कर्मयोगी शिक्षक क्षमता निर्माण योजना में शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता
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शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण, प्रभावी एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाने पर जोर
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शिक्षकों से वास्तविक अनुभव एवं सुझाव साझा करने का किया आह्वान
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खरगोन 25 अगस्त 2026। उच्च शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश के निर्देशानुसार शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खरगोन में 25 अगस्त 2026 को ‘कर्मयोगी शिक्षक’ क्षमता निर्माण फ्रेमवर्क के संबंध में आयोजित राज्यस्तरीय ऑनलाइन बैठक में महाविद्यालय के शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता की। बैठक दोपहर 03 बजे से शाम 05 बजे तक आयोजित हुई। इसमें प्रदेश के उच्च शिक्षा जगत से जुड़े शिक्षकों एवं अधिकारियों ने सहभागिता कर प्रस्तावित फ्रेमवर्क को अधिक प्रभावी एवं उपयोगी बनाने के लिए अपने विचार एवं सुझाव साझा किए।
उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में शिक्षकों से ‘कर्मयोगी शिक्षक’ क्षमता निर्माण फ्रेमवर्क से संबंधित प्रश्नावली को औपचारिकता न मानते हुए गंभीरता एवं मनोयोग से भरने का आह्वान किया गया। उन्होंने प्रत्येक प्रश्न पर शिक्षकों से अपने वास्तविक अनुभव एवं स्वतंत्र मत दर्ज करने की अपील की। इस दौरान जंगल की आग बुझाने के लिए अपनी छोटी-सी चोंच में पानी लेकर प्रयास करने वाली चिड़िया का उदाहरण देते हुए कहा गया कि प्रत्येक व्यक्ति का छोटा-सा प्रयास भी बड़े परिवर्तन का आधार बन सकता है। शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में प्रत्येक शिक्षक की सक्रिय सहभागिता को महत्वपूर्ण बताया गया।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. जी.एस. चौहान के मार्गदर्शन में ऑनलाइन बैठक के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं। प्रोजेक्टर, ऑडियो-विजुअल सिस्टम, इंटरनेट एवं विद्युत सहित आवश्यक तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराए गए। महाविद्यालय की iGOT Karmayogi नोडल अधिकारी डॉ. प्रणिता गुप्ता ने समन्वय करते हुए शिक्षकों की सहभागिता सुनिश्चित की। शिक्षकों ने मोबाइल के माध्यम से निर्धारित ऑनलाइन प्रश्नावली में सहभागिता करते हुए अपने शिक्षण अनुभव, व्यावहारिक आवश्यकताओं एवं सुझाव दर्ज किए।
उल्लेखनीय है कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के शिक्षाविदों की सहभागिता से गठित ‘सर्वोच्च परामर्शदायी समिति’ की अनुशंसाओं के आधार पर मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा के लिए ‘कर्मयोगी शिक्षक’ क्षमता निर्माण फ्रेमवर्क तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य शिक्षकों की कार्यक्षमता, व्यावसायिक दक्षता, नवाचार क्षमता एवं निरंतर सीखने की प्रवृत्ति को सशक्त करना तथा विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है।
इस पहल की विशेषता यह है कि फ्रेमवर्क तैयार करने की प्रक्रिया में प्रदेश के शिक्षकों के वास्तविक अनुभव, विचार एवं सुझावों को भी शामिल किया जा रहा है। महाविद्यालय के शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता ने यह संदेश दिया कि उच्च शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण एवं सकारात्मक परिवर्तन प्रत्येक शिक्षक के समर्पित एवं सार्थक योगदान से ही संभव है। ‘कर्मयोगी शिक्षक’ पहल शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी, उत्तरदायी एवं परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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