गंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि के बाद सोमवार अहले सुबह बछवाड़ा प्रखंड स्थित ONS चिमनी के समीप जमींदारी बांध लगभग 30 फीट टूट गया। इस घटना से रानी एक, रानी दो और रानी तीन पंचायतों का हिस्सा जलमग्न हो गया, जिससे किसानों की सैकड़ों बीघा फसलें डूब गईं।
बांध टूटने के बाद अहले सुबह जब लोगों की नींद खुली तो लोगों ने देखा कि घर के चारों ओर पानी से घिरा हुआ है और घरों के अंदर में पानी घुस चुका है। लोग घुटने भर पानी में आवाजाही कर रहे थे, जबकि कई पशुपालकों के मवेशियों के डेरे भी पानी में डूब गए। आनन-फानन में पशुपालक अपने मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाते दिखे।
बांध टूटने की सूचना मिलते ही जल संसाधन विभाग के एसडीओ मनीष कुमार, अनुमंडलाधिकारी तेघड़ा नीरज सिन्हा, डीएसपी कृष्ण कुमार, प्रखंड विकास पदाधिकारी डॉ. अमित कुमार, अंचलाधिकारी प्रीतम गौतम और पंचायती राज पदाधिकारी विश्वनाथ कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौके पर पहुंचे और उन्होंने स्थिति का जायजा लिया।
जल संसाधन विभाग द्वारा बांध की मरम्मत का कार्य किया जा है। हालांकि, पानी का बहाव अभी भी गांवों की ओर फैल रहा है, जिससे स्थिति गंभीर बनी हुई है।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष शिव प्रकाश गरीब दास ने जमींदारी बांध टूटने से उत्पन्न भयावह स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने इसे केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि तटबंधों के समय पर निरीक्षण, रखरखाव और जल संसाधन विभाग की लापरवाही का परिणाम बताया। गरीब दास ने जल संसाधन मंत्री और बेगूसराय के जिला पदाधिकारी को लिखित आवेदन देकर तत्काल 50 फीट तक बांध की युद्धस्तर पर मरम्मत, प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने और किसानों व ग्रामीणों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
सांसद प्रतिनिधि प्रभाकर राय ने भी विभागीय लापरवाही को बांध टूटने का कारण बताया। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इसकी मरम्मत कर दी जाती तो सैकड़ों बीघा फसल बर्बाद नहीं होती और कई घर इसकी चपेट में नहीं आते। स्थानीय ग्रामीण सुरेंद्र राय ने कहा कि बांध टूटने से किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं और पूरे क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ है।
जल संसाधन विभाग के एसडीओ मनीष कुमार ने कहा कि रात्रि 12 और एक बजे जमींदारी बांध पर पेट्रोलिंग किया गया था और रात करीब 3:00 बजे बांध कमजोर और पानी के रिसाव की सूचना मिली थी। उन्होंने कहा कि बांध के नजदीक 300 से 400 मीटर के हिस्से में काफी गहरा गड्ढा था और तार के पेड़ थे। जिस वजह से अनुमान लगाया जा रहा है कि पानी का दबाव बढ़ाने के कारण यह बांध टूटा है। हालांकि, बांध मरम्मती का कार्य किया जा रहा है और जल्द ही इससे निजात मिल सकेगी।