*रिश्तों की डोर से जुड़ा अपनापन—अपनाघर आश्रम में अनूठे अंदाज में मनाया रक्षाबंधन*
विजयनगर (ब्यावर)/भीलवाड़ा :राजकुमार गोयल, 28 अगस्त 2026
रक्षाबंधन केवल कलाई पर राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि रिश्तों में प्रेम, विश्वास और अपनत्व की डोर मजबूत करने का अवसर है। इसी भावना को साकार करते हुए मानव सेवा अपनाघर आश्रम, विजयनगर (ब्यावर) में रक्षाबंधन पर्व बेहद आत्मीय और भावुक माहौल में मनाया गया।
कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारीज़ राजयोग मेडिटेशन सेंटर, विजयनगर की संचालिका पुष्पा जी आश्रम पहुंचीं और यहां निवासरत प्रभुजनों को अपना परिवार मानते हुए उनकी कलाई पर राखी बांधी। तिलक लगाकर मिठाई खिलाई गई और प्रभुजनों के साथ रक्षाबंधन की खुशियां साझा की गईं।
“आपको अपना परिवार मानकर यहां आए हैं…”
इस अवसर पर पुष्पा जी ने कहा कि रक्षाबंधन का यह महापर्व हम सभी मनाते हैं, लेकिन आज हम यहां इसलिए आए हैं क्योंकि इन प्रभुजनों को हम अपने घर-परिवार का हिस्सा मानते हैं। इनके साथ राखी का पर्व मनाना हमारे लिए खुशी और सौभाग्य की बात है।
उन्होंने कहा कि जरूरतमंद, पीड़ित, असहाय, बेघर पुरुषों एवं वृद्धजनों के साथ त्योहार मनाने से सेवा का भाव और मजबूत होता है। उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि वे आगे आएं और इन प्रभुजनों की जरूरतों में सहयोग करने के साथ-साथ उनकी खुशियों में भी सहभागी बनें।
*राखी के साथ बांधा सेवा और अपनत्व का रिश्ता*
आश्रम में राखी बांधने का दृश्य भावुक कर देने वाला रहा। कलाई पर बंधी राखी के साथ प्रेम और अपनत्व का ऐसा रिश्ता जुड़ा, जिसने त्योहार को एक नई सार्थकता दी। पूरे कार्यक्रम के दौरान आश्रम में खुशी, मुस्कान और आत्मीयता का माहौल रहा।
कार्यक्रम के अंत में मानव सेवा अपनाघर आश्रम, विजयनगर के सचिव विजय गुप्ता ने पुष्पा जी एवं ब्रह्माकुमारीज़ राजयोग मेडिटेशन सेंटर का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे अवसर प्रभुजनों के जीवन में खुशियां लाने के साथ समाज को भी मानव सेवा के लिए प्रेरित करते हैं।
गुप्ता ने सभी से आह्वान किया कि वे इन प्रभुजनों को समाज का अभिन्न हिस्सा मानें और उनके साथ खुशियों तथा सेवा के कार्यों में सहभागी बनें।
*यह रक्षाबंधन एक ऐसा संदेश दे गया—जहां खून के रिश्ते नहीं होते, वहां भी इंसानियत प्रेम और अपनत्व से रिश्ते बना सकती है।*