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Bikaner से बड़ी खबर, कांग्रेस कार्यकर्ताओ की पीबीएम सुधार जन आंदोलन के बीच पुलिस से हुई हल्की झड़प,NSUI अध्यक्ष श्रीकृष्णगोदारा के नेतृत्व में चिकित्सा मंत्री के पुतले की निकाली शव यात्रा, विरोध प्रदर्शन देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिशनाराम सियाग कांग्रेस नेता शिवलाल गोदारा, यूथ अध्यक्ष भंवर लाल कूकना , राजेश गोदारा, सुमित कोचर सहित कई नेता मौजूद #bikaner NSUI अध्यक्ष श्रीकृष्णगोदारा ने कहा पुलिस रोक रही है देखते है कब तक ऐसा करेगी , हम ज्ञापन देना चाहते थे सिर्फ Dr B D Kalla

Bikaner, Bikaner | Jun 27, 2026

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हकीकत से कोसों दूर हैं हेल्पलाइन नंबर के दावे,बिजली कंपनी के हेल्पलाइन नंबर जब अस्तित्व में नही तो बिल पर देने का क्या फायदा,कोई ऐसा नंबर दे जो तुरंत उठा लिया जाए,​अक्सर जब गली या मोहल्ले की बिजली अचानक गुल हो जाती है, या कहीं तारों में फाल्ट जैसी कोई गंभीर अनहोनी हो जाती है, तो हमारी पहली उम्मीद बिजली कंपनी का हेल्पलाइन नंबर होता है। 'द बीकानेर न्यूज़' की इस खास ग्राउंड रिपोर्ट में आइए जानते हैं  
जब भी कोई आपात स्थिति होती है, तो उपभोक्ता सबसे पहले बिजली के बिल पर छपे नंबरों पर संपर्क करता है। लेकिन सच्चाई यह है कि मदद के लिए दिए गए ये नंबर अक्सर अस्तित्व में ही नहीं होते।
​हमारी पड़ताल में हेल्पलाइन व्यवस्था की जो खामियां सामने आईं, वे हैरान करने वाली हैं:
​बिल पर दर्ज नंबरों का सच: बिजली के बिल पर जो नंबर प्रमुखता से दिए जाते हैं, उन पर फोन मिलाने पर अक्सर यही सुनने को मिलता है कि "यह नंबर अमान्य है" या "अस्तित्व में नहीं है।" आपातकाल में यह जवाब किसी भी उपभोक्ता को निराश करने के लिए काफी है।
​व्हाट्सएप सहायता के नाम पर छलावा: जब उपभोक्ता कॉल से निराश होकर व्हाट्सएप का रुख करता है, तो वहां भी ऑटोमेटेड मैसेज के जंजाल में फंसकर रह जाता है। त्वरित समाधान के बजाय, यह प्रक्रिया इतनी उबाऊ और धीमी है कि आम आदमी परेशान होकर हार मान लेता है।
​लैंडलाइन की सुस्त चाल: अगर कोई उपभोक्ता कड़ी मशक्कत के बाद लैंडलाइन पर शिकायत दर्ज करवा भी दे, तो वहां से प्रतिक्रिया आने में घंटों लग जाते हैं। शिकायत दर्ज होने के कम से कम 30से 40 मिनट बाद कंपनी की तरफ से फोन आता है।
​सबसे बड़ा सवाल: जानमाल के खतरे का जिम्मेदार कौन?
कल्पना कीजिए, अगर गली में कहीं करंट दौड़ रहा हो, कोई तार टूट कर गिर गया हो, या कोई बड़ा हादसा होने की आशंका हो—ऐसे में क्या कोई व्यक्ति मदद के लिए एक घंटे तक इंतजार कर सकता है? इस एक घंटे की देरी में कोई बड़ी जनहानि हो सकती है। ऐसे में यह सवाल लाजिमी है कि आखिर आम आदमी इस लापरवाही के बीच क्या करे और किसके भरोसे रहे?
​आपकी राय है जरूरी
इस पूरी व्यवस्था पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है? क्या आपने भी कभी इस तरह की परेशानी का सामना किया है?
​इस महत्वपूर्ण जानकारी को जन-जन तक पहुँचाने के लिए वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दें। ऐसी ही और भी जमीनी और सच्ची खबरों के लिए The Bikaner News को फॉलो करना ना भूलें। Jethanand Vyas

