सम्भल में राजस्व अधिकारी अपनी कार्यशैली सुधारें.पूर्व सचिव डॉ, अमित कुमार उठवाल एडवोकेट वीडियो को शेयर करने की अपील
यूपी के जनपद सम्भल में सम्भल बार एसोसिएशन सम्भल के पूर्व सचिव एवं वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अमित कुमार उठवाल एडवोकेट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सम्भल जनपद के राजस्व न्यायालयों में पीठासीन अधिकारियों एवं राजस्व कर्मचारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सरकार एवं राजस्व परिषद द्वारा किसानों और काश्तकारों की समस्याओं के समाधान के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाने के बावजूद सम्भल के राजस्व न्यायालयों में उन आदेशों का अपेक्षित अनुपालन नहीं किया जा रहा है। इसके चलते किसानों को अपने ही भूमि संबंधी मामलों के निस्तारण के लिए महीनों और कई बार वर्षों तक न्यायालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।डॉ. उठवाल ने कहा कि राजस्व परिषद एवं उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट निर्देश जारी कर रखे हैं कि अभियान चलाकर पात्र किसानों की विरासत दर्ज की जाए। जिन काश्तकारों ने नियमानुसार निर्धारित समयावधि पूरी कर ली है, उन्हें संक्रमणीय भूमिधर घोषित किया जाए तथा खतौनी में दर्ज त्रुटियों को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त किया जाए। इन निर्देशों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को उनकी भूमि के अधिकारों का लाभ दिलाना और राजस्व अभिलेखों को त्रुटिरहित बनाना है। लेकिन सम्भल में राजस्व अधिकारी एवं कर्मचारी कथित रूप से अपनी हठधर्मिता पर उतारू हैं और शासन की मंशा के अनुरूप कार्य नहीं कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्व परिषद के निर्देशों की अनदेखी करते हुए नामांतरण की निर्विवाद पत्रावलियों को भी अदम पैरवी अथवा साक्ष्यों के अभाव का हवाला देकर निरस्त कर दिया जाता है। जबकि निर्विवाद मामलों में नियमानुसार सुनवाई कर समयबद्ध तरीके से आदेश पारित किया जाना चाहिए। इस प्रकार की कार्यशैली से आम किसान को अनावश्यक आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने उपजिलाधिकारी स्तर के न्यायालयों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नए वाद समय से दर्ज नहीं किए जाते। यदि किसी प्रकार वाद दर्ज हो भी जाता है तो दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद भी लंबे समय तक आदेश पारित नहीं किए जाते। न्यायालयों में मुकदमों के निस्तारण की निर्धारित प्रक्रिया और समयबद्धता का पालन नहीं होने से वादकारियों का न्याय व्यवस्था से विश्वास कमजोर हो रहा है।उन्होंने विशेष रूप से धारा 24, 30, 31/32 एवं 76 सहित विभिन्न राजस्व धाराओं के अंतर्गत आने वाले मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मामलों में संबंधित विभागों और कर्मचारियों की रिपोर्ट कई-कई महीने तक न्यायालयों में उपलब्ध नहीं हो पाती। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आदेश पारित करने में भी अनावश्यक विलंब किया जाता है। इतना ही नहीं, न्यायालय द्वारा आदेश पारित कर दिए जाने के बावजूद उनका क्रियान्वयन कई-कई महीने तक नहीं हो पाता। ऐसे में न्यायालय से आदेश प्राप्त करने के बाद भी किसानों को वास्तविक राहत नहीं मिल पाती।
डॉ. अमित कुमार उठवाल ने उपजिलाधिकारी न्यायिक नीरज त्रिपाठी की कार्यशैली पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि काश्तकारों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। पत्रावलियों पर ऐसी टिप्पणियां की जाती हैं, जिनके कारण उन्हें पुनः रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए संबंधित विभागों में भेज दिया जाता है। इससे पहले से लंबित मामलों में और अधिक देरी होती है तथा किसानों को बार-बार अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। उन्होंने इसे किसानों के हितों के प्रतिकूल बताते हुए कहा कि न्यायालयों का उद्देश्य लोगों को न्याय देना है, न कि तकनीकी टिप्पणियों और अनावश्यक औपचारिकताओं के माध्यम से उनकी परेशानियां बढ़ाना।
उन्होंने बताया कि राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली को लेकर अधिवक्ताओं में भी गहरा असंतोष है। इसी के चलते अधिवक्ताओं ने संबंधित अधिकारी के न्यायिक कार्य का बहिष्कार कर रखा है। इसके बावजूद अभी तक किसी सक्षम प्रशासनिक अथवा न्यायिक अधिकारी द्वारा इस पूरे प्रकरण का प्रभावी संज्ञान लेकर समाधान निकालने की पहल नहीं की गई है। यह स्थिति न्यायिक व्यवस्था और आम नागरिकों के हितों की दृष्टि से अत्यंत चिंताजनक है।
डॉ. उठवाल ने कहा कि किसान पहले ही महंगाई, खेती की बढ़ती लागत और विभिन्न प्रशासनिक समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे में यदि उसे अपनी विरासत दर्ज कराने, खतौनी की त्रुटियां ठीक कराने, नामांतरण कराने और अपनी भूमि से संबंधित वैधानिक अधिकार प्राप्त करने के लिए भी अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़े तो यह न्याय व्यवस्था के मूल उद्देश्य के विपरीत है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार, राजस्व परिषद तथा जिला प्रशासन से मांग की कि सम्भल के राजस्व न्यायालयों की कार्यशैली की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए। लंबित वादों के निस्तारण के लिए समयसीमा निर्धारित हो, निर्विवाद नामांतरण पत्रावलियों का नियमानुसार निस्तारण किया जाए, शासन के निर्देशों के अनुसार विरासत दर्ज कराने एवं खतौनी की त्रुटियां सुधारने का अभियान चलाया जाए तथा पारित आदेशों का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित कराया जाए।उन्होंने कहा कि किसानों और आम नागरिकों को सुलभ, पारदर्शी एवं समयबद्ध न्याय मिलना उनका वैधानिक अधिकार है। यदि राजस्व न्यायालयों में इसी प्रकार की कार्यशैली जारी रही तो आम किसान न्याय पाने के लिए कहां जाएगा? उन्होंने मांग की कि अधिवक्ताओं की समस्याओं को गंभीरता से सुनकर शीघ्र समाधान कराया जाए, ताकि राजस्व न्यायालयों में सामान्य न्यायिक कार्य सुचारु रूप से संचालित हो सके।
बाइट डॉ, अमित कुमार उठावाल एडवोकेट सम्भल
Sambhal, Sambhal | Oct 31, 2026