पितृ अमावस्या आज, तर्पण कर करेंगे स्मरण
दक्षिण दिशा की ओर मुख कर तर्पण करने की मान्यता, कुश, तिल, जौ और अक्षत का विशेष महत्व
कासगंज। पितृ पक्ष की सर्व पितृ अमावस्या पर शनिवार को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म किए जाएंगे। हिंदू मान्यताओं में यह तिथि उन भूले-बिसरे पूर्वजों के स्मरण का विशेष अवसर है, जिनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं होती।
पंडित शशिधर द्विवेदी के अनुसार, हिंदू परंपरा में देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण का विशेष महत्व है। पूजा-पाठ से देव ऋण, अध्ययन से ऋषि ऋण तथा श्राद्ध व पितृ पूजन से पितृ ऋण चुकाया जाता है। इस दिन पितरों के निमित्त जल अर्पित करने, जरूरतमंदों को भोजन कराने और पंचबलि निकालने की परंपरा है। पीपल की पूजा का भी विधान है।
श्राद्ध के शुभ मुहूर्त
- कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:45 से दोपहर 12:31 बजे तक।
- रोहिणी मुहूर्त: दोपहर 12:31 से 1:18 बजे तक।
- अपराह्न काल: दोपहर 1:18 से 3:37 बजे तक।
धार्मिक परंपरा के अनुसार, तर्पण से पहले कुश की अंगूठी धारण की जाती है। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल में काले तिल और कुश डालकर तर्पण किया जाता है। हथेली के अंगूठे और तर्जनी के मध्य भाग से जल अर्पित करने का नियम है। वहीं, देव तर्पण पूर्व दिशा और ऋषि तर्पण उत्तर दिशा की ओर मुख करके किया जाता है।
श्राद्ध कर्म में गाय, कुत्ते, कौए और चींटियों जैसे जीवों के लिए भोजन का अंश (पंचबलि) निकालने की परंपरा है। इस दिन कुश, तिल, जौ और अक्षत का भी विशेष महत्व होता है।
इस दिन सात्विक भोजन करने, जरूरतमंदों को दान देने और घर में शांति बनी रहती है।।