पंचनद में नदियों की प्रतिमाओं का लोकार्पण, 'एक पेड़ मां के नाम' का संकल्प... पर जमीनी हकीकत में हरियाली पर चल रही कुल्हाड़ी!
सोशल मीडिया पर पौधे, धरातल पर उजड़ते पेड़पुराने पेड़ काटकर नए पौधों का हिसाब... क्या यही हरित विकास है?
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उरई (जालौन)। पंचनद धाम में पांच पवित्र नदियों—यमुना, चंबल, सिंध, क्वारी और पहुज—की भव्य प्रतिमाओं के लोकार्पण के साथ प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने जल संरक्षण और पर्यावरण बचाने का महा-संकल्प दिलाया। इसके बाद वृहद पौधरोपण महाअभियान-2026 के तहत "एक पेड़ मां के नाम" अभियान का शुभारंभ करते हुए उन्होंने पौधरोपण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। मंच से जल, जंगल और जमीन बचाने की बातें हुईं,
करोड़ों पौधे लगाने के दावे किए गए और हर नागरिक से पौधा लगाकर उसकी देखभाल करने की अपील की गई।
सरकारी कार्यक्रमों में पौधा लगाकर फोटो खिंचवाने और सोशल मीडिया पर अपलोड करने की होड़ जरूर दिखाई देती है, लेकिन धरातल पर वर्षों पुराने पेड़ों को बचाने की संवेदनशीलता नजर नहीं आती। "एक पेड़ मां के नाम" अभियान का उद्देश्य भले ही पर्यावरण संरक्षण हो, लेकिन इसकी तस्वीरें अक्सर कैमरे तक सीमित रह जाती हैं।
विगत दिनों जिला परिषद रोड के चौड़ीकरण और राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुगम यातायात के नाम पर दर्जनों हरे-भरे वृक्ष काट दिए गए। यह कार्रवाई तत्कालीन पुलिस अधीक्षक और वर्तमान जिलाधिकारी के निर्देशों के बाद हुई। जो पेड़ प्रशासनिक योजनाओं से बच गए थे, उनकी बची-खुची कसर हाल के तेज तूफान ने पूरी कर दी। आज उन्हीं मार्गों पर हरियाली की जगह ठूंठ और खाली स्थान दिखाई देते हैं।
मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि एक विकसित वृक्ष सैकड़ों लोगों के लिए ऑक्सीजन का स्रोत होता है, तापमान नियंत्रित करता है और जल संरक्षण में अहम भूमिका निभाता है। सवाल यह है कि जब सरकार स्वयं वृक्षों के महत्व को स्वीकार करती है, तो फिर विकास योजनाओं में परिपक्व वृक्षों को बचाने की गंभीर कोशिश क्यों नहीं दिखाई देती?
विशेषज्ञ मानते हैं कि दशकों पुराने एक वृक्ष की भरपाई वर्षों तक लगाए गए अनेक पौधे भी नहीं कर पाते। ऐसे में रिकॉर्ड बनाने के लिए पौधे लगाना और दूसरी ओर विकसित वृक्षों को काट देना पर्यावरण संरक्षण की मूल भावना के विपरीत माना जाएगा। हरित अभियान केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि वृक्षों को जीवित रखने की जिम्मेदारी भी है।यदि "एक पेड़ मां के नाम" वास्तव में जनआंदोलन है तो सबसे पहले उन पेड़ों को बचाने की जवाबदेही तय होनी चाहिए जो वर्षों से लोगों को छाया, शुद्ध हवा और जीवन दे रहे हैं। केवल पौधरोपण कर फोटो खिंचवाना और बाद में उसकी सुध न लेना पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि औपचारिकता भर है।
नसीहत: दिखावे से नहीं, संरक्षण से बचेगा पर्यावरण
जल संरक्षण, नदी संरक्षण और वृक्षारोपण तभी सार्थक होंगे जब सरकारी योजनाओं में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता मिले। विकास आवश्यक है, लेकिन विकास की कीमत हरियाली नहीं हो सकती। समय आ गया है कि जिम्मेदार विभाग और अधिकारी दिखावटी हरित अभियानों से आगे बढ़ें, पुराने वृक्षों की रक्षा करें और ऐसी कार्यप्रणाली अपनाएं जिससे विकास और पर्यावरण दोनों साथ चल सकें। अन्यथा मंचों पर लिए जाने वाले संकल्प और धरातल पर कटते पेड़ जनता के बीच केवल विरोधाभास और अविश्वास की कहानी बनकर रह जाएंगे।इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम अनुरागी, माधौगढ़ विधायक मूलचंद निरंजन, कालपी विधायक विनोद चतुर्वेदी, जल शक्ति मंत्री के प्रतिनिधि अरविंद चौहान, जिलाधकारी राजेश कुमार पाण्डेय, पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह, परमार्थ संस्था से संजय कुमार, वरुण आदि सहित सम्बंधित अधिकारी व जनप्रतिधि व बड़ी सख्यां में जल सहेली आदि मौजूद रहे।
Orai, Jalaun | Jul 13, 2026