हकीकत से कोसों दूर हैं हेल्पलाइन नंबर के दावे,बिजली कंपनी के हेल्पलाइन नंबर जब अस्तित्व में नही तो बिल पर देने का क्या फायदा,कोई ऐसा नंबर दे जो तुरंत उठा लिया जाए,​अक्सर जब गली या मोहल्ले की बिजली अचानक गुल हो जाती है, या कहीं तारों में फाल्ट जैसी कोई गंभीर अनहोनी हो जाती है, तो हमारी पहली उम्मीद बिजली कंपनी का हेल्पलाइन नंबर होता है। 'द बीकानेर न्यूज़' की इस खास ग्राउंड रिपोर्ट में आइए जानते हैं जब भी कोई आपात स्थिति होती है, तो उपभोक्ता सबसे पहले बिजली के बिल पर छपे नंबरों पर संपर्क करता है। लेकिन सच्चाई यह है कि मदद के लिए दिए गए ये नंबर अक्सर अस्तित्व में ही नहीं होते। ​हमारी पड़ताल में हेल्पलाइन व्यवस्था की जो खामियां सामने आईं, वे हैरान करने वाली हैं: ​बिल पर दर्ज नंबरों का सच: बिजली के बिल पर जो नंबर प्रमुखता से दिए जाते हैं, उन पर फोन मिलाने पर अक्सर यही सुनने को मिलता है कि "यह नंबर अमान्य है" या "अस्तित्व में नहीं है।" आपातकाल में यह जवाब किसी भी उपभोक्ता को निराश करने के लिए काफी है। ​व्हाट्सएप सहायता के नाम पर छलावा: जब उपभोक्ता कॉल से निराश होकर व्हाट्सएप का रुख करता है, तो वहां भी ऑटोमेटेड मैसेज के जंजाल में फंसकर रह जाता है। त्वरित समाधान के बजाय, यह प्रक्रिया इतनी उबाऊ और धीमी है कि आम आदमी परेशान होकर हार मान लेता है। ​लैंडलाइन की सुस्त चाल: अगर कोई उपभोक्ता कड़ी मशक्कत के बाद लैंडलाइन पर शिकायत दर्ज करवा भी दे, तो वहां से प्रतिक्रिया आने में घंटों लग जाते हैं। शिकायत दर्ज होने के कम से कम 30से 40 मिनट बाद कंपनी की तरफ से फोन आता है। ​सबसे बड़ा सवाल: जानमाल के खतरे का जिम्मेदार कौन? कल्पना कीजिए, अगर गली में कहीं करंट दौड़ रहा हो, कोई तार टूट कर गिर गया हो, या कोई बड़ा हादसा होने की आशंका हो—ऐसे में क्या कोई व्यक्ति मदद के लिए एक घंटे तक इंतजार कर सकता है? इस एक घंटे की देरी में कोई बड़ी जनहानि हो सकती है। ऐसे में यह सवाल लाजिमी है कि आखिर आम आदमी इस लापरवाही के बीच क्या करे और किसके भरोसे रहे? ​आपकी राय है जरूरी इस पूरी व्यवस्था पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है? क्या आपने भी कभी इस तरह की परेशानी का सामना किया है? ​इस महत्वपूर्ण जानकारी को जन-जन तक पहुँचाने के लिए वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दें। ऐसी ही और भी जमीनी और सच्ची खबरों के लिए The Bikaner News को फॉलो करना ना भूलें। Jethanand Vyas

