उत्तरकाशी में भगवान काशी विश्वनाथ कैसे आए, इसके बारे में पौराणिक मान्यताएँ बहुत रोचक हैं।
कथा के अनुसार, उत्तरकाशी को प्राचीन समय से ही “उत्तर की काशी” माना जाता है। मान्यता है कि भगवान शिव ने कलियुग के एक विशेष काल में इस स्थान को अपना निवास माना। इसी कारण यहां भगवान शिव विश्वनाथ स्वरूप में विराजमान हुए। स्थानीय और धार्मिक परंपरा में यह भी माना जाता है कि जब भविष्य में काशी (वाराणसी) जलमग्न होगी, तब भगवान काशी विश्वनाथ का प्रमुख निवास उत्तरकाशी होगा। एक अन्य प्रचलित मान्यता के अनुसार, ऋषि मार्कण्डेय भगवान शिव के परम भक्त थे। जब यमराज उनका प्राण लेने आए, तो उन्होंने शिवलिंग को पकड़कर भगवान शिव की शरण ली। कहा जाता है कि भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए और अपने भक्त की रक्षा की। इस स्थान को भी उत्तरकाशी के विश्वनाथ मंदिर की पौराणिक महत्ता से जोड़ा जाता है।
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