वासुकी तीर्थ तालाब में जारी मछली पालन, पट्टा निरस्तीकरण की मांग फिर हुई तेज
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#हरदोई: हाल ही में नैमिषारण्य में सम्पन्न हुई 84 कोसी दधीचि परिक्रमा के दौरान वासुकी तीर्थ तालाब को लेकर उठे विवाद ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। परिक्रमा निरीक्षण के दौरान कोथावां स्थित रामलीला मैदान पहुंची प्रशासनिक टीम के समक्ष स्थानीय पड़ाव प्रभारी ने वासुकी तीर्थ तालाब की स्थिति से अधिकारियों को अवगत कराया था।
पड़ाव प्रभारी सत्यप्रकाश सिंह के अनुसार, यह तालाब कई अभिलेखों में वासुकी तीर्थ के नाम से दर्ज है, लेकिन दशकों से संडीला तहसील प्रशासन द्वारा इसका पट्टा किए जाने के कारण यहां लगातार मछली पालन कराया जा रहा है। इससे 84 कोसी परिक्रमा में शामिल संतों और श्रद्धालुओं को स्नान, मार्जन एवं धार्मिक अनुष्ठानों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
निरीक्षण के दौरान मौजूद अधिकारियों के समक्ष पड़ाव प्रभारी ने तालाब का पट्टा निरस्त कर इसे अतिक्रमण एवं व्यावसायिक गतिविधियों से मुक्त कराने की मांग की थी। उस समय उपजिलाधिकारी नारायणी भाटिया ने आश्वासन दिया था कि परिक्रमा मार्ग और उससे जुड़े तीर्थ स्थलों को कब्जामुक्त कराकर पर्यटन विभाग के माध्यम से उनका विकास कराया जाएगा।
हालांकि परिक्रमा समाप्त हुए कई माह बीत जाने के बाद भी वासुकी तीर्थ तालाब में बड़े पैमाने पर मछली पालन जारी है। ग्रामीणों की शिकायत पर मौके पर पहुंची द टेलीकास्ट की टीम ने तालाब के बीचों-बीच मछुआरों को मछली पकड़ते देखा।
इस स्थिति को लेकर संत समाज, स्थानीय श्रद्धालुओं और पड़ाव प्रभारी में रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व वाले इस तीर्थ स्थल को संरक्षित किया जाए तथा तालाब का पट्टा निरस्त कर इसकी पवित्रता और मूल स्वरूप को बहाल किया जाए।
#रिपोर्ट: पुनीत मिश्रा/बेनीगंज
Hardoi, Hardoi | Jun 3, 2026