समस्त सृष्टि में ईश्वर का दर्शन करना ही भगवान को पाने का सरल मार्ग : पूज्य कुलदीप जी शर्मा
भीलवाड़ा/आकोला (रमेश चंद डाड) श्रीमुनिकुल ब्रह्मचर्याश्रम, बरूंदनी में गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अंतर्गत आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस कथा प्रवक्ता पूज्य कुलदीप जी शर्मा (बांगरेड़) ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान को प्राप्त करने का सबसे सरल मार्ग समस्त सृष्टि में ईश्वर का दर्शन करना है। उन्होंने कहा कि यह संपूर्ण पृथ्वी, प्रकृति एवं प्रत्येक जीव भगवान का ही स्वरूप है। प्रत्येक प्राणी के प्रति प्रेम, करुणा, सेवा और सम्मान का भाव रखना ही मानव जीवन का परम धर्म है।
कथा के दौरान भगवान शिव एवं माता सती के पावन चरित्र का भावपूर्ण वर्णन करते हुए पूज्य व्यासपीठ ने बताया कि जब भगवान शिव ने माता सती को पिता दक्ष के यज्ञ में जाने से मना किया, तब भी वे वहाँ चली गईं। इस प्रसंग से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने कहा कि गृहस्थ जीवन में पति-पत्नी को एक-दूसरे की भावनाओं, मर्यादाओं एवं उचित परामर्श का सम्मान करते हुए निर्णय लेना चाहिए। ऐसा करने से परिवार में सुख, शांति एवं समरसता बनी रहती है।
इसके पश्चात भगवान शिव एवं माता पार्वती के दिव्य विवाह महोत्सव का अत्यंत मनोहारी एवं भावपूर्ण वर्णन किया गया। भूत-प्रेतों की अलौकिक बारात, देवताओं की दिव्य उपस्थिति तथा मंगल गीतों के बीच शिव-विवाह की झांकी ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। पूरा कथा पंडाल "हर-हर महादेव" के जयघोष से गुंजायमान हो उठा और श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो गए।
कथा के समापन पर भगवान शिव-पार्वती के मंगलमय विवाह महोत्सव का आयोजन श्रद्धा एवं उल्लास के साथ किया गया। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों सहित दूर-दराज़ से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर धर्म, संस्कार, भक्ति एवं आदर्श जीवन का अमूल्य संदेश ग्रहण किया।