पुलिस आधुनिकीकरण पर 980 करोड़ खर्च करने की तैयारी : डॉ. चौहान
पुलिस अकादमी मधुबन का किया भ्रमण
करनाल, 2 सितंबर। हरियाणा पुलिस भारत की सबसे अग्रणी और उन्नत पुलिस बलों में शुमार है और इसके आधुनिकीकरण पर अगले 2 वर्षों में 980 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए जाएंगे। हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान ने यह टिप्पणी हरियाणा पुलिस अकादमी मधुबन के राधाकृष्णन सभागार में केंद्रीय सचिवालय के प्रशिक्षु सहायक अनुभाग अधिकारियों को संबोधित करते हुए की। यह प्रशिक्षु अधिकारी पांच दिवसीय प्रशिक्षण के संबंध में हरियाणा आए हुए हैं। प्रशिक्षण का संचालन हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान और सचिवालय प्रशिक्षण एवं प्रबंधन संस्थान, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया जा रहा है।
डॉ. चौहान ने कहा कि हरियाणा पुलिस द्वारा प्रशिक्षण, तकनीक, अनुशासन और आधुनिक संसाधनों के समन्वय से पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। पुलिस अकादमी मधुबन में प्रशिक्षणार्थियों को पुलिस प्रशिक्षण की विभिन्न प्रक्रियाओं, आउटडोर प्रशिक्षण घटकों तथा आधुनिक पुलिसिंग की कार्यप्रणाली की जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थानों का भ्रमण प्रशिक्षु अधिकारियों को विभागीय समन्वय, नेतृत्व, अनुशासन और संस्थागत कार्यप्रणाली की व्यावहारिक समझ प्रदान करता है, जिसका लाभ उन्हें भविष्य में अपने प्रशासनिक दायित्वों के निर्वहन में मिलेगा।
डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों के लिए सरकारी नीतियों और योजनाओं की जानकारी के साथ-साथ उनके धरातलीय स्वरूप को समझना भी बेहद आवश्यक है। कार्यालय में बैठकर किसी योजना की प्रक्रिया और प्रावधानों को समझा जा सकता है, लेकिन उसके वास्तविक प्रभाव और चुनौतियों को तभी बेहतर तरीके से समझा जा सकता है, जब अधिकारी स्वयं धरातल पर जाकर संबंधित व्यवस्थाओं का अवलोकन करें और लोगों से संवाद करें। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों में इस प्रकार के शैक्षणिक एवं एक्सपोजर विजिट का उद्देश्य प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों को नजदीक से देखने और समझने का अवसर प्रदान करना है। डॉ. चौहान ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम सचिवालय, ग्राम सभा, जल संरक्षण की व्यवस्थाएं, सार्वजनिक स्थल और अन्य विकास कार्य सीधे तौर पर ग्रामीण जीवन से जुड़े होते हैं। इन व्यवस्थाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन करने से अधिकारियों को यह समझने में मदद मिलती है कि सरकारी योजनाएं और प्रशासनिक निर्णय किस प्रकार गांवों तक पहुंचते हैं तथा उनके क्रियान्वयन मे