कारूडीह में एक्सपायरी दवा खाने से मरीज बेहोश, कथित झोलाछाप डॉक्टर के क्लीनिक में हंगामा
सर्दी-जुकाम की दवा लेने के बाद संत कुमार सिन्हा की तबीयत बिगड़ने का आरोप; क्लीनिक में रखी दवाओं की वैधता पर उठे सवाल, चिकित्सा योग्यता का प्रमाणपत्र नहीं दिखा सके विक्रम सिकदर
राजधनवार (गिरिडीह)। गिरिडीह जिले के राजधनवार थाना क्षेत्र के कारूडीह गांव में कथित झोलाछाप डॉक्टर के क्लीनिक से एक्सपायरी दवा दिए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि दवा खाने के बाद गांव के निवासी संत कुमार सिन्हा को अचानक चक्कर आने लगा और वह बेहोश हो गए। घटना की जानकारी मिलने पर आक्रोशित परिजन क्लीनिक पहुंच गए और जमकर विरोध किया। मामले ने ग्रामीण क्षेत्रों में बिना वैध चिकित्सा योग्यता के इलाज किए जाने और मरीजों को दी जाने वाली दवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दवा खाने के बाद बिगड़ी तबीयत
पीड़ित संत कुमार सिन्हा के अनुसार, उन्होंने दो दिन पहले सर्दी-जुकाम की दवा इसी क्लीनिक से ली थी। दवा खाने के बाद अचानक उन्हें चक्कर आने लगा और वह बेहोश हो गए। इसके बाद उनके बगल में रहने वाले भतीजे ने दवा की जांच की तो पता चला कि दवा जून 2026 में ही एक्सपायर हो चुकी थी। इसके बाद परिजनों में आक्रोश फैल गया और वे संबंधित क्लीनिक पहुंचकर विरोध करने लगे।
एक साल से कर रहे इलाज, डिग्री मांगने पर नहीं दिखा सके प्रमाणपत्र
ग्रामीणों के अनुसार, गांव में 'बंगाली दवाखाना' के नाम से क्लीनिक चलाया जा रहा है। यहां इलाज करने वाले विक्रम सिकदर से जब उनकी मेडिकल डिग्री और चिकित्सा योग्यता के बारे में पूछा गया तो वह कोई प्रमाणपत्र नहीं दिखा सके।
विक्रम सिकदर ने बताया कि वह पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं और पिछले एक साल से सर्दी, खांसी, जुकाम, मलेरिया तथा टाइफाइड जैसी बीमारियों का इलाज कर रहे हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वह मरीजों को दवाएं देने के साथ इंजेक्शन लगाने, रक्तचाप की जांच करने और मरीजों को ड्रिप चढ़ाने का काम करते हैं। पूछताछ के दौरान उन्होंने बताया कि दवा की दुकान पर रहकर उन्होंने इलाज करना सीखा है और उनकी पढ़ाई 12वीं कक्षा तक हुई है।
क्लीनिक में रखी दवाओं की वैधता पर सवाल
हंगामे के दौरान पीड़ित के परिजनों ने क्लीनिक में रखी कई दवाओं की ओर इशारा करते हुए दावा किया कि वहां बड़ी संख्या में एक्सपायरी दवाएं रखी हुई हैं। हालांकि, क्लीनिक में मौजूद सभी दवाओं की एक्सपायरी तिथि, उनकी संख्या और वास्तविक स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।एक्सपायरी दवाओं के संबंध में सवाल पूछे जाने पर विक्रम सिकदर ने दावा किया कि क्लीनिक में रखी एक्सपायरी दवाएं गांव के लोगों को नहीं दी जाती हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि संबंधित मरीज को गलती से एक्सपायरी दवा दे दी गई थी और इसके लिए माफी भी मांगी।
बोर्ड पर कई गंभीर बीमारियों के इलाज का दावा
क्लीनिक के बाहर लगे बोर्ड पर सर्दी-खांसी, टाइफाइड, मलेरिया, बवासीर, भगंदर, खुजली, एक्जिमा और दांतों से संबंधित बीमारियों के इलाज का दावा किया गया है। बोर्ड पर गुप्त रोगों के इलाज का भी उल्लेख है। इस तरह कई प्रकार की बीमारियों के उपचार का दावा किए जाने के बीच संबंधित व्यक्ति की चिकित्सा योग्यता की जांच का सवाल महत्वपूर्ण हो गया है। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।#कारूडीह #राजधनवार #गिरिडीह #एक्सपायरीदवा #स्वास्थ्यविभाग #झोलाछापडॉक्टर #जनस्वास्थ्य #झारखंडसमाचार #परिवर्तनबिहारन्यूज #विवेककीरिपोर्ट
Jamui, Jamui | Oct 18, 2026