दर्दनाक सडक हादसे में घायल आंगनवाडी वर्कर नीलम नवादा की ईलाज के दौरान पांचवे दिन अस्पताल में मौत। आसपास के गांवों में मातम का माहौल है। मृतक नीलम नवादा को उनकी दोनों बेटियों ने कंधा दिया और मुखाग्नि दी है। बता दे कि दोनो आंगनवाडी वर्करों को हरिद्वार हाईवे पर जलालपुर मोड के पास 22 सितंबर को मारी थी तेज रफ्तार कार ने टक्कर।
: सनोौली थाना क्षेत्र में नेशनल हाईवे 709 एडी पर सनौली खुर्द के पास जलालपुर मोड पर 22 सितंबर को दो आंगनवाडी वर्करों की स्कूटी को कार ने टक्कर मार दी थी, जिससे दोनो आंगनवाडी वर्कर नीलम निवासी झांबा व नीलम निवासी नवादा आर गंभीर रूप से घायल हो गई। दोनो आंगनवाडी वर्करों को उनके परिजनों ने पानीपत शहर के अलग-अलग निजी अस्पतालों में भर्ती करवाया गया था। वहीं निजी अस्पताल में उपचाराधीन नीलम शर्मा पत्नी स्वर्गीय रामकरण शर्मा एडवोकेट निवासी गांव नवादा आर की शनिवार अल सुबह ईलाज के दौरान मौत हो गई। सनौली थाना पुलिस ने शनिवार को मृतक नीलम के शव का पोस्टमार्टम करवा कर परिजनों को सौंप दिया गया। गांव नवादा आर में गमगीन माहौल में मृतक नीलम के शव का संस्कार करदिया गया। वहीं हादसे में घायल दूसरी आंगनवाडी वर्कर नीलम पत्नी अजमेर निवासी गांव झांबा का अभी निजी अस्पताल में ईलाज चल रहा है। परिजनों के अनुसार हादसे में उसके पैर में भी गहरी चोट लगी थी और उसका अभी ऑपरेशन होना है। नीलम झांबा का पति अजमेर अब बापौली तहसील में कंप्यूटर ऑपरेटर है। गौरतलब है कि दोनो आंगनवाडी वर्कर स्कूटी पर सवार होकर बापौली से सनौली खुर्द की तरफ आ रही थी। हरिद्वार हाईवे पर जलालपुर मोड के पास एक तेज रफ्तार कार ने उनकी स्कूटी को टक्कर मार दी, जिससे दोनो गंभीर रूप से घायल हो गई थी। वहीं सनौली खुर्द थाना प्रभारी एसआई विनोद कुमार ने बताया कि मृतक नीलम नवादा आर के शव का पोस्टमार्टम करवा कर परिजनों को सौंप दिया गया है और पुलिस ने मामला दर्ज करके जांच शुरू कर दी गई है।
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दोनो लडकियों ने दिया अपनी मां की अर्थी को कंधा, श्मशान मे दोनो ही लडकियों ने दी मुखाग्नि,,
आंगनवाडी वर्कर मृतक नीलम शर्मा नवादा आर के पति रामकरण एडवोकेट की करीब 18 साल पहले मौत हो चुकी है और नीलम के पास दो लडकियां है। जिनमें बडी लडकी 23 वर्षीय वंशिका जीएनएम करके स्टाफ नर्स है और छोटी 19 वर्षीय विधि 12वीं कक्षा पास करने के बाद एलएलबी कर रही है और उसका अब द्वितीय वर्ष है। दोनों ही लडकियों ने अपनी मां की अर्थी को कंधा दिया और अंतिम संस्कार के दौरान दोनो ही लडकियों ने मुखाग्नि दी। पति रामकरण की मौत के बाद नीलम पर ही दोनो लडकियों की जिम्मेवारी थी। ओर बेटियों को बेटों की तरह पाला, उच्च शिक्षा दी। आसपास के गांव में मातम का माहौल बना हुआ है।