सवर्णों ने हजारों साल तक शोषण किया,ऐसे बड़े दावों को बार-बार दोहराने से वे इतिहास का प्रमाण नहीं बन जाते,इतिहास भावनाओं से नहीं,प्रमाणों से तय होता है, - सर्वेश पाण्डेय सवर्ण आर्मी प्रमुख.
अगर आज किसी समुदाय की सामाजिक स्थिति,शिक्षा,आर्थिक स्थिति और जनसंख्या को देखकर पूरे 5000 साल के इतिहास का फैसला नहीं किया जा सकता......!
तो उसी तरह पूरे सवर्ण समाज को हजारों साल के कथित शोषण का सामूहिक दोषी ठहराना भी तर्कसंगत नहीं है,सवर्ण समाज में भी गरीब,वंचित और संघर्ष करने वाले परिवार रहे हैं.....!
हर व्यक्ति को उसकी जाति के आधार पर अपराधी या शोषक मान लेना न्याय नहीं,बल्कि एक नया पूर्वाग्रह है,आरक्षण हो, सामाजिक न्याय हो या जातिगत भेदभाव—हर मुद्दे पर बहस होनी चाहिए....!
लेकिन तथ्यों,वर्तमान परिस्थितियों और समान नागरिक अधिकारों के आधार पर,सवाल किसी जाति को नीचा दिखाने का नहीं सवाल यह है.......!
कि क्या आज के व्यक्ति को उसके पूर्वजों के नाम पर दोषी ठहराना न्याय है? समानता चाहिए तो न्याय भी समान होना चाहिए, इतिहास का हिसाब इतिहास से हो,हर व्यक्ति से नहीं......!
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