अकाल मृत्यु और अतृप्त आत्माओं की शांति से जुड़ी है नारायण बलि की धार्मिक मान्यता, पंडित वीरेंद्र वल्लभ व्यास ने बताया विधान का महत्व
सोरोंजी। सनातन धर्म में पितरों की शांति, दिवंगत आत्माओं की सद्गति और पूर्वजों के प्रति धार्मिक कर्तव्यों का विशेष महत्व माना गया है। इन्हीं धार्मिक परंपराओं में नारायण बलि विधान का भी उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह अनुष्ठान विशेष परिस्थितियों में दिवंगत आत्मा की शांति और सद्गति की कामना से किया जाता है। नारायण बलि विधान में भगवान विष्णु एवं भगवान नारायण की आराधना के साथ वैदिक मंत्रोच्चार और निर्धारित धार्मिक कर्मकांड संपन्न किए जाते हैं।
पंडित वीरेंद्र वल्लभ व्यास के अनुसार, नारायण बलि विधान को समझने के लिए इसके धार्मिक उद्देश्य, पूजा की प्रक्रिया और इससे जुड़ी मान्यताओं को जानना आवश्यक है।
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