पति की मौत के बाद उजड़ गया आशियाना, पांच मासूम बच्चों के साथ भूख और बेबसी से जूझ रही विधवा; सरकार से लगाई जीवन बचाने की गुहार
हरदोई। हरियावां विकासखंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत पिपरी-नेवादा की रहने वाली पूनम सिंह के लिए पति की मौत के बाद जिंदगी मानो थम सी गई है। तीन माह पहले बीमारी से पति सुधीर कुमार सिंह के निधन के बाद अब पांच मासूम बच्चों की पूरी जिम्मेदारी उनके कमजोर कंधों पर आ गई है। आर्थिक तंगी इस कदर है कि कई बार बच्चों को दिन में केवल एक वक्त का भोजन ही नसीब हो पाता है।
पूनम सिंह ने जिलाधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि उनके परिवार के पास न तो रहने के लिए पक्का घर है और न ही आय का कोई स्थायी साधन। चार बेटियों और सात वर्षीय बेटे के पालन-पोषण की चिंता उन्हें हर पल सता रही है। बच्चों की पढ़ाई, भोजन और भविष्य सब कुछ अनिश्चितता के बीच झूल रहा है।
उन्होंने बताया कि सरकारी योजनाओं का लाभ भी परिवार तक नहीं पहुंच पा रहा है। राशन कार्ड में बच्चों के नाम दर्ज नहीं हैं, जबकि दो बच्चों के आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र भी अब तक नहीं बन सके हैं। ऐसे में परिवार खाद्यान्न, पेंशन और अन्य सरकारी सहायता से भी वंचित है।
पूनम सिंह ने जिलाधिकारी से विधवा पेंशन, राशन कार्ड में बच्चों के नाम दर्ज कराने, आधार कार्ड व जन्म प्रमाण पत्र बनवाने, प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने तथा परिवार की जांच कर तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
यह मामला केवल एक परिवार की बेबसी नहीं, बल्कि उन सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर भी सवाल खड़ा करता है, जिनका उद्देश्य संकटग्रस्त और असहाय परिवारों को समय पर सहारा देना है। पति की मृत्यु के तीन महीने बाद भी यदि एक विधवा अपने पांच छोटे बच्चों के साथ भूख, अभाव और असुरक्षा में जीवन बिताने को मजबूर है, तो संबंधित विभागों की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता पर भी गंभीर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
अब निगाहें जिला प्रशासन पर हैं कि वह इस परिवार की स्थिति का संज्ञान लेकर केवल औपचारिक जांच तक सीमित न रहे, बल्कि जरूरतमंद परिवार को शीघ्र राहत और सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ उपलब्ध कराए, ताकि पांच मासूम बच्चों का भविष्य अभाव और भूख की भेंट न चढ़े।
Bilgram, Hardoi | Jul 11, 2026