*सड़क सुरक्षा सर्वोपरि फिर 10 साल से मिट्टी का राजमार्ग क्यों?*
*टोल वसूली के बावजूद सड़क व नाला निर्माण कार्य अधूरा, विद्युत लाइन पर गुजर रहा राजमार्ग
भीलवाड़ा/आकोला :रमेश चन्द डाड बिगोद कस्बे से होकर गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 758 पर एनएचएआई के अधिकारियों की घोर लापरवाही एवं मनमानी नमूना स्पष्ट नजर आ रहा है। 10 वर्षों से इस राजमार्ग पर निर्माण कार्य अधूरा छोड़ रखा है, बिगोद बस स्टैंड से करीब 200-300 मीटर तक राजमार्ग की जगह केवल मिट्टी डालकर छोड़ रखा है, 10 वर्षों से सारे वाहन इसी से होकर गुजर रहे हैं। दोनों साइड पानी निकासी के लिए प्रस्तावित सीमेंटेड नाले आधे अधूरे ऐसे ही पड़े हैं, जनता को हो रही परेशानी की किसी को फिक्र नहीं है। करीब एक दशक पूर्व बिना वैधानिक प्रक्रिया के जितनी जगह मिली उसमें मनमाने तरीके से नियमों को ताक में रखकर राजमार्ग निकाल दिया गया। रोड के दोनों साइड में 60-70 वर्ष पूर्व बनी वैध बिल्डिंगों का न तो भूअधिग्रहण किया गया, न ही मकान मालिकों को मुआवजा दिया। भूस्वामियों की सुविधा का कोई ध्यान नहीं रखा गया। जिस जगह सड़क का निर्माण किया, उसे जमीनी लेवल से काफी ऊंचा बना दिया गया, जिससे बारिश में यहां भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। राजमार्ग बनाने से पूर्व विद्युत लाइन को भी शिफ्ट नहीं किया गया, खड़े हुए विद्युत पोलों और कैंचियों के बीच ही राजमार्ग निर्माण कर दिया गया, जो आज भी सड़क के बीच ही खड़े हैं एवं किसी बड़े हादसे को आमंत्रण दे रहे हैं। भीलवाड़ा की अतिमहत्वाकांक्षी चंबल परियोजना की लाइन एवं कस्बे की पेयजल लाइन को भी राजमार्ग निर्माण के दौरान काफी नीचे दबा दिया गया। राजमार्ग पर ऐसी गंभीर खामियों के बाद भी एक दशक से उपखंड एवं जिला प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किया जाना आश्चर्यजनक तथ्य है।
एक ओर सड़क सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए सुप्रीम कोर्ट का राजमार्गों के प्रति गंभीर और सख्त रवैया नजर आ रहा है, वहीं दूसरी ओर अधिकारी और प्रशासन आंखें मूंदे इस राजमार्ग की व्यथा पर मोन धारण हैं। इस घोर लापरवाही का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। राजमार्ग की सकड़ाई खुलेआम दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रही है, किंतु प्राधिकरण न तो भूमि अधिग्रहण कर रहा है, न भवन मालिकों को मुआवजा दे रहा है, इस स्थिति को यथावत बनाए रखकर लगातार टोल वसूली की जा रही है, जिसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की आवश्यकता है।