भाई की कलाई से आगे बढ़ी राखी: शाहपुरा की नन्ही बेटी श्रेया ने पीपल, नीम और बरगद को बांधा रक्षा सूत्र
शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक।
शाहपुरा, भीलवाड़ा।
रक्षाबंधन प्रेम, विश्वास और रक्षा के संकल्प का पर्व है। इस अवसर पर जहां बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं, वहीं राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा की “ग्रीन लिटिल बेबी” के नाम से प्रसिद्ध श्रेया कुमावत ने रक्षाबंधन के इस पर्व को प्रकृति संरक्षण से जोड़ते हुए एक अनूठा और प्रेरणादायक संदेश दिया।
रक्षाबंधन के अवसर पर श्रेया कुमावत ने बच्चों के साथ मिलकर पीपल, नीम और बरगद जैसे वृक्षों को रक्षा सूत्र बांधा। इस दौरान दीप प्रज्वलित कर आरती उतारी गई और वृक्षों की रक्षा एवं संरक्षण का संकल्प लिया गया। बच्चों ने भी पौधारोपण कर पौधों की देखभाल और उन्हें सुरक्षित रखने का प्रण लिया।
श्रेया ने कहा कि रक्षा का सूत्र केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं होना चाहिए। पेड़-पौधे, प्रकृति, पशु-पक्षी और पर्यावरण भी हमारे जीवन के रक्षक हैं। जब प्रकृति हमें जीवन देती है, तो उसकी रक्षा करना भी हमारा कर्तव्य है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि रक्षाबंधन जैसे पर्वों को सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी से भी जोड़ना चाहिए। लोग अपने घर, गांव और आसपास के पेड़-पौधों की रक्षा करने का संकल्प लें और नए पौधे लगाने के साथ उनकी नियमित देखभाल भी करें।
“पेड़ बचेंगे, तभी जीवन बचेगा”
बच्चों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए श्रेया ने कहा कि पेड़ केवल धरती की सुंदरता नहीं, बल्कि हमारे जीवन का आधार हैं। पेड़ हमें स्वच्छ हवा, छाया और प्राकृतिक संतुलन प्रदान करते हैं। इसलिए पौधे लगाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी उन्हें बचाना और बड़ा करना भी है।
श्रेया कुमावत के लिए पर्यावरण संरक्षण केवल किसी विशेष दिन या कार्यक्रम तक सीमित नहीं, बल्कि उनके जीवन का मिशन बन चुका है। पढ़ाई के साथ-साथ वह पौधारोपण, पौधों की देखभाल और बच्चों व समाज को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का कार्य कर रही हैं। स्कूल के बाद भी वह अपना समय पेड़-पौधों के बीच बिताती हैं और उन्हें अपने मित्रों की तरह मानती हैं।
कम उम्र में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में लगातार कार्य करते हुए श्रेया आज “ग्रीन लिटिल बेबी” के नाम से अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। उनके पर्यावरणीय कार्यों की सार्वजनिक मंचों पर सराहना हो चुकी है और राजस्थान के मुख्यमंत्री द्वारा भी उनके प्रयासों की खुले मंच से प्रशंसा की जा चुकी है। उनके जीवन और पर्यावरणीय कार्यों पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी बनाई जा चुकी है।
श्रेय का पर्यावरण संदेश राजस्थान तक सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश की एक सामाजिक संस्था की ब्रांड एंबेसडर के रूप में वह राजस्थान के बाहर भी बच्चों को प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित कर रही हैं।
रक्षाबंधन पर शाहपुरा से सामने आई यह पहल केवल पेड़ों को राखी बांधने की एक तस्वीर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है।
“राखी का धागा केवल रिश्तों की रक्षा का नहीं, प्रकृति की रक्षा का भी संकल्प बने।”
श्रेया कुमावत और बच्चों ने इस पहल के माध्यम से संदेश दिया—
“एक राखी अपनों के नाम, एक रक्षा संकल्प प्रकृति के नाम—क्योंकि पेड़ बचेंगे, तभी जीवन और भविष्य बचेगा।”