाग की आत्मा योजना की जानकारी देते हुए बताया कि किसानों को समय-समय पर प्रशिक्षण, नई कृषि तकनीकों का प्रदर्शन और आधुनिक कृषि पद्धतियों की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। इससे खेती की लागत कम होती है, उत्पादन बढ़ता है और किसानों की आय में वृद्धि होती है।
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक हिस्सा विद्यार्थियों के साथ हुआ संवाद रहा, जिसमें उन्होंने कृषि, स्वास्थ्य, रोजगार और आधुनिक खेती से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे। डॉ. तिवारी ने सभी प्रश्नों के सरल, वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उत्तर देकर विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। बीए प्रथम वर्ष की छात्रा मुस्कान श्रीवास्तव ने कृषि क्षेत्र में नौकरी करने वाले अधिकारियों की कार्यशैली के बारे में प्रश्न किया। इस पर डॉ. तिवारी ने बताया कि कृषि अधिकारी किसानों से नियमित संपर्क रखते हैं, खेतों का निरीक्षण करते हैं, सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हैं तथा किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
छात्रा रूचि जैन ने हाईब्रिड बीजों के स्वास्थ्य पर प्रभाव के संबंध में सवाल किया। डॉ. तिवारी ने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक परीक्षण एवं स्वीकृति प्राप्त हाईब्रिड बीज पूरी तरह सुरक्षित होते हैं तथा स्वास्थ्य पर उनका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं होता। उन्होंने कहा कि संतुलित पोषण और सही खेती पद्धति अधिक महत्वपूर्ण है। अमोल सोले ने ऑर्गेनिक फसलों की पहचान के बारे में जानकारी चाही। इस पर डॉ. तिवारी ने बताया कि प्रमाणित जैविक उत्पादों पर अधिकृत प्रमाणन चिह्न अंकित होता है और केवल देखकर किसी फसल के ऑर्गेनिक होने की पहचान हमेशा संभव नहीं होती। शानू (बी.कॉम. प्रथम वर्ष) ने पूछा कि क्या अधिक यूरिया डालने से मिट्टी की क्षमता कम हो जाती है। इस पर डॉ. तिवारी ने कहा कि यूरिया का अत्यधिक उपयोग मिट्टी के जैविक संतुलन को प्रभावित कर सकता है। इसलिए रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने के साथ-साथ जैविक खाद का प्रयोग भी आवश्यक है। राशि कुशवाह (कक्षा 9वीं) ने कृषि क्षेत्र में करियर के अवसरों पर प्रश्न किया। डॉ. तिवारी ने बताया कि कृषि क्षेत्र में कृषि वैज्ञानिक, कृषि अधिकारी, एग्री-बिजनेस विशेषज्ञ, कृषि उद्यमी, कृषि पत्रकार और शोधकर्ता सहित अनेक क्षेत्रों में उज्ज्वल करियर की संभावनाएं उपलब्ध हैं।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. स्मिता सिंघई ने प्रभावी ढंग से किया तथा अंत में डॉ. अवधेश पांडे ने सभी अतिथियों, विद्यार्थियों एवं उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया। कार्यशाला के अगले दिन शुक्रवार को डॉ. सुरेश गर्ग विद्यार्थियों के साथ बेहतर स्वास्थ्य, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) की भूमिका तथा आदर्श नागरिक विषयों पर संवाद करेंगे। आयोजकों के अनुसार इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रशासनिक सेवाओं के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों की व्यावहारिक एवं समसामयिक जानकारी उपलब्ध कराकर उनके व्यक्तित्व और करियर विकास को नई दिशा देना है। #vidisha
7 views | Vidisha, Madhya Pradesh | Jul 23, 2026