हरदोई में बाल श्रम और मिड-डे मील अनियमितताओं का मामला गरमाया, आयोगों की सख्ती के बीच प्रशासन पर उठे सवाल
हरदोई। बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक विद्यालय कोटरा, विकास खंड टड़ियावां से जुड़ा बाल श्रम और मिड-डे मील में कथित अनियमितताओं का मामला अब स्थानीय स्तर से निकलकर संवैधानिक संस्थाओं और न्यायिक मंचों तक पहुंच गया है। विद्यालय के सहायक अध्यापक विनोद कुमार द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने संज्ञान लेते हुए विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई और जांच के निर्देश दिए हैं। वहीं मामले को लेकर जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है।
शिकायतकर्ता शिक्षक का आरोप है कि विद्यालय में बच्चों से कई दिनों तक ईंट ढुलवाने और शौचालय का मलबा उठवाने जैसा कार्य कराया गया, जिसके वीडियो साक्ष्य भी उपलब्ध कराए गए हैं। उनका यह भी आरोप है कि मिड-डे मील योजना के तहत पिछले दो वर्षों से दूध वितरण में अनियमितताएं हुईं और शासन द्वारा निर्धारित मात्रा से कम दूध बच्चों को दिया गया। शिकायत में इन सभी आरोपों से संबंधित डिजिटल साक्ष्य भी उपलब्ध कराए जाने का दावा किया गया है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, मामले में आरोपित प्रधानाध्यापक, शिक्षामित्र और एक अन्य कर्मचारी का वेतन बहाल कर दिया गया, जबकि शिकायत उजागर करने वाले शिक्षक तथा विद्यालय की रसोइयों का वेतन अब भी रोका गया है। उनका आरोप है कि यह कार्रवाई प्रतिशोध की भावना से की गई है।
मामले में मानवाधिकार आयोग द्वारा जिलाधिकारी को जांच के निर्देश दिए गए थे। आयोग के पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, समय पर रिपोर्ट प्रस्तुत न होने पर आयोग ने नाराजगी जताते हुए अगली सुनवाई 11 सितंबर 2026 निर्धारित की है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी समय-समय पर संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।
इधर, मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने जांच के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS), जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) तथा सहायक श्रमायुक्त की त्रिसदस्यीय समिति गठित की है। समिति को वित्तीय अभिलेखों, मिड-डे मील से जुड़े रिकॉर्ड तथा बाल श्रम से संबंधित आरोपों की जांच कर निर्धारित अवधि में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि इस पूरे प्रकरण में कुछ अहम सवाल अब भी बने हुए हैं। यदि संबंधित अधिकारियों द्वारा पहले ही कुछ तथ्यों की पुष्टि की जा चुकी थी और विभिन्न आयोग लगातार कार्रवाई के निर्देश दे रहे थे, तो अब तक कथित जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध क्या कार्रवाई हुई? शिकायतकर्ता का वेतन लंबे समय से रोके जाने के पीछे क्या कारण हैं? और सबसे महत्वपूर्ण यह कि क्या नई जांच समिति निष्पक्ष जांच कर दोषियों की जिम्मेदारी तय करेगी?
फिलहाल पूरे मामले पर शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन और संबंधित आयोगों की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। वहीं, आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच रिपोर्ट और सक्षम प्राधिकार के निर्णय के बाद ही होगी।
Bilgram, Hardoi | Jul 11, 2026