Bikaner, Bikaner | Jun 27, 2026

Bikaner से बड़ी खबर,
कांग्रेस कार्यकर्ताओ की पीबीएम सुधार जन आंदोलन के बीच पुलिस से हुई हल्की झड़प  चिकित्सा मंत्री के पुतले की निकाली शव यात्रा, विरोध प्रदर्शन देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिशनाराम सियाग  कांग्रेस नेता शिवलाल गोदारा, यूथ अध्यक्ष भंवर लाल कूकना , राजेश गोदारा, सुमित कोचर सहित कई नेता मौजूद
#bikaner 
NSUI अध्यक्ष श्रीकृष्णगोदारा ने कहा पुलिस रोक रही है 
देखते है कब तक ऐसा करेगी , हम ज्ञापन देना चाहते थे सिर्फ
Dr B D Kalla

Bikaner से बड़ी खबर, कांग्रेस कार्यकर्ताओ की पीबीएम सुधार जन आंदोलन के बीच पुलिस से हुई हल्की झड़प चिकित्सा मंत्री के पुतले की निकाली शव यात्रा, विरोध प्रदर्शन देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिशनाराम सियाग कांग्रेस नेता शिवलाल गोदारा, यूथ अध्यक्ष भंवर लाल कूकना , राजेश गोदारा, सुमित कोचर सहित कई नेता मौजूद #bikaner NSUI अध्यक्ष श्रीकृष्णगोदारा ने कहा पुलिस रोक रही है देखते है कब तक ऐसा करेगी , हम ज्ञापन देना चाहते थे सिर्फ Dr B D Kalla

Bikaner, Bikaner | Jun 27, 2026

बीकानेर पुलिस का नशे के खिलाफ बड़ा एक्शन: 3.21 करोड़ रुपये के अवैध मादक पदार्थ किए गए नष्ट! 
​"नशे के विरुद्ध निर्णायक प्रहार - सुरक्षित समाज की ओर" के संकल्प को साकार करते हुए बीकानेर पुलिस ने आज एक अहम कार्रवाई को अंजाम दिया है।
​ड्रग्स डिस्पोजल कमेटी और जिला पुलिस अधीक्षक श्री मृदुल कच्छावा समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में जब्त किए गए भारी मात्रा में अवैध मादक पदार्थों को नियमानुसार नष्ट किया गया।
​कार्रवाई के मुख्य बिंदु:
130 अलग-अलग मामलों (अभियोगों) में जब्त किए गए माल का हुआ निस्तारण।
नष्ट किए गए मादक पदार्थों की कुल अनुमानित कीमत 3 करोड़ 21 लाख 36 हज़ार 275 रुपये है।
​क्या-क्या किया गया नष्ट?
🔹 2013 किग्रा डोडा पोस्त
🔹 10.767 किग्रा गांजा
🔹 302.73 ग्राम एम.डी.
🔹 343.54 ग्राम स्मैक
🔹 54.83 ग्राम एमडीएमए
🔹 59 नशे की टैबलेट्स
​बीकानेर को नशामुक्त और सुरक्षित बनाने की दिशा में पुलिस का यह एक बेहद सराहनीय कदम है! Bikaner Police Mridul Kachawa IPS 
​शहर की हर बड़ी और सच्ची ख़बर सबसे पहले पाने के लिए द बीकानेर न्यूज़ के पेज को फॉलो करना न भूलें।
​#TheBikanerNews #Bikaner #BikanerPolice #RajasthanPolice #SayNoToDrugs

