*एनआरआई बनकर शादी का झांसा, विदेशी गिफ्ट और कस्टम ड्यूटी के नाम पर साढ़े 7 लाख की ठगी*
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(कैलाश विश्वकर्मा)
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*शामगढ़ पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का किया पर्दाफाश, मुख्य सरगना सहित छह आरोपी गिरफ्तार*
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मेट्रिमोनियल वेबसाइट पर शादी का रिश्ता तलाश रही शामगढ़ क्षेत्र की एक महिला को साइबर ठगों ने एनआरआई बनकर अपने जाल में फंसाया। नकली फोटो, कथित परिजनों से व्हाट्सऐप पर बातचीत और शादी का भरोसा दिलाने के बाद ठगों ने विदेश से महंगा गिफ्ट भेजने की कहानी रची। इसके बाद कस्टम ड्यूटी, प्रोसेसिंग फीस और पार्सल छुड़ाने के नाम पर महिला से अलग-अलग बैंक खातों में करीब साढ़े 7 लाख रुपये जमा करवा लिए। शिकायत के बाद मंदसौर पुलिस ने मामले की तह तक पहुंचते हुए अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है।
पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में गिरोह द्वारा देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठकर 100 से अधिक साइबर घटनाओं को अंजाम देने तथा 11 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी किए जाने की जानकारी सामने आई है। गिरोह के तार अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जुड़े होने की बात भी जांच में सामने आई है। ठगी के लिए 150 से अधिक म्यूल बैंक खातों और मोबाइल सिम का इस्तेमाल किया गया।
*शादी के भरोसे से ठगी तक*
आलमगढ़ निवासी पीड़िता ने मेट्रिमोनियल वेबसाइट पर अपना प्रोफाइल अपडेट किया था। इसी दौरान आरोपी ने उससे संपर्क किया और खुद को एनआरआई बताया। बातचीत के दौरान आरोपी ने नकली फोटो भेजे तथा कथित परिजनों से व्हाट्सऐप पर बातचीत करवाकर शादी का भरोसा कायम किया।
जब पीड़िता पूरी तरह विश्वास में आ गई तो उसे बताया गया कि विदेश से उसके लिए महंगा गिफ्ट भेजा गया है। इसके बाद गिफ्ट कस्टम विभाग में पकड़े जाने की बात कहकर कभी कस्टम ड्यूटी, कभी प्रोसेसिंग फीस और कभी पार्सल छुड़ाने के नाम पर रकम मांगी गई। आरोपी कस्टम अधिकारी बनकर फोन भी करते थे। लगातार दबाव और डर के बीच पीड़िता ने अलग-अलग बैंक खातों में करीब साढ़े 7 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
*शिकायत से खुली गिरोह की परतें*
ठगी का एहसास होने के बाद पीड़िता ने मंदसौर पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार मीना के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की। मामले में थाना शामगढ़ पर अपराध क्रमांक 282/26, धारा 318(4) बीएनएस के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई।
एसपी के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गरोठ रामस्नेही मिश्र और *एसडीओपी सीतामऊ दिनेश प्रजापति के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी शामगढ़ उपनिरीक्षक कपिल सौराष्ट्रीय* के नेतृत्व में साइबर सेल और थाना पुलिस की संयुक्त विशेष टीम गठित की गई।
*डेढ़ माह तक तकनीकी जांच, 15 दिन राज्यों में तलाश*
विशेष टीम ने करीब डेढ़ से दो माह तक मामले से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों का बारीकी से विश्लेषण किया। मोबाइल नंबर, बैंक खातों और अन्य तकनीकी तथ्यों की कड़ियां जोड़ते हुए आरोपियों की पहचान की गई। इसके बाद पुलिस टीम ने करीब 15 दिन तक अलग-अलग राज्यों में रहकर आरोपियों की तलाश की।
तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर राजस्थान के जयपुर में दबिश देकर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस बिहार के अरवल जिले तक पहुंची और गिरोह के एक अन्य सदस्य को भी अभिरक्षा में लिया। पुलिस ने मुख्य सरगना सहित कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
*अलग-अलग टीम, अलग-अलग जिम्मेदारी*
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह में हर सदस्य को अलग जिम्मेदारी दी गई थी। एक टीम म्यूल बैंक खाते और मोबाइल सिम उपलब्ध कराती थी। बड़ी संख्या में मोबाइल सिम आगरा, फिरोजाबाद, दिल्ली और बिहार से प्राप्त किए गए थे। कुछ सिम और बैंक खाते भोपाल से भी लिए गए थे।
दूसरी टीम अलग-अलग राज्यों में ठिकाने बनाकर रहती थी। समय-समय पर ठिकाने बदल दिए जाते थे। इस टीम का काम ठगी की रकम निकालना और उसे सीडीएम खातों में जमा करना था। गिरोह का मुख्य व्यक्ति अलग-अलग खातों में जमा रकम की जानकारी रखता था और सदस्यों को रकम निकालने तथा दूसरे खातों में जमा करने के निर्देश देता था।
*खाता फ्रीज होते ही मोबाइल और सिम नष्ट*
गिरोह के सदस्य साइबर ठगी में इस्तेमाल किए जाने वाले मोबाइल, सिम और बैंक खातों का निजी कार्य में इस्तेमाल नहीं करते थे। जैसे ही कोई बैंक खाता फ्रीज होता, मोबाइल फोन, सिम, पासबुक और एटीएम कार्ड नष्ट कर दिए जाते थे। इसके बाद अगले अपराध के लिए नए मोबाइल, सिम और बैंक खाते हासिल किए जाते थे।
पुलिस के अनुसार प्रत्येक मोबाइल फोन के पीछे एक स्लिप रखी जाती थी, जिसमें संबंधित व्यक्ति का नाम और बैंक खाता नंबर लिखा होता था। एक मोबाइल और सिम का इस्तेमाल एक ही मामले में किया जाता था तथा दूसरे मामले के लिए नया सेटअप तैयार किया जाता था।
*22 मोबाइल, 30 सिम और 5 एटीएम जब्त*
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 22 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, अलग-अलग व्यक्तियों के नाम पर पंजीकृत 30 मोबाइल सिम और 5 एटीएम कार्ड जब्त किए हैं। इसके अलावा विभिन्न बैंक खातों में जमा 8 लाख रुपये से अधिक की राशि को फ्रीज कराया गया है। पुलिस के अनुसार न्यायालयीन प्रक्रिया के बाद वैधानिक प्रावधानों के तहत राशि पीड़ित को वापस दिलाने की कार्रवाई की जाएगी।
*छह आरोपी गिरफ्तार*
गिरफ्तार आरोपियों में त्रिलोकी कुमार उम्र 26 वर्ष, शिवम गुप्ता उम्र 25 वर्ष, बबलू कुशवाह उम्र 25 वर्ष, गुंजन गुप्ता उम्र 29 वर्ष और शशि कुमार उम्र 24 वर्ष, सभी निवासी भेलाही, जिला पूर्वी चंपारण, बिहार तथा टोनी कुमार उम्र 34 वर्ष निवासी छपिया, गोपालगंज, बिहार शामिल हैं।
*विशेष टीम की कार्रवाई*
कार्रवाई में उपनिरीक्षक कपिल सौराष्ट्रीय, उपनिरीक्षक शैलेंद्र सिंह कनेश, उपनिरीक्षक ओपी राठौर, साइबर सेल प्रभारी उपनिरीक्षक सत्येंद्र सैनी, प्रधान आरक्षक आशीष बैरागी, प्रधान आरक्षक मुजफ्फर, आरक्षक मनीष बघेल, आरक्षक हरिओम मालवीय, प्रधान आरक्षक अर्जुन सिंह राठौर, आरक्षक हीरालाल यादव, आरक्षक इरफान खान, आरक्षक धर्मेश बैरागी, आरक्षक विशाल सिंह, आरक्षक प्रेम सिंह रावत एवं महिला आरक्षक रेखा भाटी की भूमिका रही।
*पुलिस की अपील*
मंदसौर पुलिस ने आमजन से अपील की है कि मेट्रिमोनियल साइट या सोशल मीडिया पर अनजान व्यक्ति से संपर्क होने पर सावधानी बरतें। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें। ऑनलाइन ट्रेडिंग या लुभावने ऑफर के नाम पर भेजे गए झांसे में न आएं और पिन, ओटीपी, पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत करें या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।