🥺 कभी मंच पर गूंजती थी आवाज, आज चौराहे पर सुर्ती बेचकर चल रही जिंदगी!
📍 नौतनवां, महराजगंज
करमहवा गांव निवासी मास्टर दयाराम भारती कभी रामलीला और ड्रामा पार्टियों की जान हुआ करते थे। उनके निर्देशन और अभिनय से मंच जीवंत हो उठता था और दर्शकों की तालियों से माहौल गूंजता था। दयाराम भारती अपने ही जिले में नहीं बल्कि आसपास के अन्य जिलों में भी अपने हुनर का जलवा बिखेर चुके हैं और बदलते दौर में उनका हुनर दब कर रह गया |
मोबाइल और इंटरनेट के दौर में जब पारंपरिक रामलीला और ड्रामा का चलन धीरे-धीरे कम हुआ, तो कई पुराने कलाकारों की रोजी-रोटी भी छिन गई।
आज वही मास्टर दयाराम करमहवा चौराहे पर सुर्ती बेचकर अपना जीवन यापन करने को मजबूर हैं।
यह सिर्फ एक कलाकार की कहानी नहीं, बल्कि धीरे-धीरे मिटती हमारी लोक कला और सांस्कृतिक विरासत की तस्वीर है।
💔 कभी जिनके अभिनय पर तालियां बजती थीं, आज वही जिंदगी चलाने के लिए सुर्ती बेच रहे हैं।
क्या ऐसे कलाकारों की कला और हुनर को बचाने की जरूरत नहीं है?
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Maharajganj, Maharajganj | Aug 9, 2026