बीकानेर पुलिस का नशे के खिलाफ बड़ा एक्शन: 3.21 करोड़ रुपये के अवैध मादक पदार्थ किए गए नष्ट! ​"नशे के विरुद्ध निर्णायक प्रहार - सुरक्षित समाज की ओर" के संकल्प को साकार करते हुए बीकानेर पुलिस ने आज एक अहम कार्रवाई को अंजाम दिया है। ​ड्रग्स डिस्पोजल कमेटी और जिला पुलिस अधीक्षक श्री मृदुल कच्छावा समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में जब्त किए गए भारी मात्रा में अवैध मादक पदार्थों को नियमानुसार नष्ट किया गया। ​कार्रवाई के मुख्य बिंदु: 130 अलग-अलग मामलों (अभियोगों) में जब्त किए गए माल का हुआ निस्तारण। नष्ट किए गए मादक पदार्थों की कुल अनुमानित कीमत 3 करोड़ 21 लाख 36 हज़ार 275 रुपये है। ​क्या-क्या किया गया नष्ट? 🔹 2013 किग्रा डोडा पोस्त 🔹 10.767 किग्रा गांजा 🔹 302.73 ग्राम एम.डी. 🔹 343.54 ग्राम स्मैक 🔹 54.83 ग्राम एमडीएमए 🔹 59 नशे की टैबलेट्स ​बीकानेर को नशामुक्त और सुरक्षित बनाने की दिशा में पुलिस का यह एक बेहद सराहनीय कदम है! Bikaner Police Mridul Kachawa IPS ​शहर की हर बड़ी और सच्ची ख़बर सबसे पहले पाने के लिए द बीकानेर न्यूज़ के पेज को फॉलो करना न भूलें। ​#TheBikanerNews #Bikaner #BikanerPolice #RajasthanPolice #SayNoToDrugs

Bikaner, Bikaner | Jun 27, 2026

पीबीएम अस्पताल की अव्यवस्थाओं पर फूटा छात्रों का गुस्सा, NSUI कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हुई तीखी नोकझोंक 

NSUI अध्य्क्ष श्रीकृष्णकांत गोदारा के  नेतृत्व में ​पीबीएम अस्पताल में फैली भारी अव्यवस्थाओं और हाल ही में प्रसूताओं की मौत के गंभीर मामलों को लेकर शनिवार को NSUI कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया।
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​जूतों की माला लेकर पहुंचे: विरोध रैली निकालते हुए छात्र अस्पताल अधीक्षक के ऑफिस की तरफ जूताें की माला लेकर जाना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने मुख्य दरवाजे पर ही उन्हें रोक लिया। जबरन अंदर जाने के प्रयास में वर्दी और सादी वर्दी में तैनात पुलिसकर्मियों से छात्रों की तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई।
​मौके पर माहौल तनावपूर्ण होने के बाद, स्थिति को नियंत्रित करने और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा।
​चिकित्सा मंत्री के खिलाफ नारेबाजी: NSUI कार्यकर्ताओं ने चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और सरकार पर स्वास्थ्य सेवाओं की अनदेखी का आरोप लगाया।
​छात्रों की स्पष्ट मांग है कि अस्पताल की अव्यवस्थाओं को तत्काल दूर किया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है।
​#Bikaner #PBMHospital #NSUI #BikanerNews #Rajasthan #Protest #HealthCare #RajasthanNews

पीबीएम अस्पताल की अव्यवस्थाओं पर फूटा छात्रों का गुस्सा, NSUI कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हुई तीखी नोकझोंक NSUI अध्य्क्ष श्रीकृष्णकांत गोदारा के नेतृत्व में ​पीबीएम अस्पताल में फैली भारी अव्यवस्थाओं और हाल ही में प्रसूताओं की मौत के गंभीर मामलों को लेकर शनिवार को NSUI कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। ​ ​जूतों की माला लेकर पहुंचे: विरोध रैली निकालते हुए छात्र अस्पताल अधीक्षक के ऑफिस की तरफ जूताें की माला लेकर जाना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने मुख्य दरवाजे पर ही उन्हें रोक लिया। जबरन अंदर जाने के प्रयास में वर्दी और सादी वर्दी में तैनात पुलिसकर्मियों से छात्रों की तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई। ​मौके पर माहौल तनावपूर्ण होने के बाद, स्थिति को नियंत्रित करने और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। ​चिकित्सा मंत्री के खिलाफ नारेबाजी: NSUI कार्यकर्ताओं ने चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और सरकार पर स्वास्थ्य सेवाओं की अनदेखी का आरोप लगाया। ​छात्रों की स्पष्ट मांग है कि अस्पताल की अव्यवस्थाओं को तत्काल दूर किया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। ​#Bikaner #PBMHospital #NSUI #BikanerNews #Rajasthan #Protest #HealthCare #RajasthanNews

Bikaner, Bikaner | Jun 27, 2026