सम्भल में चुनावी प्रयोगशाला बनाना चाहती है भाजपा, जनता की समस्याओं पर मौन हैं नेता: डॉ. अमित कुमार उठवाल एडवोकेट वीडियो को शेयर करने की अपील
यूपी के जनपद सम्भल में प्रेस वार्ता में उठाए सम्भल की बदहाल चिकित्सा, शिक्षा, सफाई और पेयजल व्यवस्था के मुद्दे; नेताओं की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर भी साधा निशाना,सम्भल उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आरटीआई (सूचना का अधिकार) विभाग के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी डॉ. अमित कुमार उठवाल एडवोकेट ने आज प्रेस वार्ता के दौरान सम्भल की राजनीति, स्थानीय जनसमस्याओं और विकास कार्यों को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी सम्भल को चुनावी प्रयोगशाला के रूप में इस्तेमाल करना चाहती है। साम्प्रदायिक भावनाओं को भड़काकर चुनावी लाभ लेने की राजनीति की जा रही है, जबकि आम जनता की बुनियादी समस्याओं पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो रही है।डॉ. अमित कुमार उठवाल ने कहा कि सम्भल की जनता आज चिकित्सा, शिक्षा, साफ-सफाई, सड़क और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान है। इसके बावजूद राजनीतिक चर्चाओं में जनता के वास्तविक मुद्दों के बजाय परिवारवाद, व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और हिन्दू-मुस्लिम के नाम पर वोट मांगने की राजनीति हावी दिखाई देती है।उन्होंने कहा कि सम्भल में राजनीतिक नेतृत्व को जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए। जनता यह जानना चाहती है कि क्षेत्र में बेहतर अस्पताल, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वच्छ सड़कें, जल निकासी और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि इन बुनियादी सवालों पर गंभीर चर्चा होती दिखाई नहीं देती।
परिवारवाद और साम्प्रदायिक राजनीति पर उठाए सवाल,डॉ. अमित कुमार उठवाल ने कहा कि सम्भल की राजनीति में अलग-अलग नेताओं की अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं दिखाई दे रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसद अपने पिता को प्रत्याशी बनाना चाहते हैं, जबकि मौजूदा विधायक अपने बेटे को चुनावी मैदान में उतारना चाहते हैं। इसी तरह, मौजूदा चेयरमैन के पति की भी विधानसभा पहुंचने की महत्वाकांक्षा बताई जा रही है।उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सम्भल की राजनीति में जनता की समस्याओं को प्राथमिकता क्यों नहीं दी जा रही है? कोई पिता के नाम पर, कोई बेटे के नाम पर और कोई हिन्दू-मुस्लिम के नाम पर वोट हासिल करना चाहता है। लेकिन आम नागरिक की परेशानियों को दूर करने के लिए कौन जवाबदेही लेगा?उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव जनता की समस्याओं के समाधान, विकास कार्यों के मूल्यांकन और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही का माध्यम होना चाहिए। राजनीतिक दलों और नेताओं को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने सम्भल के विकास के लिए क्या किया है और भविष्य में उनकी योजनाएं क्या हैं।चिकित्सा, शिक्षा और सफाई व्यवस्था पर चिंता
प्रेस वार्ता में डॉ. उठवाल ने सम्भल की बदहाल व्यवस्थाओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में चिकित्सा और शिक्षा व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है। आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए, लेकिन इन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।उन्होंने नालों में गंदगी जमा होने, जल निकासी व्यवस्था प्रभावित होने और सड़कों के किनारे कूड़े के ढेर लगे रहने की समस्या पर भी चिंता जताई। उनका आरोप है कि कुछ स्थानों पर रात में सड़क निर्माण कराया जाता है, लेकिन सुबह तक सड़कें टूटने लगती हैं। यदि ऐसा हो रहा है तो निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और उनकी निगरानी की जांच होनी चाहिए, ताकि सरकारी धन का सदुपयोग सुनिश्चित किया जा सके।डॉ. उठवाल ने कहा कि पेयजल की समुचित व्यवस्था भी जनता की बुनियादी आवश्यकता है। लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना स्थानीय प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।जनता के मुद्दों पर होनी चाहिए राजनीति
डॉ. अमित कुमार उठवाल एडवोकेट ने कहा कि सम्भल का विकास किसी जाति, धर्म या परिवार विशेष तक सीमित नहीं होना चाहिए। विकास का लाभ हर नागरिक तक पहुंचना चाहिए। राजनीतिक दलों को साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, स्वच्छता, सड़क और पेयजल जैसे मुद्दों पर जनता के सामने अपना पक्ष रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सम्भल की जनता को यह अधिकार है कि वह अपने जनप्रतिनिधियों से विकास कार्यों का हिसाब मांगे। चुनाव के समय केवल वादे और भावनात्मक मुद्दे उठाने के बजाय नेताओं को अपने कामकाज का विवरण सार्वजनिक करना चाहिए।उन्होंने जोर देकर कहा कि सम्भल की वास्तविक पहचान आपसी भाईचारे, सामाजिक सद्भाव और विकास से होनी चाहिए। जनता की समस्याओं का समाधान ही राजनीति का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए, न कि चुनावी लाभ के लिए लोगों की भावनाओं का इस्तेमाल करना।
बाइट डॉ,अमित कुमार उठवाल एडवोकेट सम्भल