छात्र-युवा अदालत में गूंजी Gen-Z और Gen-Alpha की आवाज
*शिक्षा, रोजगार और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था के सवाल पर SFI-DYFI का छात्र -युवा अदालत.*
मुजफ्फरपुर
छात्रों और युवाओं के सवालों को केंद्र में रखकर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) के संयुक्त मोर्चे द्वारा आज मुजफ्फरपुर में “छात्र-युवा अदालत” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वर्तमान शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितता, बेरोजगारी, महंगी शिक्षा, विश्वविद्यालयों की बदहाली और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों पर गंभीर चर्चा हुई।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता SFI के राष्ट्रीय महासचिव श्री सृजन भट्टाचार्य रहे। उन्होंने कहा कि आज देश और बिहार का युवा केवल भाषण नहीं, बल्कि अपने सवालों का जवाब और अपने भविष्य की गारंटी चाहता है। Gen-Z और Gen-Alpha की नई पीढ़ी सवाल पूछ रही है कि शिक्षा अधिकार क्यों महंगी होती जा रही है, रोजगार के अवसर क्यों घट रहे हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं को बार-बार विवादों में क्यों धकेला जा रहा है।
उन्होंने कहा कि छात्र-युवा अदालत किसी एक परीक्षा या एक भर्ती का सवाल नहीं है, बल्कि यह उस पूरी व्यवस्था के खिलाफ जन-अदालत है जो युवाओं के सपनों और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।
बिहार में शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट में है. SFI के राज्य सचिव देवदत्त कुमार
ने कहा कि बिहार में सरकारी स्कूलों और उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थिति को लेकर सरकार को गंभीरता से जवाब देना चाहिए। उपलब्ध सरकारी/संसदीय आंकड़ों के अनुसार बिहार में स्कूल शिक्षकों के स्वीकृत पदों में बड़ी संख्या लंबे समय से रिक्त रही है; 2022-23 के आंकड़ों में करीब 32 प्रतिशत शिक्षक पद रिक्त बताए गए थे।
आज भी स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक, विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, खेल मैदान, छात्रावास और बेहतर आधारभूत सुविधाएं छात्रों की बड़ी जरूरत हैं। उच्च शिक्षा में भी नियमित शिक्षकों की कमी, आधारभूत संरचना और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता जैसे सवाल गंभीर हैं। केंद्र सरकार के संसद में दिए जवाब के अनुसार बिहार में 37 विश्वविद्यालय और 1,092 कॉलेजों में 26 लाख से अधिक विद्यार्थी उच्च शिक्षा में नामांकित हैं।
छात्र -युवा अदालत को सम्बोधित करते हुए DYFA के राज्य अध्यक्ष डॉ. आसिफ हुसैन ने कहा की
भर्ती परीक्षाओं को पारदर्शी बनाना होगा
बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर लगातार पैदा हो रहे विवाद युवाओं के भविष्य के लिए बेहद चिंताजनक हैं।
70वीं BPSC परीक्षा को लेकर उठे सवालों की निष्पक्ष एवं विश्वसनीय जांच, परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता तथा दोषियों पर कार्रवाई की मांग दोहराई गई। हाल के दिनों में भी इस परीक्षा को लेकर छात्रों द्वारा न्यायिक जांच की मांग पर प्रदर्शन हुए हैं।
वहीं TRE-4 को लेकर भी अभ्यर्थियों की मांगों को गंभीरता से लेने की बात कही गई। सरकार ने TRE-4 को सिंगल फेज में कराने का निर्णय लिया है और भर्ती प्रक्रिया में हजारों पद शामिल हैं।
SFI जिला सयोजक आरिफ हुसैन ने कहा की सिर्फ परीक्षा की घोषणा पर्याप्त नहीं है। परीक्षा प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और अभ्यर्थी हितैषी होनी चाहिए।
लाइब्रेरियन बहाली की तारीख घोषित करो स्कूल-कॉलेजों में पुस्तकालय शिक्षा की बुनियादी जरूरत है, लेकिन लाइब्रेरियन के पदों पर नियमित बहाली का अभाव छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय है। अभ्यर्थियों द्वारा इस मुद्दे को लेकर लगातार आंदोलन किए जाने की बात भी सामने आई है।
DYFI के जिला सयोजक संतोष कुमार यादव ने कहा की
70वीं BPSC परीक्षा से जुड़े तमाम सवालों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और अन्य अनियमितताओं पर कड़ी कार्रवाई हो।
TRE-4 की भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनाई जाए तथा अभ्यर्थियों की जायज मांगों पर निर्णय लिया जाए।
लाइब्रेरियन की नियमित बहाली की तारीख घोषित की जाए।
बिहार के सभी सरकारी स्कूलों में रिक्त शिक्षक पदों को तत्काल भरा जाए।
स्कूल-कॉलेजों में पुस्तकालय, प्रयोगशाला, छात्रावास और खेल सुविधाओं को मजबूत किया जाए।
विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों एवं गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों के रिक्त पदों पर नियमित बहाली की जाए।
उच्च शिक्षा को महंगा बनाने के बजाय सस्ती, गुणवत्तापूर्ण और सबके लिए सुलभ शिक्षा सुनिश्चित की जाए।
छात्रवृत्ति, छात्रावास और अन्य सरकारी छात्र सुविधाओं में देरी समाप्त की जाए।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एक पारदर्शी और जवाबदेह परीक्षा तंत्र बनाया जाए।
परीक्षा में गड़बड़ी होने पर छात्रों को वर्षों तक न्याय के लिए भटकने के बजाय समयबद्ध शिकायत निवारण व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
शिक्षा संस्थानों में लोकतांत्रिक माहौल और छात्रों की आवाज को सम्मान दिया जाए।
संविधान, लोकतंत्र, वैज्ञानिक सोच और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा की जाए।
“युवा बोझ नहीं, बिहार का भविष्य हैं”
SFI-DYFI नेताओं ने कहा कि युवाओं को बोझ बताने की मानसिकता के बजाय सरकार को उनके लिए शिक्षा, रोजगार और सम्मानजनक भविष्य सुनिश्चित करना होगा।
उन्होंने कहा कि आज की छात्र-युवा पीढ़ी अपने अधिकारों के प्रति पहले से अधिक जागरूक है। Gen-Z और Gen-Alpha केवल नौकरी नहीं मांग रहे, वे ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जिसमें मेहनत का सम्मान हो, परीक्षा में ईमानदारी हो, शिक्षा सबके लिए उपलब्ध हो और भविष्य सुरक्षित हो।
SFI-DYFI ने घोषणा की कि छात्र-युवा अदालत से उठे इन सवालों को अब मुजफ्फरपुर से लेकर पूरे बिहार के छात्रों और युवाओं के बीच ले जाया जाएगा तथा शिक्षा और रोजगार के सवाल पर व्यापक आंदोलन खड़ा किया जायेगा.
छात्र -युवा अदालत को शिक्षा विद जितेन्द्र चौधरी, शिक्षक वैदनाथ विद्यार्थी, सुफिया नौसाद, कांग्रेस के दीनबंधु क्रन्तिकारी, NSUI के राज्य सचिव अनुठे अली, इंसाफ अधिकार मंच के राज्य उपाध्यक्ष शाहनवाज हुसैन, इंसाफ अधिकार मंच के राज्य उपाध्यक्ष फहद ज़मा, सन्नी राज,दीपक कुमार, रवि राज, सीपीएम जिला सचिव दिनेश भगत, सुन्दश्वर सहनी, अब्दुल गफ्फार, महेंद्र राय, सूरज कुमार सिंह ने भी सम्बोधित किया.