पितरों की विदाई को हरि की पौड़ी पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
पितृ विसर्जनी अमावस्या पर हरि की पौड़ी और लहरा घाट पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, विधि-विधान से किया जलतर्पण व श्राद्ध कर्म
कासगंज/सोरों। पितृ विसर्जनी अमावस्या के पावन अवसर पर तीर्थनगरी सोरों शूकरक्षेत्र में शनिवार को पितरों की विदाई के लिए श्रद्धा और आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। हरि की पौड़ी और लहरा घाट सहित विभिन्न गंगा घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी रही। श्रद्धालुओं ने अपने पितरों की आत्मशांति एवं सद्गति की कामना के साथ जलतर्पण, श्राद्ध कर्म और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए। पितृ पक्ष की अंतिम अमावस्या पर तीर्थनगरी के घाटों पर दिनभर धार्मिक गतिविधियां चलती रहीं।
राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और दिल्ली सहित विभिन्न प्रदेशों के अलावा आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, हाथरस और एटा समेत आसपास के जनपदों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने पितरों का श्राद्ध करने के लिए सोरों पहुंचे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष की अमावस्या पर पितरों के निमित्त तर्पण, दान-पुण्य और श्राद्ध कर्म करने का विशेष महत्व है। इसी आस्था के चलते श्रद्धालुओं ने तीर्थपुरोहितों के निर्देशन में विधि-विधान से धार्मिक अनुष्ठान किए।
गंगा घाटों पर सुबह से शुरू हुआ तर्पण का सिलसिला
हरि की पौड़ी के बालाजी घाट, राजा वाले घाट, लाल घाट, वराह घाट, लक्ष्मण जी वाले घाट, सोमेश्वर घाट, भागीरथी गंगा मंदिर घाट, वराह घाट, रघुनाथजी मंदिर घाट और पांच छतरी वाले घाट सहित विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दी। श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद अपने पितरों का स्मरण करते हुए जलदान और तर्पण किया।
कई श्रद्धालुओं ने मुंडन संस्कार कराने के बाद अपने तीर्थपुरोहितों के माध्यम से पितरों की आत्मशांति के लिए पूजन-अनुष्ठान संपन्न कराए। इस दौरान कुश, तिल और जौ आदि का उपयोग करते हुए मंत्रोच्चारण के साथ पितरों को जल अर्पित किया गया। श्रद्धालुओं ने ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान-दक्षिणा भी भेंट की।
आचार्यों ने मंत्रोच्चार के साथ कराया सामूहिक जलतर्पण
तीर्थनगरी के विद्वान आचार्य पं. शशिधर द्विवेदी, पं. धर्मधर द्विवेदी, पं. प्रद्युम्न निर्भय, पं. राहुल वशिष्ठ और पं. हेमंत त्रिगुणायत, पंडित वीरेंद्र वल्लभ व्यास सहित अन्य तीर्थपुरोहितों ने श्रद्धालुओं को विधि-विधान से तर्पण कराया। आचार्यों के निर्देशन में श्रद्धालुओं ने अपने पितरों का स्मरण कर तिल और जल अर्पित किया तथा उनकी आत्मशांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृ विसर्जनी अमावस्या पर तर्पण और श्राद्ध कर्म के साथ पितृ पक्ष का समापन होता है। श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनके आशीर्वाद की कामना की।
भगवान वराह के दर्शन कर मांगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद
श्राद्ध और तर्पण कर्म संपन्न करने के बाद श्रद्धालु क्षेत्राधीश भगवान वराह के मंदिर पहुंचे और भगवान के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। इसके बाद हरि की पौड़ी की परिक्रमा की तथा परिक्रमा मार्ग में बैठे साधु-संतों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र एवं अन्य सामग्री का दान किया। तीर्थनगरी में दिनभर धार्मिक आस्था, दान-पुण्य और भक्ति का वातावरण बना रहा।
पितृ पक्ष की विदाई पर इमरती की बढ़ी मांग
पितृ पक्ष की अंतिम अमावस्या पर तीर्थनगरी के बाजारों में भी खास चहल-पहल रही। परंपरा के अनुसार पितृ पक्ष में उड़द की दाल से बनी इमरती का विशेष महत्व माना जाता है। इसी कारण मिठाई की दुकानों पर इमरती की मांग बढ़ गई और कई दुकानों पर इसकी कमी देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने अपने पुरोहितों को श्रद्धापूर्वक पूड़ी-पकवान का भोजन कराया तथा वस्त्र और दक्षिणा भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पितरों की विदाई के साथ ही तीर्थनगरी में पितृ पक्ष के धार्मिक अनुष्ठानों का समापन हुआ।