भागलपुर, 18 अगस्त 2026। कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार तथा जिला प्रशासन, भागलपुर के संयुक्त तत्वावधान में अंग संस्कृति भवन, भागलपुर संग्रहालय परिसर में दो दिवसीय बिहुला विषहरी उत्सव का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन जिला पदाधिकारी, भागलपुर श्रीमती अलंकृता पांडेय ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर अपर समाहर्ता (राजस्व) श्री दिनेश राम, महिला कारा अधीक्षक श्रीमती शालिनी, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्री अंकित रंजन, शिक्षाविद् श्री राजीवकांत मिश्रा, 20 सूत्री उपाध्यक्ष श्री संतोष कुमार सहित अन्य वरीय पदाधिकारी, कलाकार, कला प्रेमी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ आम्रपाली कला प्रशिक्षण केंद्र, भागलपुर के कलाकारों द्वारा राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ एवं राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ की प्रस्तुति से हुआ। इसके उपरांत जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्री अंकित रंजन ने अपने स्वागत संबोधन में बिहुला विषहरी की लोकगाथा, अंग क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं तथा भागलपुर में मनसा पूजा के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बिहुला विषहरी की लोकगाथा अंग क्षेत्र की समृद्ध लोक-स्मृति, आस्था और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने उपस्थित अतिथियों, कलाकारों एवं कला प्रेमियों का स्वागत करते हुए उत्सव के उद्देश्यों की जानकारी दी।
इसके पश्चात बिहार बाल भवन किलकारी, भागलपुर के कलाकारों द्वारा 17 सितार वादकों सहित 20 वाद्य कलाकारों की सामूहिक वादन प्रस्तुति दी गई। समूह सितार वादन एवं अन्य वाद्य यंत्रों के समन्वय ने शास्त्रीय संगीत और लोकधुनों का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। कलाकारों की सामूहिक प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरे परिसर में संगीत की मनोहारी छटा बिखर गई।
कार्यक्रम की अगली कड़ी में आम्रपाली कला प्रशिक्षण केंद्र, भागलपुर के कलाकारों ने गुरु-शिष्य परंपरा को आगे बढ़ाते हुए बिहुला विषहरी की लोकगाथा पर आधारित लोकगीत की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। लोकगीत के माध्यम से बिहुला की आस्था, संघर्ष, समर्पण और लोकविश्वास से जुड़े प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। कलाकारों की प्रस्तुति को उपस्थित दर्शकों ने खूब सराहा।
बिहुला विषहरी उत्सव के अंतर्गत आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम में अंग क्षेत्र की लोकगाथा पर संगोष्ठी, मंजूषा हटिया एवं लोक चित्रकला प्रदर्शनी भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। मंजूषा कलाकारों द्वारा समूह प्रदर्शनी के माध्यम से पारंपरिक मंजूषा चित्रकला के साथ-साथ आधुनिक विषयों और नए प्रयोगों को भी प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी में पारंपरिक कला की मौलिकता के साथ कलाकारों की सृजनात्मक सोच और प्रयोगधर्मिता देखने को मिली।
मंजूषा हटिया एवं लोक चित्रकला प्रदर्शनी में विभिन्न कलाकारों ने अपनी कलाकृतियों को सीधे कला प्रेमियों एवं खरीददारों के समक्ष प्रस्तुत किया। कई कला प्रेमियों ने कलाकारों की कृतियों की खरीदारी भी की। इस पहल से कलाकारों को अपनी कला के प्रदर्शन के साथ-साथ सीधे बाजार से जुड़ने और अपनी कला का आर्थिक मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिला। प्रदर्शनी ने स्थानीय लोक एवं पारंपरिक कलाओं के संरक्षण, संवर्धन तथा कलाकारों को प्रोत्साहन देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उत्सव के दूसरे दिन बिहुला विषहरी की लोकगाथा पर आधारित नृत्य-नाटिका की विशेष प्रस्तुति के साथ-साथ विभिन्न लोक नृत्यों की प्रस्तुति भी की जाएगी। इसके माध्यम से अंग क्षेत्र की लोकपरंपरा, लोकविश्वास एवं सांस्कृतिक विरासत को मंच पर जीवंत किया जाएगा।
कार्यक्रम के प्रथम दिन के समापन अवसर पर बिहार राज्य गीत की सामूहिक प्रस्तुति की गई। इसके उपरांत जिला पदाधिकारी श्रीमती अलंकृता पांडेय द्वारा कार्यक्रम में भाग लेने वाले कलाकारों एवं प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। जिला पदाधिकारी ने कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन हमारी लोक परंपराओं एवं सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बिहुला विषहरी उत्सव के माध्यम से अंग क्षेत्र की समृद्ध लोक संस्कृति, लोकगाथा, मंजूषा चित्रकला, लोक संगीत एवं लोक नृत्य को एक साझा मंच प्रदान किया गया है। उत्सव के दूसरे दिन भी विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों एवं कार्यक्रमों के माध्यम से अंग की सांस्कृतिक विरासत की जीवंत झलक देखने को मिलेगी।
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